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Jammu News: मसूढ़ों की सर्जरी में लेटेस्ट लेजर तकनीक बनी सहारा
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असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.अभिमा कुमार सोढ़ी। श्रोत स्वयं
- इंदिरा गांधी राजकीय डेंटल कॉलेज जम्मू की ओपीडी में 50 से 60 मरीजों को देख रहे डॉक्टर
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। दंत रोग के इलाज में लेजर तकनीक कारगर साबित हो रही है। इंदिरा गांधी राजकीय डेंटल कॉलेज जम्मू में पीरियोडोंटोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिमा कुमार सोढ़ी लेजर तकनीक से मसूढ़ों के इलाज व सर्जरी पर बेहतर काम कर रही हैं।
डाॅ. सोढ़ी का कहना है कि इस तकनीक से जहां चेहरे की सुंदरता बनी रहती है वहीं इलाज भी काफी सस्ता होता है। रोज 50 से 60 मरीजों को ओपीडी में देखा जा रहा है। ऑपरेशन भी किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि लेजर तकनीक डेंटल कॉलेज में करीब छह वर्ष पहले ही आ गई थी। वर्तमान में अत्याधुनिक लेजर तकनीक का प्रयोग मसूढ़ों की सर्जरी में किया जा रहा है। कॉलेज में पीजी छात्रों को इस तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कोशिश है कि दांतों के अंदर पनप रही बीमारियों को जड़ से खत्म किया जाए। डॉ. सोढ़ी ने बताया कि बीते दिनों कान्फ्रेंस में इस तकनीक पर कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने शोध प्रस्तुत किए हैं।
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अक्ल दाढ़ निकालने के दौरान
टिश्यू को काटने में कर रहे प्रयोग
लेजर तकनीक से सूजे और बढ़े हुए मसूढ़ों को काटकर अलग किया जा रहा है। अक्ल दाढ़ निकलते समय जो टिश्यू या ऊतक होते हैं उनको निकालने का काम भी इसी विधि से किया जा रहा है। कॉलेज में दो लेजर मशीनें हैं जिनके माध्यम से रोजाना 250 से अधिक मरीजों की जांच व इलाज की सुविधा दी जा रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। दंत रोग के इलाज में लेजर तकनीक कारगर साबित हो रही है। इंदिरा गांधी राजकीय डेंटल कॉलेज जम्मू में पीरियोडोंटोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिमा कुमार सोढ़ी लेजर तकनीक से मसूढ़ों के इलाज व सर्जरी पर बेहतर काम कर रही हैं।
डाॅ. सोढ़ी का कहना है कि इस तकनीक से जहां चेहरे की सुंदरता बनी रहती है वहीं इलाज भी काफी सस्ता होता है। रोज 50 से 60 मरीजों को ओपीडी में देखा जा रहा है। ऑपरेशन भी किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि लेजर तकनीक डेंटल कॉलेज में करीब छह वर्ष पहले ही आ गई थी। वर्तमान में अत्याधुनिक लेजर तकनीक का प्रयोग मसूढ़ों की सर्जरी में किया जा रहा है। कॉलेज में पीजी छात्रों को इस तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कोशिश है कि दांतों के अंदर पनप रही बीमारियों को जड़ से खत्म किया जाए। डॉ. सोढ़ी ने बताया कि बीते दिनों कान्फ्रेंस में इस तकनीक पर कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने शोध प्रस्तुत किए हैं।
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अक्ल दाढ़ निकालने के दौरान
टिश्यू को काटने में कर रहे प्रयोग
लेजर तकनीक से सूजे और बढ़े हुए मसूढ़ों को काटकर अलग किया जा रहा है। अक्ल दाढ़ निकलते समय जो टिश्यू या ऊतक होते हैं उनको निकालने का काम भी इसी विधि से किया जा रहा है। कॉलेज में दो लेजर मशीनें हैं जिनके माध्यम से रोजाना 250 से अधिक मरीजों की जांच व इलाज की सुविधा दी जा रही है।
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