कश्मीर में अस्पताल भी बाढ़ की चपेट में, डीजल का संकट
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रविवार को मौसम साफ होने के बाद जम्मू संभाग में हालात कुछ सुधरे पर कश्मीर में और बद्तर हो गए। झेलम का तटबंध टूट जाने से नदी का पानी शहर में घुस आया और इमारतों की पहली मंजिलें जलमग्न हो गईं। यहां तक कि अस्पताल भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। शहर के प्रमुख इलाकों लाल चौक और राजबाग में सड़कों पर सात से आठ फुट पानी भर आया है।
कई इलाकों में दूसरी मंजिल तक पानी पहुंच जाने से लोग परेशान रहे। बिजली का ढांचा ध्वस्त होने से पावर सप्लाई ठप रही। दूर संचार सेवाएं पूरी तरह से ठप पड़ी हुईं हैं। सड़क संपर्क बदहाल है। लोगों का आपस में पूरी तरह से संपर्क कटा हुआ है। झेलम का जलस्तर अभी भी बढ़ रहा है। श्रीनगर के जीबी पंत अस्पताल में 10-12 फुट पानी घुस आने से 400 लोग फंस गए थे।
हालांकि, सेना और एनडीआरएफ की टीमों द्वारा सभी मरीजों और तीमारदारों को बाद में सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया था।
बादामी बाग स्थित सैन्य क्षेत्र में भी बाढ़ का पानी घुस गया।
बिजली कटौती ने दिक्कतें बढ़ाईं, जनरेटर भी हांफने लगे
सोनावार, राजबाग, नवगाम, कुरसू जैसे क्षेत्रों में पानी पूरी तरह भरा हुआ है। कई स्थानों पर बीएसएनएल का ढांचा बाढ़ में ढह गया। ग्रीष्मकालीन राजधानी का लाल चौक, सचिवालय, मैयसूमा, मौलाना आजाद रोड इलाके में 7-8 फुट पानी जमा रहा। लाल चौक में पानी दुकानों में समा गया।
प्रतिष्ठित डल लेक में कई स्थानों पर हाउस बोट को भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के मद्देनजर लोगों को हाउस बोट छोड़ सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है।
बिजली कटौती ने दिक्कतें बढ़ाईं
बारिश और बाढ़ से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए बिजली ढांचे की मार अस्पतालों पर भी पड़ी है। कई घंटों की कटौती के चलते एसोसिएटेड अस्पतालों का वैकअप सिस्टम जवाब देने लगा है। नियमित सप्लाई कर रहे जनरेटर भी हांफ रहे हैं। अस्पतालों में डीजल की कमी बढ़ने से बिजली संकट बढ़ गया है।
डीजल के लिए पर्याप्त फंड न होने के कारण नियमित सप्लाई करना मुश्किल हो रहा है। जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार नियमित बिजली कटौती की समस्या से डीजल की कमी बनी है। लेकिन महत्वपूर्ण यूनिटों में सप्लाई नियमित बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
जीएमसी में एक ट्रक डीजल की खपत
उल्लेखनीय है कि गत दिवस जीएमसी की इमरजेंसी में करीब दो घंटे बिजली गुल रही। हालत यह थी कि जनरेटरों में डीजल न होने से इमरजेंसी के नए ब्लाक के आईसीयू यूनिट में वेंटिलेटर भी जवाब दे गए। जिससे आनन फानन में कई मरीजों को वेंटिलेटर से हटाकर एंबोबैग पर डालना पड़ा था। बिजली कटौती के चलते जनरेटर भी लगातार चलने में सक्षम नहीं हैं।
सूत्रों के अनुसार जीएमसी में ही करीब 22 दिन में एक ट्रक डीजल की खपत हो जाती है। इसमें 12000 लीटर डीजल जनरेटरों में फूंका जा रहा है। लेकिन पीछे से लगातार कटौती बढ़ने से डीजल की खपत कई गुणा बढ़ गई है, जबकि लो डेनिस्टी आयल (एलडीओ) में फंड को बढ़ाया नहीं गया है।
एसोसिएटेड अस्पतालों में जनरेटरों को चलाने के लिए आड़े आ रही डीजल की भारी कमी बड़ी चुनौती बन गया है। डीजल की कमी के चलते अब महत्वपूर्ण यूनिटों में जनरेटरों से सप्लाई बहाल रखने को प्राथमिकता दी जा रही है। पिछले कई सालों से एलडीओ के फंड न बढ़ाए जाने से भी ऐसी मुश्किलें बढ़ गई हैं।