अब अपने लोगों को मंत्री नहीं बना पाएंगे अपना PRO
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हाईकोर्ट ने सरकार को मंत्रियों और उच्च पदों पर आसीन लोगों के पीआरओ नियुक्त करने के लिए मानक मापदंड तय करने को कहा है।
प्रो. एसके भल्ला की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस ताशी राबस्तन ने कहा कि मापदंड निर्धारित करने की प्रक्रिया तीन माह में पूरी कर ली जाए।
हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि मंत्री किसी भी व्यक्ति या रिश्तेदार को अपना पीआरओ बना लेते हैं। अन्यथा एक फोरेस्ट गार्ड (केवल शर्मा) एसडीएम खौड़ की मौजदूगी में कैसे बाढ़ पीड़ितों के सरकारी चेक वितरित कर सकता है।
कैसे फोरेस्ट गार्ड बना उप मुख्यमंत्री का PROs
फोरेस्ट गार्ड से तत्कालीन उप मुख्यमंत्री तारा चंद के पीआरओ बनने वाले केवल शर्मा को सुरक्षा प्रदान करने के मामले में तत्कालीन एसएसपी अतुल गोयल के खिलाफ फैसला देते हुए जज ने कहा कि एक फोरेस्ट गार्ड की पत्नी के मौखिक आग्रह पर एसएसपी जम्मू ने उनके घर में चार एसपीओ लगा दिए।
खास बात यह है कि सुरक्षा प्रदान करने की जानकारी उच्च पुलिस अफसरों तक को नहीं दी गई। हालांकि, बाद में सुरक्षा वापस ले ली गई, लेकिन, सुरक्षा हटाने को लेकर भी उच्च अधिकारी दबाव में नजर आए।
मामले में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री के पीआरओ के खिलाफ कार्रवाई की अपील पर अदालत ने पाया कि जीएडी ने केवल शर्मा के पास अथाह संपत्ति के आरोप की जांच का जिम्मा विजिलेंस को सौंपा है। अदालत ने विजिलेंस से कहा कि मामले की जांच जल्द कर उसका कोई तार्किक अंत निकालें।
तत्कालीन उपमुख्यमंत्री के खिलाफ केवल द्वारा लगाए गए आरोपों पर अदालत ने कहा कि मामले का यह पहलू इस कोर्ट द्वारा विचार नहीं किया जा सकता। इसका स्पष्ट कारण सरकार को इस मामले को देखना है।