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Jammu News: मां के दूध में यूरेनियम की मात्रा बेहद कम, महफूज हैं नौनिहाल
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बिहार के कुछ गांवों में अपने बच्चों को स्तनपान करा रही माताओं के दूध में यूरेनियम-238 जैसे खतरनाक रेडियोएक्टिव तत्व की मात्रा पाए जाने के बाद महिलाएं सशंकित हैं। डाॅक्टरों का कहना है कि यह मात्रा बेहद कम है। इससे शिशुओं को कोई खतरा नहीं है।
नियोनेटोलॉजिस्ट डॉक्टरों का कहना है कि यह मात्रा पेयजल के साथ हर जगह मौजूद होती है। पेयजल में आर्सेनिक की मात्रा के साथ यूरेनियम की मात्रा भी पाई जाती है इसको लेकर कई शोध भी हो चुके हैं। जम्मू एसएमजीएस अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ व नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. अनुमोदन गुप्ता ने इस गंभीर विषय पर विस्तार से जानकारी दी।
एसएमजीएस अस्पताल जम्मू के नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. अनुमोदन गुप्ता ने कहा कि शून्य से तीन माह तक के बच्चों की बीमारियों और उनके खानपान की देखरेख के लिए नियोनेटोलॉजिस्ट डॉक्टर ही सलाह देते हैं। तीन माह किसी बच्चे के जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं।
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मां के दूध में खतरनाक रेडियोएक्टिव तत्व यूरेनियम-238 की मात्रा मिलने की बात पर डॉक्टर ने कहा कि ऐसे इलाके जहां पर ईंट-भट्ठे और खदानें आदि स्थित हैं वहां पेयजल में आर्सेनिक की मात्रा के साथ यूरेनियम की मात्रा भी रहती है।
जम्मू-कश्मीर में बिहार से करीब दो लाख कामगार काम करते हैं। इनमें महिलाओं की संख्या अधिक है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार प्रति लीटर पानी में यूरेनियम की मात्रा 30 माइक्रोग्राम तक सुरक्षित है। स्तनपान कराने वाली माताओं में यूरेनियम की मात्रा शून्य से पांच माइक्रोग्राम प्रति लीटर पाई गई है जो कि किसी भी तरह हानिकारक नहीं कही जा सकती।
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जम्मू। बिहार के कुछ गांवों में अपने बच्चों को स्तनपान करा रही माताओं के दूध में यूरेनियम-238 जैसे खतरनाक रेडियोएक्टिव तत्व की मात्रा पाए जाने के बाद महिलाएं सशंकित हैं। डाॅक्टरों का कहना है कि यह मात्रा बेहद कम है। इससे शिशुओं को कोई खतरा नहीं है।
नियोनेटोलॉजिस्ट डॉक्टरों का कहना है कि यह मात्रा पेयजल के साथ हर जगह मौजूद होती है। पेयजल में आर्सेनिक की मात्रा के साथ यूरेनियम की मात्रा भी पाई जाती है इसको लेकर कई शोध भी हो चुके हैं। जम्मू एसएमजीएस अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ व नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. अनुमोदन गुप्ता ने इस गंभीर विषय पर विस्तार से जानकारी दी।
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एसएमजीएस अस्पताल जम्मू के नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. अनुमोदन गुप्ता ने कहा कि शून्य से तीन माह तक के बच्चों की बीमारियों और उनके खानपान की देखरेख के लिए नियोनेटोलॉजिस्ट डॉक्टर ही सलाह देते हैं। तीन माह किसी बच्चे के जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं।
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मां के दूध में खतरनाक रेडियोएक्टिव तत्व यूरेनियम-238 की मात्रा मिलने की बात पर डॉक्टर ने कहा कि ऐसे इलाके जहां पर ईंट-भट्ठे और खदानें आदि स्थित हैं वहां पेयजल में आर्सेनिक की मात्रा के साथ यूरेनियम की मात्रा भी रहती है।
जम्मू-कश्मीर में बिहार से करीब दो लाख कामगार काम करते हैं। इनमें महिलाओं की संख्या अधिक है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार प्रति लीटर पानी में यूरेनियम की मात्रा 30 माइक्रोग्राम तक सुरक्षित है। स्तनपान कराने वाली माताओं में यूरेनियम की मात्रा शून्य से पांच माइक्रोग्राम प्रति लीटर पाई गई है जो कि किसी भी तरह हानिकारक नहीं कही जा सकती।