{"_id":"688bcffb32ff5e9bd1062724","slug":"if-the-attackers-of-pahalgam-were-foreigners-then-why-did-the-houses-of-kashmiris-collapse-srinagar-news-c-264-1-sr11002-104850-2025-08-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: पहलगाम के हमलावर विदेशी थे तो कश्मीरियों के घर क्यों गिरे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: पहलगाम के हमलावर विदेशी थे तो कश्मीरियों के घर क्यों गिरे
विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष मुजफ्फर शाह ने वीरवार को हाल ही में हुई हारवन मुठभेड़ के बाद की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि अगर मारे गए लोग वास्तव में पहलगाम हमले के असली अपराधी थे, जैसा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने दावा किया है, तो सरकार को उसके बाद नागरिकों के घरों को मनमाने ढंग से ध्वस्त करने का जवाब देना चाहिए।
शाह ने लगभग एक दर्जन आवासीय ढांचों को ध्वस्त करने के पीछे के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा, अगर अब यह साफ हो गया है कि इसमें शामिल आतंकवादी विदेशी नागरिक थे और उपराज्यपाल ने पहले ही सुरक्षा चूक की ज़िम्मेदारी ले ली है तो निर्दोष नागरिकों को उस घटना का खामियाजा क्यों भुगतना पड़ा जिससे उनका कोई संबंध नहीं था।
उन्होंने इन ध्वस्तीकरणों को समय से पहले और अनुचित करार दिया और कहा कि जनता के गुस्से को कम करने और त्वरित कार्रवाई का दिखावा करने के लिए ये जल्दबाजी में किए गए। शाह ने कहा, जो बात तेज़ी से स्पष्ट होती जा रही है, वह यह है कि घरों को गिराना न्याय का कार्य नहीं था बल्कि जन भावनाओं को नियंत्रित करने के उद्देश्य से एक राजनीति से प्रेरित कदम था। सरकार को गरीब और हाशिए पर पड़े परिवारों से माफी मांगनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
शाह ने लगभग एक दर्जन आवासीय ढांचों को ध्वस्त करने के पीछे के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा, अगर अब यह साफ हो गया है कि इसमें शामिल आतंकवादी विदेशी नागरिक थे और उपराज्यपाल ने पहले ही सुरक्षा चूक की ज़िम्मेदारी ले ली है तो निर्दोष नागरिकों को उस घटना का खामियाजा क्यों भुगतना पड़ा जिससे उनका कोई संबंध नहीं था।
विज्ञापन
उन्होंने इन ध्वस्तीकरणों को समय से पहले और अनुचित करार दिया और कहा कि जनता के गुस्से को कम करने और त्वरित कार्रवाई का दिखावा करने के लिए ये जल्दबाजी में किए गए। शाह ने कहा, जो बात तेज़ी से स्पष्ट होती जा रही है, वह यह है कि घरों को गिराना न्याय का कार्य नहीं था बल्कि जन भावनाओं को नियंत्रित करने के उद्देश्य से एक राजनीति से प्रेरित कदम था। सरकार को गरीब और हाशिए पर पड़े परिवारों से माफी मांगनी चाहिए।
विज्ञापन