J&K Destination Wedding: जम्मू-कश्मीर में शादियों का शाही अंदाज, वेडिंग इंडस्ट्री भी हो रही मालामाल
जम्मू-कश्मीर में डेस्टिनेशन वेडिंग का चलन बढ़ने से वेडिंग इंडस्ट्री में 75 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के पैकेजों का कारोबार हो रहा है, जिससे स्थानीय व्यापारियों को भी फायदा हो रहा है।
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समय के साथ जम्मू-कश्मीर के लोगों की लाइफ स्टाइल में बड़ा बदलाव देखने में आ रहा है। लोग जितना कमा रहे हैं, उसमें से बहुत ज्यादा बचाने के बजाय अब लोग खुलकर खर्च करना सीख गए हैं। खासकर कोविड के बाद, खाने-पहनने-घूमने और छोटी-छोटी खुशियों को बड़े समारोह के रूप में मनाने की आदतों को लोगों ने अपनाया है। इसका एक उदाहरण हैं यहां होने वाले शादी-समारोह।
इसी का नतीजा है कि यहां तमाम तरह के उद्योगों के बीच वेडिंग इंडस्ट्री ने भी अपनी पहचान बना ली है। लोगों की जरूरत और जेब के हिसाब से छोटे से बड़े पैकेज लेकर वेडिंग प्लानर तैयार बैठे हैं। शादी कारोबारियों का कहना है कि प्रदेश में 75 लाख से एक करोड़ रुपये के पैकेज वाली शादियां बढ़ रही हैं।
कारोबारी कहते हैं कि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से विदेश जाने के बजाय जम्मू-कश्मीर आकर डेस्टिनेशन वेडिंग करने की अपील देशवासियों से की है, तब से अब तक डेस्टिनेसन वेडिंग की भी धूम मची हुई है। वेडिंग इंडस्ट्री के ट्रेंड पर उद्यमी रुचिका गुप्ता कहती हैं कि पर्यटन के लिहाज से जम्मू-कश्मीर का अपना महत्व है। हॉस्पिटेलिटी क्षेत्र में लोगों को रोजगार मिल रहा है, इसी वजह से शादी कारोबार में भी बूम आया हुआ है। शादियों में लोग देश के नंबर वन आरकेस्ट्रा, बड़े गायकों की लाइव परफारमेंस करवा रहे हैं। चार से पांच दिन के आयोजन हो रहे हैं।
100 करोड़ का है डेस्टिनेशन वेडिंग का कारोबारएक वेडिंग कंपनी के सीईओ डा. अमित वांचू के मुताबिक, प्रदेश में डेस्टिनेशन वेडिंग का कारोबार सीजन में 100 करोड़ से अधिक का है। इस 2023 के मुकाबले इसमें 15 प्रतिशत का इज़ाफा हुआ है। इनमें उच्च गुणवत्ता वाली शादियों की कुल संख्या लगभग 20 से अधिक रही, जबकि छोटे और मंझले आकार की शादियां 100 से अधिक थीं।
आमतौर पर इनमें मेहमानों की संख्या 200 से 1200 तक रहती है। इन शादियों में होटल, परिवहन, भोजन, कैटरिंग, डेकोरेशन आदि पर खर्चा होता है। कश्मीर में शिकारा बुकिंग और उपहार में केसर और मेवों पर भी खर्चा होता है। इससे स्थानीय व्यापारियों को सबसे ज्यादा फायदा होता है। वांचू के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में हर साल एक डेस्टिनेशन ऐसी हो जाती है, जिसमें 10 से 15 करोड़ का खर्चा हो जाता है। प्रदेश में वेडिंग के अलावा डेस्टिनेशन वेडिंग एनिवर्सरी का चलन भी बढ़ रहा है।
महाराजा और राजस्थानी थीम सबसे ज्यादा डिमांड
जम्मू के ही रहने वाले वेडिंग प्लानर यतिन शर्मा 4 साल से ज्यादा से इस कारोबार में शामिल हैं। यतिन ने बताया कि अब ज्यादातर लोग किसी एक थीम पर ही अपनी शादी की डेकोरेशन चाहते हैं। आजकल जो थीम चलन में हैं, वो 50 लाख से शुरू हो जाती है। महाराजा थीम और राजस्थानी थीम सबसे ज्यादा डिमांड में हैं। इसके अलावा मोरक्कन और विंटेज थीम सदाबहार है। जम्मू के लिहाज से बात करें तो डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए हरी निवास लोगों की सबसे पहली पसंद है। यतिन के मुताबिक जम्मू में एक सीजन में 50 से 100 करोड़ से ज्यादा का कारोबार हो जाता है। जिस तरह से थीम वेडिंग के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ रहा है, कारोबार में और इजाफा होने की उम्मीद है।
परोसा जा रहा कश्मीर का वाजवान और बनारस का पान
हाल में ही मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की भव्य शादी हुई थी, जिसकी चर्चा देशभर में हुई थी। अनंत की शादी में देशभर के व्यंजन परोसे गए थे। इसके लिए देश-विदेश से खास बावर्ची भी बुलाए गए थे। यही ट्रेंड जम्मू में भी खूब चल रहा है। शादियों में लोग खाने की स्टाॅल पर जमकर खर्च कर रहे हैं। वाजवान की स्टाॅल के लिए कश्मीर से ख़ास लोगों को बुला रहे हैं। इसी तरह फल की स्टाल के लिए हरियाणा के पानीपत से खास फल वाले बुलाए जा रहे हैं। बनारस का पान दुनियाभर में मशहूर है, लिहाजा पान की स्टाॅल बनारस से बुलाई जा रही है। कई व्यंजन ऐसे हैं, जिनकी स्टाल लगवाने में पांच से सात लाख का खर्चा आता है।
ब्लेस्ड वेडिंग डेस्टिनेशन घोषित हो जम्मू
जम्मू होटल रेस्टोरेंट बार एसोसिएशन के प्रधान राजू चौधरी ने बताया कि जम्मू में काफी बड़े-बड़े होटल्स हैं, जिनमें हर साल बड़े स्तर की करीब 100 से ज्यादा शादियां हो जाती हैं। जम्मू मंदिरों का शहर है। वैष्णो देवी मंदिर भी यहां से बड़ा करीब हैं। मौसम भी यहां साल के 12 महीने ठीक ही रहता है। इसलिए हम सरकार से मांग कर रहे हैं कि ब्लेस्ड वेडिंग डेस्टिनेशन (धार्मिक स्थान पर होने वाली शादी) घोषित किया जाए। इससे यहां और ज्यादा डेस्टिनेशन वेडिंग होंगी। उपराज्यपाल को भी हम लोग इस बारे में ज्ञापन सौंप चुके हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तक भी हम अपनी मांग पहुंचा चुके हैं।