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J&K News: कठुआ में 3.8 करोड़ की लागत से बन रही पहली हाई-टेक हैचरी, प्रतिमाह 30 से 40 हजार चूजे होंगे तैयार

Tue, 15 Oct 2024 12:52 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Tue, 15 Oct 2024 12:52 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में बैकयार्ड पोल्ट्री को बढ़ावा देने के लिए संभाग की सबसे नवीनतम तकनीक वाली हैचरी को तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना की लागत 3.8 करोड़ रुपये होगी।
 

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J&K News: The first hi-tech hatchery is being built in Kathua at a cost of Rs 3.8 crore, 30 to 40 thousand chi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई

विस्तार

बैकयार्ड पोल्ट्री को बढ़ावा देने के लिए कठुआ में संभाग की सबसे नवीनतम तकनीक वाली हैचरी को तैयार किया जा रहा है। 3.8 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना में प्रति माह 30 से 40 हजार चूजे तैयार होंगे। एक टन प्रतिघंटा फीड तैयार करने के लिए मशीन भी स्थापित की जा रही है।

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वर्तमान में यहां चार से पांच सौ चूजे ही बैकयार्ड पोल्ट्री के लिए प्रतिमाह तैयार होते हैं वहीं यह योजना इसे कई गुणा बढ़ाकर किसानों और युवाओं को बैकयार्ड पोल्ट्री की ओर भी आकर्षित करेगी। खास बात यह है कि इस परियोजना के तहत एक टन प्रतिघंटा फीड तैयार करने के लिए वाली मशीन जम्मू संभाग तक किसी भी सरकारी हैचरी की जरूरत को पूरा कर सकेगी।
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अधिकारियों की मानें तो समग्र कृषि विकास कार्यक्रम (एचएडीपी) के तहत इस योजना में खासतौर से कठुआ और सांबा जिले में स्थानीय जरूरतों के अनुसार बैकयार्ड पोल्ट्री को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है। जहां तीन नए पोल्ट्री शेड तैयार किए जा रहे हैं, वहीं पुरानी हैचरी को भी अपग्रेड किया जाएगा। ताकि 30 से 40 हजार चूजों को कठुआ में तैयार किया जा सके। यह चूजे लो-तकनीक प्रणाली से तैयार होंगे जो जिले में अंडों के साथ-साथ मांस के उत्पादन में भी वृद्धि करेंगे। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

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J&K News: The first hi-tech hatchery is being built in Kathua at a cost of Rs 3.8 crore, 30 to 40 thousand chi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई

कठुआ में बनने वाले हैचरी यूनिट का पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों के लिए ट्रेनिंग यूनिट के रूप में उपयोग किया जाएगा। वर्तमान में लोक निर्माण विभाग की ओर से पशुपालन विभाग के कार्यालय परिसर में इन हैचरी का काम तेजी से अंजाम दिया जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो मार्च 2025 तक यह हैचरी और फीड मिल पूरी तरह से तैयार हो जाएंगे।

सालाना 1273 करोड़ का पोल्ट्री उत्पाद, 30 हजार मीट्रिक टन मीट का आयात जम्मू-कश्मीर में सितंबर, 2024 में 29 लाख 26 हजार से ज्यादा मुर्गे-मुर्गियां का आयात हुआ। हर महीने 30 लाख से ज्यादा अंडे जबकि सितंबर महीने में ही 1 लाख 59 हजार 42 भेड़-बकरियां भी मीट के लिए आयात की गईं। वर्ष 2023 में 1273 करोड़ के पोल्ट्री उत्पाद आयात किए गए। लगभग 70 हजार मीट्रिक टन मीट की खपत करने वाले प्रदेश में आधा हिस्सा यानी 30 हजार मीट्रिक टन प्रदेश के बाहर से आता है।

संभाग की सबसे नवीनतम तकनीक की यह बैकयार्ड हैचरी और फीड मिल क्षेत्र के युवाओं को पोल्ट्री की ओर आकर्षित करेगी। जिले में इससे तैयार होने वाले चूजों की संख्या में भी इजाफा होगा और स्वरोजगार के साधन युवाओं को हासिल होंगे। यह परियोजना 3.8 करोड़ की लागत से एचएडीपी के तहत तैयार की जा रही है।

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