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उन लमहों को याद कर कांप उठती है रूह

Fri, 08 Aug 2014 01:58 AM IST
Updated Fri, 08 Aug 2014 01:58 AM IST
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horrifying story of balbir and pushpinder

दरिया की उफनती लहरों के बीच रहकर रात भर मौत को करीब से महसूस करने का अनुभव रूह कंपाने वाला था। सकुशल घर पहुंचने के बावजूद दहशत की सिहरन जाने का नाम नहीं ले रही है।

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रावी दरिया की बाढ़ में फंसकर पूरी रात दहशत का सामना करने वाले युवकों के जहन से खौफ निकलने का नाम नहीं ले रहा है।

दहशत की उन घड़ियों में लेकिन मसीहा बनकर आए गुज्जर समुदाय के व्यक्ति ने उन्हें न सिर्फ रात को हिम्मत दी बल्कि दरिया से बाहर निकालकर नया जीवन भी दिया।

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नहाने के लिए उथले पानी में उतरे

horrifying story of balbir and pushpinder

बलबीर सिंह और पुष्पिंदर ठाकुर ने अमर उजाला को बताया कि वह घर से क्रिकेट खेलने गए थे। दन्ना क्षेत्र में दरिया किनारे चार दोस्त थे जिनमें से दो नहाने के लिए दरिया के उथले पानी में उतर गए।

बलबीर का पांव फिसला जिसे तैरना नहीं आता था। उसे बचाने के लिए पुष्पिंदर ने उसे बचाने की कोशिशें शुरू कर दी। दरिया का पानी लेकिन अचानक बढ़ जाने से दोनों पानी के बहाव से भीतर की तरफ बह गए।

मंगलवार शाम पांच बजे की इस घटना के बाद बलबीर और पुष्पिंदर के लिए अगले चौदह घंटे दहशत में बीते। युवकों ने बताया कि उन्होंने पहले अपने घर में फोन कर टायर ट्यूब मंगवाई लेकिन बात नहीं बन पाई।

दीन ने कायम की दिलेरी की मिसाल

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स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि, ग्रामीण और पुलिस भी मौके पर पहुंच गए। देर रात करीब 10 बजे सेना भी नौकाओं के साथ आ गई लेकिन उफनती लहरों और अंधेरे की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन के तमाम तामझाम धरे के धरे रह गए।

इस सब से इतर स्थानीय निवासी हसन दीन ने इंसानियत और दिलेरी की मिसाल कायम करते हुए दरिया में फंसे युवकों को पहले खाना-कपडे़ पहुंचाए और अगली सुबह दरिया में जाकर दोनों युवकों बाहर निकालने में कामयाबी हासिल की।

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ख्वाजा पीर को याद किया

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हसन दीन ने अमर उजाला को बताया कि वह भैंस चराने के लिए अमूमन दरिया में जाता है। पानी का बहाव तो तेज था लेकिन उसने गांव में स्थित ख्वाजा पीर को याद किया और जोखिम उठाकर ट्यूब के सहारे युवकों के पास चला गया।

हसन दीन ने बताया कि युवक बेहद सहमे हुए थे। कपड़े और खाना मिलने के बाद उनकी जान में जान आई। वह रात को एक घंटा बिताकर बाहर आ गया।

दूसरी सुबह पुलिस द्वारा मुहैया करवाई गई लाइफ जैकेट और रस्से की मदद से वह युवकों को बाहर लाने में कामयाब रहा। युवकों ने बताया कि वह बचने की उम्मीद पूरी तरह से खो चुके थे। इसी दौरान आधी रात को हसन दीन मसीहा बनकर आए।

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