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Terrorists Attack: घुसपैठ कर आए आतंकी कहीं और जाना चाहते थे, बौखलाहट में कर बैठे ये काम; मकसद न हो पाया पूरा
Wed, 30 Oct 2024 01:45 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 30 Oct 2024 01:45 PM IST
सार
जम्मू के अखनूर में 27 घंटे चली मुठभेड़ में दो और आतंकी ढेर कर दिए गए। आतंकी मंदिर के बेसमेंट में छिपे थे। रातभर निगरानी के बाद सुबह होते ही दो घंटे में सुरक्षाबलों ने आतंकियों को मार गिराया। एआईवी और यूएवी का इस्तेमाल किया गया।
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Jammu Akhnoor Terrorists Attack
- फोटो : PTI
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विस्तार
जम्मू के अखनूर में मारे गए आतंकियों को लेकर नई बात सामने आई है। अखनूर एलओसी पर मारे गए आतंकी सीमा पार से घुसपैठ कर एक दिन पहले आए थे। इन आतंकियों का सैन्य काफिले पर हमला करना पहली योजना नहीं था।
रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि आतंकी सीमा पार से घुसपैठ करके आए थे, जिनका टारगेट कुछ और था। क्योंकि पूर्व में इन इलाकों में घुसपैठ होती रही है। पिछले कुछ समय से कुछ प्रययास भी हुए। ये कहीं और हमला करना चाहते थे। इसीलिए वे अपने साथ इतना सारा सामान लेकर आए।
पूर्व बिग्रेडियर विजय सागर का कहना है कि आतंकियों के पास एक डिजिटल घड़ी थी। घड़ी को कनेक्ट करने के लिए ही वे मोबाइल फोन तलाश रहे होंगे। आतंकी मोबाइल का हाटस्पाट लेकर सीमा पार या फिर अपने स्थानीय गाइड से बात करना चाहते होंगे। ताकि उन्हें आगे का प्लान बताया जाता। लेकिन इन्हें मोबाइल नहीं मिला।
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आतंकी स्थानीय मोबाइल नेटवर्क इस्तेमाल करते हैं,ताकि किसी को शक न हो। आतंकियों को ये भी पता चल चुका था कि वे मंदिर में आ गए हैं। बच्चों से बात हो चुकी है। बच्चों को मारेंगे तो उनकी मौजूदगी का पता चलेगा। छोड़ देंगे तो क्या पता वहां से चुपके से भाग जाएं। लेकिन इत्तेफाक से वहां से सैन्य काफिला गुजरा और आतंकियों ने बौखलाहट में हमला कर दिया।
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रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि आतंकी सीमा पार से घुसपैठ करके आए थे, जिनका टारगेट कुछ और था। क्योंकि पूर्व में इन इलाकों में घुसपैठ होती रही है। पिछले कुछ समय से कुछ प्रययास भी हुए। ये कहीं और हमला करना चाहते थे। इसीलिए वे अपने साथ इतना सारा सामान लेकर आए।
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पूर्व बिग्रेडियर विजय सागर का कहना है कि आतंकियों के पास एक डिजिटल घड़ी थी। घड़ी को कनेक्ट करने के लिए ही वे मोबाइल फोन तलाश रहे होंगे। आतंकी मोबाइल का हाटस्पाट लेकर सीमा पार या फिर अपने स्थानीय गाइड से बात करना चाहते होंगे। ताकि उन्हें आगे का प्लान बताया जाता। लेकिन इन्हें मोबाइल नहीं मिला।
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आतंकी स्थानीय मोबाइल नेटवर्क इस्तेमाल करते हैं,ताकि किसी को शक न हो। आतंकियों को ये भी पता चल चुका था कि वे मंदिर में आ गए हैं। बच्चों से बात हो चुकी है। बच्चों को मारेंगे तो उनकी मौजूदगी का पता चलेगा। छोड़ देंगे तो क्या पता वहां से चुपके से भाग जाएं। लेकिन इत्तेफाक से वहां से सैन्य काफिला गुजरा और आतंकियों ने बौखलाहट में हमला कर दिया।
आतंकियों को मस्जिद मिलती तो वह वहां भी छुप जाते
पूर्व बिग्रेडियर राजिंदर जमवाल कहते हैं कि आतंकी जब घुसपैठ करके आ जाते हैं। पता चलने पर उनका पहला काम पनाह लेना होता है। यदि बट्टल में मंदिर की जगह मस्जिद होती तो हो सकता है कि वह वहां भी छुप जाते। हालांकि जम्मू सूबे में मंदिर में छुपकर आतंकियों से हुई मुठभेड़ का ये पहला मामला है।
पूर्व बिग्रेडियर राजिंदर जमवाल कहते हैं कि आतंकी जब घुसपैठ करके आ जाते हैं। पता चलने पर उनका पहला काम पनाह लेना होता है। यदि बट्टल में मंदिर की जगह मस्जिद होती तो हो सकता है कि वह वहां भी छुप जाते। हालांकि जम्मू सूबे में मंदिर में छुपकर आतंकियों से हुई मुठभेड़ का ये पहला मामला है।
सैन्य अफसरों को निशाना बनाना चाहते थे दहशतगर्द
आतंकियों के पास जिस तरह से गोला-बारूद और सामान बरामद हुआ है। उससे साफ है कि आतंकी बड़े हमले और लंबी मुठभेड़ के लिए आए थे। आतंकियों के पास दर्द निवारक दवाएं, ड्राई फ्रूट, एम4 और एके 47 राइफल, पूरी तरह से भरी हुई मैगजीन मिली हैं।
आतंकियों के पास जिस तरह से गोला-बारूद और सामान बरामद हुआ है। उससे साफ है कि आतंकी बड़े हमले और लंबी मुठभेड़ के लिए आए थे। आतंकियों के पास दर्द निवारक दवाएं, ड्राई फ्रूट, एम4 और एके 47 राइफल, पूरी तरह से भरी हुई मैगजीन मिली हैं।
इस सामान से अंदाजा लगाया जा रहा है कि दहशतगर्द बड़े हमले और अधिक देर तक लड़ने के इरादे से आए थे। इनकी आयु 18 से 20 वर्ष के बीच है, जबकि ये कुछ समय पहले ही प्रशिक्षित हुए थे। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार सुबह आतंकियों ने ऑपरेशन पर मौजूद कुछ सैन्य अफसरों पर ग्रेनेड फेंकने का प्रयास किया। ये सैन्य अफसरों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से आए थे।