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जम्मू-कश्मीर को बचाना है तो राज्यपाल शासन जरूरी : फारूक अब्दुल्ला

Sun, 28 May 2017 08:58 PM IST
amarujala.com- Presented by: आशुतोष तिवारी
amarujala.com- Presented by: आशुतोष तिवारी Updated Sun, 28 May 2017 08:58 PM IST
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It is necessary to governor rule in Jammu: farooq
‌रियासत के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला - फोटो : FILE PHOTO
पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद डा. फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि कश्मीर में लगातार खराब होते जा रहे हालात में सुधार लाने के लिए तत्काल राज्यपाल शासन को लागू करने की जरूरत है। फारूक ने कहा कि राज्यपाल शासन का नेशनल कांफ्रेंस ने विरोध किया था और इसे बढ़ावा देने का भी कोई इरादा नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात में राज्यपाल शासन के अलावा और कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाल ही में उन्होंने नई दिल्ली में मुलाकात की और पाया कि प्रधानमंत्री कश्मीर में जारी स्थिति का शांतिपूर्ण अंत चाहते हैं। फारूक का कहना है कि महबूबा मुफ्ती सरकार हर क्षेत्र में नाकाम रही है। केवल दक्षिण कश्मीर ही नहीं, पूरे कश्मीर में समस्या पैदा हो गई है। इस तरह के हालात से देश के अन्य हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने का भी खतरा है। ऐसे में जितनी जल्दी इस समस्या पर नियंत्रण पाया जाए उतना ही ठीक रहेगा। 
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उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में पिछले कई महीनों से बनी खराब कानून व्यवस्था की स्थिति से कश्मीर घाटी अराजकता की तरफ बढ़ रही है। उन्होंने भाजपा नेताओं से कहा कि वह कश्मीर को लेकर कड़े बयान देने से परहेज करें। जब प्रधानमंत्री शांति चाहते हैं तो अन्य को यह समझना चाहिए। कहा कि मुख्यमंत्री को उसी दिन त्यागपत्र दे देना चाहिए था जब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को लिखकर दिया कि वह अलगाववादियों से बातचीत नहीं करेगी। महबूबा मुफ्ती लगातार सभी हितधारकों से बातचीत करने पर जोर दे रही थी। 
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It is necessary to governor rule in Jammu: farooq
फाइल फोटो - फोटो : pti
उन्होंने कहा कि पीडीपी भाजपा के एजेंडे में सभी हितधारकों से बातचीत करना शामिल है। अगर एजेंडे पर काम नहीं हो रहा तो फिर महबूबा मुफ्ती कुर्सी पर बैठ कर क्या कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने तब इस्तीफा दे दिया था जब वीपी सिंह सरकार ने 1990 में जगमोहन को जम्मू कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त किया था।

उन्होंने कहा कि कश्मीर में हालात क्यों नहीं सुधर रहे। 1990 के दशक में आतंकवाद मौजूदा समय से भी अलग था। मौजूदा समय में हालात इसलिए खराब हुए कि मुफ्ती मोहम्मद सईद ने लोगों से झूठे वादे किए थे। उन्होंने चुनाव के समय कहा था कि भाजपा और आरएसएस को जम्मू कश्मीर की सत्ता से दूर रखने के लिए पीडीपी को वोट दो, लेकिन आखिर में लोगों के विश्वास को तोड़ते हुए भाजपा और आरएसएस से हाथ मिलाया। रियासत में आरएसएस का राज्य सरकार में शामिल होना कश्मीर में खराब हालात की मुख्य वजह है। ऐसे हालात में राज्यपाल शासन लगाकर ही स्थिति को नियंत्रण में किया जा सकता है। 

राज्यपाल शासन के दौरान विधानसभा को निलंबन में रखा जाए और जब हालात सुधर जाएं तो फिर विधानसभा को बहाल किया जाए। उन्होंने कहा कि दो महीने रहे राज्यपाल शासन के दौरान कश्मीरियों ने अच्छा शासन देखा। उन्होंने कहा कि जब भी वह सत्ता से बाहर होते हैं तो उनके बयानों को अलगाववादियों के समर्थक की तरह देखा जाता है। कहा वह सत्ता के भूखे नहीं हैं। अगर उन्हें सत्ता का लालच होता तो जब भाजपा ने गठबंधन के लिए हाथ बढ़ाया था तो वह उसे थाम लेते। हालांकि, उन्होंने कहा है कि अलगाववादियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 
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