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जम्मू-कश्मीर: सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग में जातियों-जनजातियों की संख्या बढ़ेगी
Sun, 14 Mar 2021 12:13 AM IST
योगेश जोशी
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: योगेश जोशी
Updated Sun, 14 Mar 2021 12:13 AM IST
सार
- जम्मू-कश्मीर के आयोग ने एलजी को सौंपी अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट में की सिफारिश।
- कोरोना की वजह से पिछले साल 30 जून तक नहीं सौंपी जा सकी थी रिपोर्ट।
- उप राज्यपाल बोले, केंद्र शासित प्रदेश सभी वर्गों के समान विकास और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध।
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Government of Jammu and Kashmir
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जम्मू-कश्मीर सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग में कुछ और जातियां व जनजातियां शामिल की जाएंगी। जम्मू-कश्मीर सामाजिक व शैक्षिक पिछड़ा वर्ग आयोग ने शनिवार को अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट उप राज्यपाल को सौंपकर इस बाबत सिफारिश की है।
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राजभवन में उप राज्यपाल मनोज सिन्हा से मिलकर आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जीडी शर्मा ने अंतरिम रिपोर्ट सौंपी। उन्होंने इन वर्गों के कल्याण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उप राज्यपाल ने सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग के हितों की रक्षा के लिए लगातार आवश्यक सिफारिशें करने को कहा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्र शासित प्रदेश सरकार सभी वर्गों के समान विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
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सरकार ने पिछले साल मार्च में इस आयोग का गठन किया था। आयोग का कार्यकाल दो साल निर्धारित किया गया है। आयोग को पहली अंतरिम रिपोर्ट तीन महीने में या 30 जून से पहले देने को कहा गया था, लेकिन कोरोना की वजह से तय समय में काम पूरा नहीं हो पाया।
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आयोग को सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग में शामिल करने के लिए मानदंड तय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार की ओर से घोषित सामाजिक व पिछड़ा वर्ग की सूची का परीक्षण करना और इसमें वर्गों को शामिल करने या हटाने की सिफारिश करना शामिल है। सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए आरक्षण नियमों का परीक्षण व न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने का काम भी सौंपा गया है।
पिछड़ा वर्ग आयोग को कर दिया था भंग...
जम्मू-कश्मीर सामाजिक व शैक्षिक पिछड़ा वर्ग आयोग गठित होने के बाद सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग को खत्म कर दिया था। पिछले साल एक जून को आदेश जारी कर सरकार ने सभी कर्मचारियों को नवगठित आयोग के जिम्मे कर दिया। सभी रिकॉर्ड, इलेक्ट्रानिक गैजेट, उपकरण, वाहन सब कुछ आयोग के हवाले कर दिया गया।