मसर्रत विवाद के बाद गृह सचिव को हटाया
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अलगाववादी मसर्रत आलम की रिहाई के बाद पैदा हुए विवाद में गृह सचिव सुरेश कुमार पर गाज गिरी है। उन्हें तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। गृह सचिव के तबादले को उनकी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के प्रस्ताव से जोड़ने की कोशिश हो रही है लेकिन केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अभी तय नहीं है।
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योजना एवं विकास विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी ब्रज राज शर्मा को गृह विभाग के प्रमुख सचिव का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। मुफ्ती सरकार के पहले बड़े प्रशासनिक फेरबदल में मुसर्रत की रिहाई से हुई किरकिरी से बचने का प्रयास साफ दिखता है।
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सिविल प्रशासन के चार दर्जन और पुलिस प्रशासन के चौदह बड़े अफसरों को एक झटके में बदलकर मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने एक तीर से दो निशाने साधे।
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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की टीम को हाशिये पर डाल अपनी टीम बनाने की कोशिश की और शासन को ताजा लुक देकर चुस्त एवं पारदर्शी शासन के संकल्प का संकेत भी दिया। कैबिनेट की बैठक में इस बड़े बदलाव को मंजूरी देने से पहले भारी-भरकम होमवर्क पूरा कर लिया गया था।
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ताबदले पर सवाल को टाल गए नईम
आम तौर पर कैबिनेट में जब प्रशासनिक फेरबदल को मंजूरी दी जाती है तो इसकी सूची जारी हो जाती है। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने यह जानकारी देने के लिए शिक्षा मंत्री नईम अख्तर को कैबिनेट का प्रवक्ता बनाकर प्रेस कांफ्रेंस के जरिए प्रशासनिक उलटफेर का ऐलान किया।
बकौल अख्तर इन तबादलों से पहले उच्चस्तर पर मैराथन विचार विमर्श हुआ। एजेंसियों से अफसरों के बारे में मिले इनपुट को भी तबादलों का आधार बनाया गया है। प्रतिभाओं के सर्वश्रेष्ठ उपयोग की कोशिश हुई है। कैबिनेट प्रवक्ता ने गृह सचिव के तबादले के मुद्दे पर गोलमोल उत्तर दिया।
बकौल शिक्षा मंत्री गृह सचिव सुरेश कुमार की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का प्रस्ताव केंद्र के पास तीन माह से विचाराधीन है। इसलिए उनका तबादला किया गया। काबिले गौर है कि सुरेश कुमार को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति नहीं मिली है। लिहाजा उन्हें गृह सचिव पद से हटाकर वर्तमान में इंस्टीच्यूट आफ मैनेजमेंट, पब्लिक एडमिनस्ट्रेशन और रुरल डेवलपमेंट का निदेशक बनाया गया है।
बाढ़ के दौरान भी सुरेश भी निशाने पर
चूंकि गृह सचिव का तबादला प्रदेश में ही हुआ है इसलिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के प्रस्ताव का तर्क किसी के गले नहीं उतर रहा। सनद रहे कि मुफ्ती सरकार की रिपोर्ट के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा को बताया था कि अलगाववादी मसर्रत की रिहाई की प्रक्रिया उमर अब्दुल्ला के शासनकाल में शुरू हुई थी।
तब गृह सचिव के पद पर सुरेश कुमार ही थे। लिहाजा उनपर गाज गिरनी तय मानी जा रही थी। बाढ़ के दौरान रियासत सरकार पर त्वरित गति से काम नहीं करने के आरोप लगे थे। लिहाजा इस प्रशासनिक फेरबदल में राहत पुनर्वास से जुड़े अधिकारियों को भी बदल दिया गया है।
कार्य संस्कृति विकसित करने का संदेश भी इन तबादलों में छिपा है। यही कारण है कि वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के सीईओ मनदीप सिंह भंडारी को राहत और पुनर्वास का सचिव बनाया गया है।
भंडारी को इसके अलावा विश्व बैंक के नए प्रोजेक्टों के लिए मानिटरिंग यूनिट का सीईओ भी बनाया गया है। जम्मू और श्रीनगर के डिविजनल कमिश्नर और आईजी को बदलकर प्रशासन और पुलिस की शैली में बदलाव के भी संकेत दिए गए हैं।