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Jammu News: एम्स जम्मू ने कोमा थेरेपी से बचाई बच्ची की जान
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न्यूरोसर्जरी विभाग ने सर्जरी करने के बजाय कोमा थेरेपी का विकल्प चुना
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एम्स जम्मू के डॉक्टरों ने सिर में गंभीर चोट से पीड़ित आठ साल की बच्ची की जान कोमा थेरेपी से बचाई है। एम्स के न्यूरोसर्जरी विभाग ने बच्ची की सर्जरी करने के बजाय कोमा थेरेपी का विकल्प चुना। डाॅक्टरों के अनुसार बच्ची पहली मंजिल से गिर गई थी। उसे बेहोशी की हालत में एम्स पहुंचा गया। उसकी हालत नाजुक थी। न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। सर्जरी का खतरा ज्यादा होने के कारण डॉक्टरों ने एक अलग तरीका अपनाया। बच्ची के दिमाग में इंट्राक्रेनियल प्रेशर (आईसीपी) कैथेटर लगाया, जिससे दिमाग के अंदर दबाव की लगातार जांच होती रही। इसके बाद एनेस्थीसिया और बाल रोग विशेषज्ञों की टीम के साथ मिलकर बच्ची को पांच दिन तक कृत्रिम कोमा (दवाइयों से दिया गया कोमा) में रखा गया। डॉक्टरों ने दबाव को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखा। पांच दिन बाद जब स्थिति में सुधार हुआ तो बच्ची को धीरे-धीरे कोमा से बाहर निकाला गया। अब बच्ची बिल्कुल स्वस्थ है, बात कर रही है। डॉ. शौर्य दरबारी ने कहा कि एम्स जम्मू में सिर की चोट के लिए सबसे आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। एम्स जम्मू के निदेशक प्रो. (डॉ.) शक्ति कुमार गुप्ता ने कहा कि अब मरीजों को दूर जाने की जरूरत नहीं है। गोल्डन ऑवर में ही इलाज मिलने से ज्यादा जानें बचाई जा सकती हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एम्स जम्मू के डॉक्टरों ने सिर में गंभीर चोट से पीड़ित आठ साल की बच्ची की जान कोमा थेरेपी से बचाई है। एम्स के न्यूरोसर्जरी विभाग ने बच्ची की सर्जरी करने के बजाय कोमा थेरेपी का विकल्प चुना। डाॅक्टरों के अनुसार बच्ची पहली मंजिल से गिर गई थी। उसे बेहोशी की हालत में एम्स पहुंचा गया। उसकी हालत नाजुक थी। न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। सर्जरी का खतरा ज्यादा होने के कारण डॉक्टरों ने एक अलग तरीका अपनाया। बच्ची के दिमाग में इंट्राक्रेनियल प्रेशर (आईसीपी) कैथेटर लगाया, जिससे दिमाग के अंदर दबाव की लगातार जांच होती रही। इसके बाद एनेस्थीसिया और बाल रोग विशेषज्ञों की टीम के साथ मिलकर बच्ची को पांच दिन तक कृत्रिम कोमा (दवाइयों से दिया गया कोमा) में रखा गया। डॉक्टरों ने दबाव को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखा। पांच दिन बाद जब स्थिति में सुधार हुआ तो बच्ची को धीरे-धीरे कोमा से बाहर निकाला गया। अब बच्ची बिल्कुल स्वस्थ है, बात कर रही है। डॉ. शौर्य दरबारी ने कहा कि एम्स जम्मू में सिर की चोट के लिए सबसे आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। एम्स जम्मू के निदेशक प्रो. (डॉ.) शक्ति कुमार गुप्ता ने कहा कि अब मरीजों को दूर जाने की जरूरत नहीं है। गोल्डन ऑवर में ही इलाज मिलने से ज्यादा जानें बचाई जा सकती हैं।