जम्मू-कश्मीरः 10 सितंबर तक जारी हो जाएंगे लंबित डोमिसाइल प्रमाणपत्र, यहां स्मार्ट वाईफाई सुविधा शुरू
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ऑनलाइन डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने में लेटलतीफी का उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने संज्ञान लिया है। आधिकारियों को हिदायत दी है कि लंबित आवेदनों का 15 दिन में हर हाल में निस्तारण कर दिया जाए। इसके लिए उन्होंने 10 सितंबर की समय सीमा तय की है। साथ ही चेतावनी भी दी कि इसके बाद किसी प्रकार की बहानेबाजी नहीं चलेगी। गैर जिम्मेदार और कम प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
जम्मू में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में उन्होंने ऑनलाइन डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनाने के 90 फीसदी मामले लंबित होने का संज्ञान लिया। उन्होंने पीआरसी धारकों को बिना किसी प्रकार के दस्तावेज मांगे डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि डोमिसाइल सर्टिफिकेट के लिए काफी संख्या में लोगों ने आवेदन कर रखे हैं। लोगों का यह प्रयास सराहनीय है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि बिना किसी बाधा के वह सर्टिफिकेट जारी करे ताकि लोगों को अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े।
4-जी पर पाबंदी के बीच जम्मू के छह स्थानों पर स्मार्ट वाईफाई सुविधा शुरू
जम्मू स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 4-जी पर पाबंदी के बीच शहर के छह स्थानों पर स्मार्ट वाईफाई सुविधा शुरू की गई है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को इस सुविधा का ई-उद्घाटन किया। रघुनाथ बाजार, रेजीडेंसी रोड, मुबारक मंडी से परेड चौक, बाहु फोर्ट, अप्सरा रोड तथा गांधी नगर (ग्रीन बेल्ट पार्क) में यह सुविधा मिलेगी।
पीआरसी धारकों के लिए भी डोमिसाइल सर्टिफिकेट जरूरी
उधर, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर में पीआरसी (परमानेंट रेजीडेंट सर्टिफिकेट) धारकों को भी डोमिसाइल प्रमाणपत्र की जरूरत होगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वह लोगों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम में न आएं।
डॉ. जितेंद्र ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरियों व अन्य लाभ हासिल करने के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट जरूरी होगा। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में रविवार को मंत्री ने कहा कि कुछ लोग प्रदेश में यह भ्रम फैला रहे हैं कि जिनके पास पीआरसी है उन्हें डोमिसाइल प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने कहा पीआरसी धारकों का सरलता से डोमिसाइल सर्टिफिकेट बन रहा है और उन्हें केवल आवेदन के साथ पीआरसी ही लगाना है। अन्य कोई दस्तावेज लगाने की उन्हें जरूरत नहीं हैं। सिंह ने कहा कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों का जहां तक प्रश्न है तो उन्हें डोमिसाइल सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए पीआरसी या विस्थापित के रूप में पंजीकरण सर्टिफिकेट लगाना होगा। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से डोमिसाइल सर्टिफिकेट हासिल किया जा सकता है।