{"_id":"6015c3ab8ebc3e08b83176f5","slug":"health-facilities-jammu-news-jammu-city-news-jmu2280550186","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुपर स्पेशलिटी में आईसीडी प्रत्यारोपण सुविधा शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुपर स्पेशलिटी में आईसीडी प्रत्यारोपण सुविधा शुरू
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के कार्डियोलाजी विभाग में नवीनतम तकनीक के साथ आईसीडी (इंप्लाटेबल कार्डियोवर्टर डिफैब्रिलेटर, पेस मेकर) प्रत्यारोपण सुविधा शुरू की गई है। भारत में हाल ही में आई इस आधुनिक तकनीक से पेस मेकर के माध्यम से हृदयरोगी डाक्टर के संपर्क में रह सकेगा। इस डिवाइस में ब्लूटूथ स्थापित है, जिसे मरीज के स्मार्ट फोन से जोड़कर दिल की निगरानी की जा सकती है। दिल से संबंधित सभी जानकारियां अपने डाक्टर को दी जा सकेंगी। अस्पताल में विभाग के एचओडी डा. सुशील शर्मा ने नवीनतम तकनीक से डिवाइस को एक मरीज में प्रत्यारोपित किया है।
डा. सुशील ने अखनूर के 39 वर्षीय एक युवा में नए डिवाइस को प्रत्यारोपित किया है। मरीज के दिल की मांसपेशियों के कमजोर होने के कारण 60 फीसदी के सामान्य पंपिंग की तुलना में वह केवल 20 फीसदी ही काम कर रही थीं। हार्ट पंपिंग फंक्शन 35 फीसदी से कम हो जाता है को दिल की धड़कन असामान्य होने का खतरा हो जाता है। इसे वेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया कहा जाता है। आईसीडी पेसमेकर जैसा ही है जिसे सामान्य तौर पर दिल के पास लगाया जाता है। यह दिल की धड़कन को सामान्य बनाने के लिए उसकी मांसपेशियों को एक बिजली का झटका देता है। डा. सुशील ने बताया कि आधुनिक पेसमेकर से मरीज के दिल की गतिविधियों से संबंधित डाटा मरीज के मोबाइल पर आ जाता है, जिसे डाक्टर जांच कर सकते हैं। इस डिवाइस के माध्यम से मरीज हर समय डाक्टर के संपर्क में रह सकता है। उसे डिवाइस की जांच के लिए अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन
डा. सुशील ने अखनूर के 39 वर्षीय एक युवा में नए डिवाइस को प्रत्यारोपित किया है। मरीज के दिल की मांसपेशियों के कमजोर होने के कारण 60 फीसदी के सामान्य पंपिंग की तुलना में वह केवल 20 फीसदी ही काम कर रही थीं। हार्ट पंपिंग फंक्शन 35 फीसदी से कम हो जाता है को दिल की धड़कन असामान्य होने का खतरा हो जाता है। इसे वेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया कहा जाता है। आईसीडी पेसमेकर जैसा ही है जिसे सामान्य तौर पर दिल के पास लगाया जाता है। यह दिल की धड़कन को सामान्य बनाने के लिए उसकी मांसपेशियों को एक बिजली का झटका देता है। डा. सुशील ने बताया कि आधुनिक पेसमेकर से मरीज के दिल की गतिविधियों से संबंधित डाटा मरीज के मोबाइल पर आ जाता है, जिसे डाक्टर जांच कर सकते हैं। इस डिवाइस के माध्यम से मरीज हर समय डाक्टर के संपर्क में रह सकता है। उसे डिवाइस की जांच के लिए अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन