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#हिंदीहैंहम: रंगमंच से जुड़े कलाकार बोले- नाटक लेखन को प्रोत्साहन से प्रदेश में बढ़ेगा भाषा का आधार

Mon, 24 Aug 2020 09:28 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 24 Aug 2020 09:28 AM IST
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Hindi Hain Hum, Amar ujala Hindi Hai Hum campaign, Theater artists said By encouraging drama writing language base will increase in jammu kashmir
‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत आगे आए रंगमंच से जुड़े कलाकार - फोटो : अमर उजाला

‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत रंगमंच से जुड़े कलाकार भी आगे आए हैं। उनका कहना है कि हिंदी देश को जोड़ने वाली भाषा है। इसके प्रोत्साहन के लिए सरकार को अलग से बजट रखना चाहिए। किसी भी अभियान को जनमानस तक पहुंचाने के लिए नाटक से बड़ा माध्यम कोई और नहीं है लेकिन प्रदेश में हिंदी नाटकों का लेखन बहुत कम हो रहा है। गतिविधियां अनुवाद पर निर्भर होकर रह गई हैं। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा नाटक हिंदी में लिखे जाने चाहिए। नाटकों के जरिये ही हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता लाई जा सकती है। भाषाओं के संरक्षण के लिए काम करने वाली सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं को भी हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए जोर देना चाहिए। हिंदी ही ऐसी भाषा है, जिसके जरिये कोई भी अपनी बात सरलता से रख सकता है।    

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हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। इसे गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी बढ़ावा और महत्व मिलना चाहिए। हिंदी भाषा का सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं के कामकाज में व्यापक इस्तेमाल किया जाना चाहिए। भाषाओं के संरक्षण के लिए काम करने वाली सरकारी संस्थाओं को भी हिंदी के संरक्षण को लेकर गंभीर होना होगा। सरकार को इसके लिए अलग से बजट रखना चाहिए। राष्ट्र भाषा होने के नाते नई शिक्षा नीति में हिंदी को अधिक बढ़ावा मिलना चाहिए।
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डॉ. अरविंद्र सिंह अमन, अतिरिक्त सचिव जम्मू-कश्मीर भाषा कला अकादमी

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हिंदी देश के लोगों को एक सूत्र में बांधने का काम करती है। क्षेत्रीय भाषाओं की तुलना में हिंदी का प्रचार-प्रसार करने की भी जरूरत है। बुनियादी शिक्षा में हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग करना सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रदेश में नाटक हिंदी में लिखे जाने चाहिए और इनका अधिक से अधिक मंचन होना चाहिए। हिंदी ऐसी भाषा है जिसके जरिये हम अपनी बात सरलता से रख सकते हैं। -जनक खजूरिया, वरिष्ठ रंगकर्मी


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प्रदेश में हिंदी में नाटकों का लेखन और निर्देशन ही नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि हिंदी भाषा में लिखे नाटकों पर मंचन नहीं हो रहा है। सांस्कृतिक अकादमी हिंदी नाटकों के आयोजन के लिए कार्यशाला का आयोजन करे। इसमें हिंदी नाटकों के प्रसिद्ध निर्देशकों को बुलाया जाए, ताकि युवा कलाकार इसे समझ सकें। प्रदेश में हम सिर्फ अनुवाद और रूपांतर पर निर्भर होकर रह गए हैं। हमारे पास हिंदी के नए नाटकों की कमी है। -विजय मल्ला, वरिष्ठ रंगकर्मी

नाटक देखने की विधा है, जो अन्य विधाओं से काफी प्रभावी और उपयोगी है। किसी भी अभियान को जनमानस तक पहुंचाने के लिए नाटक से बड़ा माध्यम कोई और नहीं है। हिंदी भाषा को लोगों तक पहुंचाने और कामकाज मेें इसका उपयोग बढ़ाने के लिए नाटकों के जरिये जागरूकता लाई जानी चाहिए। हमें हिंदी को अंग्रेजी भाषा की तरह वैश्विक भाषा के रूप में तैयार करना होगा। हिंदी भाषा को जनमानस तक पहुंचाने को भाषा के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्थाओं को पहले खुद ज्यादा से ज्यादा हिंदी में उपयोग का इस्तेमाल करना होगा। -अभिषेक भारती, युवा रंगकर्मी

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