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हाई कोर्ट की फटकार: आतंकवाद से जुड़े मामले में पुलिस रिपोर्ट दाखिल न होने पर आईजी को जांच का आदेश
Wed, 29 Jan 2020 02:07 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 29 Jan 2020 02:07 AM IST
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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकवाद से जुड़े मामलों के संबंध में पुलिस रिपोर्ट दाखिल न किए जाने पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने जम्मू रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) को इस मामले में जांच करने तथा विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पुलिस रिपोर्ट तथा क्राइम डायरी को अगली सुनवाई पर कोर्ट में पेश करने को कहा है।
एडिशनल सेशन जज सुभाष सी गुप्ता, रियाज अहमद (निवासी सरकूट-किश्तवाड़) व देवी दास (निवासी लोअर जनकपुर दच्छन) की जमानत अर्जी खारिज करते हुए पाया कि एडिशनल पब्लिक प्रोसीक्यूटर (एपीपी) पुलिस रिपोर्ट दाखिल कर पाने में सक्षम नहीं हैं।
एपीपी ने बताया कि उन्होंने कई मैसेज तथा फोन कॉल कर संबंधित पुलिस को पुलिस रिपोर्ट सौंपने को कहा है। दोनों आरोपियों की ओर से 31 दिसंबर तथा आठ जनवरी को जमानत अर्जी दाखिल की गई। इसके बाद पुलिस रिपोर्ट के लिए पांच बार सुनवाई स्थगित की गई।
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यह समझ से परे है कि एक महीने से पुलिस रिपोर्ट क्यों नहीं सौंपी जा सकी है। एपीपी की ओर से मंगलवार को भी सुनवाई स्थगित करने का आग्रह किया गया। इस पर कोर्ट ने अंतिम मौका देते हुए हिदायत दी कि यदि अगली तिथि पर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किया जा सका तो समुचित आदेश पारित कर दिया जाएगा।
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एडिशनल सेशन जज सुभाष सी गुप्ता, रियाज अहमद (निवासी सरकूट-किश्तवाड़) व देवी दास (निवासी लोअर जनकपुर दच्छन) की जमानत अर्जी खारिज करते हुए पाया कि एडिशनल पब्लिक प्रोसीक्यूटर (एपीपी) पुलिस रिपोर्ट दाखिल कर पाने में सक्षम नहीं हैं।
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एपीपी ने बताया कि उन्होंने कई मैसेज तथा फोन कॉल कर संबंधित पुलिस को पुलिस रिपोर्ट सौंपने को कहा है। दोनों आरोपियों की ओर से 31 दिसंबर तथा आठ जनवरी को जमानत अर्जी दाखिल की गई। इसके बाद पुलिस रिपोर्ट के लिए पांच बार सुनवाई स्थगित की गई।
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यह समझ से परे है कि एक महीने से पुलिस रिपोर्ट क्यों नहीं सौंपी जा सकी है। एपीपी की ओर से मंगलवार को भी सुनवाई स्थगित करने का आग्रह किया गया। इस पर कोर्ट ने अंतिम मौका देते हुए हिदायत दी कि यदि अगली तिथि पर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किया जा सका तो समुचित आदेश पारित कर दिया जाएगा।