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Jammu News: जम्मू में पर्यटकों को रोकने के लिए कारोबारी-उद्यमी गंभीर, प्रोजेक्टों में तेजी लाने की अपील

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तवी रिवर फ्रंट तथा मुबारक मंडी प्रोजेक्ट में लाई जाए तेजी, पटनीटॉप को गुलमर्ग-पहलगाम की तरह किया जाए विकसित ताकि पर्यटक आकर्षित हों
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मुख्य सचिव से मिलकर परियोजनाओं और स्थानीय ज्वलंत मुद्दों पर की चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कटड़ा के बाद अब कश्मीर के जल्द ही रेल नेटवर्क से जुड़ने की खबरों के बीच कारोबार प्रभावित होने की आशंका से कारोबारी तथा औद्योगिक संगठन गंभीर हैं। उन्होंने चिंता जताई है कि यदि जम्मू में भी पर्यटकों को रोकना है ताकि कारोबार पर असर न पड़े तो यहां चल रहे पर्यटन प्रोजेक्टों को जल्द से जल्द पूरा किए जाने की जरूरत है। साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कुछ नए प्रोजेक्ट भी शुरू किए जाने चाहिए।
सोमवार को चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री जम्मू के एक शिष्टमंडल ने मुख्य सचिव अटल डुल्लू से मुलाकात कर पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं को गति देने पर जोर दिया है। साथ ही जम्मू में यात्रियों और पर्यटकों को रोकने के लिए नए प्रोजेक्टों को शुरू करने के साथ ही पुराने प्रोजेक्टों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि तवी नदी के किनारों के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए चालू परियोजनाओं में तेजी लाने की जरूरत है। इसके साथ मुबारक मंडी हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के काम को तेज करके वहां पर लाइट और साउंड सिस्टम जल्द शुरू किया जाए। गुलमर्ग और पहलगाम की तर्ज पर पटनीटॉप को एक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देना आवश्यक है।
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चैंबर के अध्यक्ष अरुण गुप्ता की अध्यक्षता में सदस्यों ने फल और सब्जी मंडी नरवाल के आवंटियों की लीज डीड नवीनीकृत करने और ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की। शिव मार्केट रेलवे स्टेशन जम्मू के आवंटियों द्वारा निर्धारित शुल्क जमा करने के बावजूद पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से निष्पादन नहीं किया गया है और इसमें तेजी लाई जाए। बाहु प्लाजा की व्यावसायिक दुकानों के कुछ आवंटियों को कब्जे और लीज डीड नहीं दी गई है और उनके निष्पादन में भी तेजी लाई जाए। विलंबित भुगतान अधिनियम जो वर्तमान में एमएसएमई पंजीकृत इकाइयों पर लागू है, एमएसएमई पंजीकृत फर्मों के लिए भी उपलब्ध हो। इसके अलावा ढाबों, हलवाइयों और चाय की दुकानों के संबंध में जीएसटी संरचना की फिर से जांच करने और इसे कम करने की जरूरत है, अन्यथा समग्र कर स्तर को 50 लाख तक बढ़ाया जा सकता है। ई-वे बिल की मौजूदा सीमा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख की जाए। शहर में पुराने क्षतिग्रस्त पानी के पाइपों को हटाकर नए पाइप बिछाए जाएं। सरकार को भूमि के पहले/मूल आवंटन के 25 साल की अवधि के बाद रूपांतरण शुल्क के रूप में मामूली राशि वसूलने के बाद स्थानीय भूमि मालिकों/उद्यमियों को पट्टे पर दी गई औद्योगिक भूमि के स्वामित्व अधिकार की अनुमति देने वाली एक योजना बनानी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल में चैंबर पदाधिकारियों में अनिल गुप्ता, राजीव गुप्ता, मनीष गुप्ता, राजेश गुप्ता शामिल रहे।
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छह लाख प्रति कनाल किया जाए कस्टोडियन भूमि का हस्तांतरण शुल्क
मुख्य सचिव को बताया कि कस्टोडियन भूमि को सर्किल रेट लगाकर औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटित किया जा रहा है। हमारा अनुरोध है कि उक्त भूमि का हस्तांतरण/आवंटन सामान्य औद्योगिक भूमि के हस्तांतरण शुल्क की दरों के बराबर शुल्क छह लाख प्रति कनाल किया जाए।

मौजूदा औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहन दें
सरकार ने मौजूदा उद्योगों को जीवित रहने और व्यवहार्य बनाने के लिए टर्नओवर प्रोत्साहन की घोषणा की है, लेकिन आज तक किसी भी औद्योगिक इकाई को कोई टर्नओवर प्रोत्साहन नहीं दिया गया है। सरकार वर्ष 2021-22 और 2022-23 के लिए ये प्रोत्साहन बिना किसी कैपिंग के उद्योगों के लिए जल्द जारी करे। व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए वैट माफी योजना और बिजली माफी की मांग की गई।


कोट
व्यापार निकायों और उद्योग संघों के प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों के साथ बातचीत करते हुए आश्वासन दिया कि सभी मामलों को एक समय के भीतर हल करने के उचित प्रयास किए जाएंगे। खनन के लिए लंबित पर्यावरणीय मंजूरी और परियोजना मंजूरी समिति की स्थापना पर भी विचार किया जाएगा। - अटल डुल्लू, मुख्य सचिव
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