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कठुआ रेप कांड: आरोपी तिलक राज की बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट ने डीजीपी और सीएस किया जवाब तलब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sat, 21 Jul 2018 01:10 AM IST
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kathua
- फोटो : AMAR UJALA
जम्मू-कश्मीर के रसाना कांड के आठ आरोपियों में से एक तिलकराज को पुलिस की नौकरी से बर्खास्त करने पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस से जवाब मांगा है। दो सप्ताह के भीतर मुख्य सचिव और डीजीपी को कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना होगा।
आरोपी बर्खास्त हेड कांस्टेबल तिलक राज की तरफ से शुक्रवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जज एमके हंजूरा ने यह नोटिस दिया है। तिलक राज के वकील एके साहनी ने बताया कि हमने पुलिस के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पुलिस ने तिलक राज को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। चार सवालों को आधार बनाकर यह याचिका दायर की गई।
आरोपी को पुलिस की तरफ से कोई नोटिस नहीं दिया गया, किसी तरह की जांच नहीं हुई और यह आदेश पूरी तरह से भेदभाव वाला है। इस पर दोनों तरफ से हुई बहस के बाद जज ने मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस दिया है। अगली तारीख पर इसका जवाब आने के बाद बचाव पक्ष आगे की रणनीति तय करेगा।
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बर्खास्तगी नियमों का उल्लंघन: साहनी
वकील एके साहनी का कहना है कि उन्होंने आरटीआई के तहत आरोपी को बर्खास्त करने की एक प्रति प्राप्त की थी। बर्खास्त होने वाले अन्य आरोपी सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता ने भी आरटीआई के तहत बर्खास्तगी के आदेश की प्रति प्राप्त की थी। दोनों को बर्खास्त करना नियमों का सरेआम उल्लंघन है। नियम कहता है कि यदि किसी कर्मी को बर्खास्त करना है तो उसके खिलाफ पहले जांच होनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि रसाना कांड में शामिल होने का आरोप लगने पर दो एसपीओ दीपक खजूरिया, सुरेंद्र वर्मा, सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता को बर्खास्त किया गया। आरोप है कि इन लोगों ने जांच के जरूरी सबूत मिटा दिए। इससे पहले तिलक राज को यह याचिका दायर करने के लिए पठानकोट के सेशन एवं प्रिंसिपल जज ने मंजूरी दी थी।
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आरोपी बर्खास्त हेड कांस्टेबल तिलक राज की तरफ से शुक्रवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जज एमके हंजूरा ने यह नोटिस दिया है। तिलक राज के वकील एके साहनी ने बताया कि हमने पुलिस के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पुलिस ने तिलक राज को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। चार सवालों को आधार बनाकर यह याचिका दायर की गई।
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आरोपी को पुलिस की तरफ से कोई नोटिस नहीं दिया गया, किसी तरह की जांच नहीं हुई और यह आदेश पूरी तरह से भेदभाव वाला है। इस पर दोनों तरफ से हुई बहस के बाद जज ने मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस दिया है। अगली तारीख पर इसका जवाब आने के बाद बचाव पक्ष आगे की रणनीति तय करेगा।
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बर्खास्तगी नियमों का उल्लंघन: साहनी
वकील एके साहनी का कहना है कि उन्होंने आरटीआई के तहत आरोपी को बर्खास्त करने की एक प्रति प्राप्त की थी। बर्खास्त होने वाले अन्य आरोपी सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता ने भी आरटीआई के तहत बर्खास्तगी के आदेश की प्रति प्राप्त की थी। दोनों को बर्खास्त करना नियमों का सरेआम उल्लंघन है। नियम कहता है कि यदि किसी कर्मी को बर्खास्त करना है तो उसके खिलाफ पहले जांच होनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि रसाना कांड में शामिल होने का आरोप लगने पर दो एसपीओ दीपक खजूरिया, सुरेंद्र वर्मा, सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता को बर्खास्त किया गया। आरोप है कि इन लोगों ने जांच के जरूरी सबूत मिटा दिए। इससे पहले तिलक राज को यह याचिका दायर करने के लिए पठानकोट के सेशन एवं प्रिंसिपल जज ने मंजूरी दी थी।