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भूकंप आया तो जम्मू में यहां मचेगी भीषण तबाही

Mon, 27 Apr 2015 10:02 AM IST
Updated Mon, 27 Apr 2015 10:02 AM IST
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if earthquake hits Jammu, these areas are vulnerable

भूकंप का एक जोरदार झटका पुराने शहर को तहस-नहस कर सकता है। यहां राहत कार्य चलाने में भी कोई मदद नहीं की जा सकेगी। इसके एक नहीं, कई कारण हैं। पुरानी इमारतें, मात्र एक-डेढ़ फुट चौड़ी तंग गलियां और पुरानी इमारतें भूकंप की मार नहीं सह पाएंगी।

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यही नहीं, शहर के अन्य हिस्से भी हैं, जहां वर्षों पुरानी इमारतें बनी हुई हैं, जिनको असुरक्षित घोषित किया जा चुका है, लेकिन इनमें अब भी लोग रह रहे हैं। इसकी चपेट में ऐतिहासिक मुबारक मंडी भी आ सकती है, जिसकी हालत जरजर हो चुकी है। कुछ पलों में ही इसका अस्तित्व मिट जाएगा।
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जानकारी के अनुसार पुराने शहर में कई इमारतें ऐसी हैं, जो वर्षों पुरानी हैं। जिनकी मरम्मत नहीं की गई। इनमें से कई इमारतों को असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। वेयर हाउस में भी पुरानी इमारतें हैं, जो भूकंप के एक झटके में तहस-नहस हो सकती हैं।

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वर्ष 2005 में भी पहुंचा था नुकसान

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आठ अक्तूबर 2005 को आए भूकंप से भी पुराने शहर की इमारतों को काफी नुकसान पहुंचा था। कई इमारतों में दरारें पड़ गई थीं। इसके बाद प्रशासन ने पुराने शहर में कई इमारतों को खाली करने के लिए कहा, लेकिन समय निकलता गया और हुआ कुछ नहीं। करीब दस साल बीत जाने के बाद अब इमारतों की हालत और अधिक खस्ता हो चुकी है।

तंग गलियां बन सकती हैं परेशानी का सबब
पुराने शहर में अधिकतर क्षेत्र तंग गलियों के हैं। यहां पर मोटरसाइकिल ही मुश्किल से पहुंच पाती है। यदि कभी भूकंप से कुछ होता भी है, तो राहत कार्य में दिक्कत पेश आएगी। यहां प्रशासन भी कुछ नहीं कर पाएगा। प्रशासन की ओर से ऐसी आपदा से निपटने को कोई ठोस नीति भी नहीं है।

अब तक दो के मरने की पुष्टि

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जम्मू संभाग में नेपाल में संभाग के दो लोगों के मारे जाने की पुष्टि कर दी गई है। मंडलायुक्त डा. पवन कोतवाल ने बताया कि अभी तक दो लोगों के मरने की जानकारी पहुंची है। कश्मीर घाटी से करीब चार हजार लोगों के नेपाल में होने की संभावना है। इनमें से अधिकतर से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा।

घरों को रवाना हुए लोग
जम्मू-कश्मीर में रहने वाले नेपाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और अन्य भूकंप प्रभावित राज्यों के लोग अब भी अपने परिवार को लेकर चिंतित हैं। रविवार को जम्मू में रहने वाले उत्तर भारत के कई लोग ट्रेनों से अपने राज्यों की तरफ निकले। नेपाल के लोग भी अपने देश के लिए निकले। हर किसी के चेहरे पर अपनों की चिंता साफ झलक रही थी।

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