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Jammu News: इस बार बैसाखी पर फसल के रूप में घर नहीं आएंगी खुशियां
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गेहूं को पकने में लगेगा अभी एक और सप्ताह, मौसम ने बिगाड़ा खेल
संवाद न्यूज एजेंसी
रामगढ़। बैसाख में गेहूं और अन्य फसलों को खेतों से घर लाने का समय भी आ गया है। फसलों की कटाई के लिए किसान ट्रैक्टर, थ्रेशर, आदि को दुरुस्त करने में लगे हैं। बैसाखी के दिन ही किसान फसलों की कटाई शुरू कर देते हैं। लेकिन, इस बार गेहूं की फसल की कटाई देरी से होगी। क्योंकि, इस बार मौसम खराब होने से फसल पक नहीं पाई है। इसमें अभी पांच से सात दिन और लग सकते हैं।
किसानों ने कहा कि अगर बारिश और तेज हवाएं चलीं तो गेहूं की फसल को नुकसान भी हो सकता है। भगवान से प्रार्थना है कि बारिश न हो। उनका कहना है कि वह समय पर गेहूं की फसल घर लाना चाहते हैं, ताकि आने वाले दिनों में मौसम गर्म होने की वजह से उन्हें बीमारियों व अन्य परेशानियों का सामना न करना पड़े। गेहूं की पीली हो चुकी लहराती फसल को देखकर किसानों के चेहरे पर खुशी है। किसान नेता मोहन सिंह भट्टी, भगवान चौधरी, सुखदेव सिंह, ओमप्रकाश, बलवंत सिंह, तेजिंदर सिंह, राज कुमार, आदि ने बताया कि फसल की कटाई के लिए हम तैयार हैं। इस बार गेहूं की फसल तैयार होने में अधिक समय लगा है। इसका कारण गत माह कश्मीर में बर्फबारी और बारिश से मौसम में परिवर्तन है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामगढ़। बैसाख में गेहूं और अन्य फसलों को खेतों से घर लाने का समय भी आ गया है। फसलों की कटाई के लिए किसान ट्रैक्टर, थ्रेशर, आदि को दुरुस्त करने में लगे हैं। बैसाखी के दिन ही किसान फसलों की कटाई शुरू कर देते हैं। लेकिन, इस बार गेहूं की फसल की कटाई देरी से होगी। क्योंकि, इस बार मौसम खराब होने से फसल पक नहीं पाई है। इसमें अभी पांच से सात दिन और लग सकते हैं।
किसानों ने कहा कि अगर बारिश और तेज हवाएं चलीं तो गेहूं की फसल को नुकसान भी हो सकता है। भगवान से प्रार्थना है कि बारिश न हो। उनका कहना है कि वह समय पर गेहूं की फसल घर लाना चाहते हैं, ताकि आने वाले दिनों में मौसम गर्म होने की वजह से उन्हें बीमारियों व अन्य परेशानियों का सामना न करना पड़े। गेहूं की पीली हो चुकी लहराती फसल को देखकर किसानों के चेहरे पर खुशी है। किसान नेता मोहन सिंह भट्टी, भगवान चौधरी, सुखदेव सिंह, ओमप्रकाश, बलवंत सिंह, तेजिंदर सिंह, राज कुमार, आदि ने बताया कि फसल की कटाई के लिए हम तैयार हैं। इस बार गेहूं की फसल तैयार होने में अधिक समय लगा है। इसका कारण गत माह कश्मीर में बर्फबारी और बारिश से मौसम में परिवर्तन है।
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