Hyderpora Encounter: सुप्रीम कोर्ट ने आमिर माग्रे का शव दिलाने से किया इन्कार, पिता की याचिका खारिज
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने मुठभेड़ में मारे गए आमिर के परिवार को उस स्थान पर धार्मिक संस्कार करने की अनुमति दी थी। जहां जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसे दफनाया था। हाईकोर्ट के शव सौंपने से इन्कार करने के आदेश को पिता ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने श्रीनगर के हैदरपोरा में पिछले साल हुई मुठभेड़ में मारे गए चार लोगों में से एक आमिर माग्रे के पिता की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने दफनाए गए शव को सौंपने की गुहार लगाई गई थी।न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने सोमवार को कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि मृतक को सही तरीके से नहीं दफनाया गया था और ऐसे मामलों का फैसला केवल भावनाओं के आधार पर नहीं किया जा सकता था।
पीठ ने आदेश में कहा है, मृतक के शरीर के लिए भी गरिमा का अधिकार उपलब्ध है। हम अपीलकर्ता की भावनाओं को समझ सकते हैं। अदालत ऐसे मामलों को भावनाओं को ध्यान में रखते हुए नहीं बल्कि केवल कानून के शासन को ध्यान में रखते हुए तय कर सकती है।
पीठ ने कहा कि किसी शव को दफनाने के बाद उसे कानून की हिरासत में माना जाता है और उसमे बदलाव अदालत की संतुष्टि के अधीन है। पीठ ने कहा, कब्र की पवित्रता को बनाए रखा जाना चाहिए। न्यायालय तब तक आदेश नहीं देगा, जब तक कि यह न्याय के हित में न हो।
पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट की ओर से मृतक के अंतिम संस्कार को धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार करने से इन्कार करने का आदेश न्यायोचित एवं उचित है। यह कहते हुए पीठ ने हाईकोर्ट के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने आमिर के परिवार को उस स्थान पर धार्मिक संस्कार करने की अनुमति दी थी, जहां जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अमीर माग्रे को दफनाया था, लेकिन परिवार को शव सौंपने से इन्कार कर दिया था। हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को माग्रे परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया था। हाईकोर्ट द्वारा शव सौंपने से इनकार करने के आदेश को पिता ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
मुआवजे संबंधी हाईकोर्ट के निर्देश का पालन किया जाए
पीठ ने हालांकि जम्मू-कश्मीर प्रशासन को निर्देश दिया कि वह परिवार को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने के हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करे और साथ ही उन्हें उस कब्र स्थल पर प्रार्थना करने की अनुमति दे जहां उसके बेटे के शव को दफनाया गया था।
केंद्र को शवोत्खनन पर कानून बनाने पर विचार करना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह शवों को कब्र से निकालने (शवोत्खनन) के संबंध में एक कानून लाने पर विचार करे क्योंकि देश में मृतक के परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए अनुरोध से निपटने के लिए ऐसा कोई कानून नहीं है।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि शवों को कब्र से निकालने के लिए वैध अधिकार दंड प्रक्रिया संहिता की धारा- 176(3) में निहित है और पोस्टमॉर्टम के उद्देश्य से अपराध का पता लगाने और हत्या, मौत का विवादित कारण, जहर देने आदि का संदेह होने की स्थिति में इस गतिविधि की अनुमति है।
अपने फैसले में शीर्ष अदालत ने यह भी बताया कि भारत में सीआरपीसी की धारा- 176 (3) को छोड़कर, शवों को निकालने से संबंधित कोई कानून नहीं है। बहुत कम देशों में इस संबंध में कानून है। ऐसा ही एक कानून आयरलैंड में उपलब्ध है।
पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार अंतिम संस्कार पर एक उपयुक्त कानून बनाने पर विचार कर सकती है, ताकि मौजूदा मामले जैसी स्थितियों से निपटा जा सके।