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Jammu News: ग्रेटर कैलाश हत्या मामले में पूर्व एसएसपी शेख महमूद और गोला शाह को जमानत
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जम्मू। ग्रेटर कैलाश हत्या मामले केस में सोमवार को पूर्व एसएसपी शेख महमूद और रविंद्र कुमार गुप्ता उर्फ गोला शाह को सशर्त जमानत मिली है। जमीन हड़पने से जुड़े आरोप में सुप्रीम कोर्ट ने सभी चश्मदीदों के सबूत रिकॉर्ड करने के लिए ट्रायल जज की तारीफ की है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने हाईकोर्ट के चार नवंबर के आदेश के खिलाफ दायर अपील को कुछ हद तक मंजूरी दी। इसमें छह आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड में मौजूद मैटीरियल को रिहाई के लिए नाकाफी बताते हुए पुरुषोत्तम सिंह, सूरज सिंह, विकास सिंह और संदीप चाड़क को जमानत से इनकार कर दिया। 16 जनवरी को ट्रायल कोर्ट से चश्मदीदों के सबूत रिकॉर्ड करने के लिए हर सप्ताह लगातार दो तारीखें तय करने को कहा था। छह अप्रैल को ट्रायल कोर्ट को क्रॉस एग्जामिनेशन 25 मई तक पूरा करने को कहा। शीर्ष अदालत को बताया कि पांच के सबूत पूरे हो गए थे जबकि छठे चश्मदीद को प्रस्तावित गवाहों की सूची से हटा दिया गया था। जेएनएफ
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इन दलीलों पर मिली राहत
शेख महमूद के वकील ने कहा कि चश्मदीद ने गवाही के दौरान उनकी खास भूमिका नहीं बताई। फुटेज से भी घटनास्थल पर मौजूदगी साबित नहीं हुई। 73 साल के महमूद को बीमार बताते हुए इलाज और निगरानी की जरूरत बताई। रविंद्र कुमार गुप्ता के वकील ने दलील दी कि उनकी भूमिका से जुड़ी गवाही में बदलाव हुए थे। फुटेज में गोला शाह या उनके बेटे को प्लॉट में घुसते हुए नहीं दिखाया गया। जमानत के लिए अधिक उम्र और मई 2024 से जेल में होने का हवाला दिया गया। पुरुषोत्तम सिंह, सूरज सिंह, विकास सिंह और संदीप चाड़क की तरफ से पेश वकील ने कहा कि फुटेज में यह नहीं दिखता कि पुरुषोत्तम ने हमले के लिए लोहे के पाइप का इस्तेमाल किया था। सुप्रीम कोर्ट ने सेशंस जज को 31 मार्च तक सरकारी वकील के सबूतों की रिकॉर्डिंग पूरी करने के लिए कहा। जिन आरोपियों को जमानत नहीं मिली थी उन्हें दलीलें दोबारा देने की आजादी दी गई।
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यह था मामला...
30 अप्रैल 2024 को जागीर सिंह ने गंग्याल थाने में शिकायत दी थी। आरोप लगाया था कि कई लोगों ने भाई बलबीर सिंह को ग्रेटर कैलाश में 33 मरला जमीन से बेदखल करने की कोशिश की थी। हमले के दौरान भाई के बेटे अवतार सिंह को चोट आई और बाद में मौत हो गई। पुलिस ने हत्या, धमकी और साजिश की धाराएं जोड़ीं। छह आरोपियों को 3 मई को गिरफ्तार कर लिया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार चार्जशीट में घटना का फुटेज, आरोपियों की कॉल डिटेल और चश्मदीदों के बयान शामिल हैं। अभियोजन ने ट्रायल में 44 गवाहों का जिक्र किया है।
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जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने हाईकोर्ट के चार नवंबर के आदेश के खिलाफ दायर अपील को कुछ हद तक मंजूरी दी। इसमें छह आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज किया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड में मौजूद मैटीरियल को रिहाई के लिए नाकाफी बताते हुए पुरुषोत्तम सिंह, सूरज सिंह, विकास सिंह और संदीप चाड़क को जमानत से इनकार कर दिया। 16 जनवरी को ट्रायल कोर्ट से चश्मदीदों के सबूत रिकॉर्ड करने के लिए हर सप्ताह लगातार दो तारीखें तय करने को कहा था। छह अप्रैल को ट्रायल कोर्ट को क्रॉस एग्जामिनेशन 25 मई तक पूरा करने को कहा। शीर्ष अदालत को बताया कि पांच के सबूत पूरे हो गए थे जबकि छठे चश्मदीद को प्रस्तावित गवाहों की सूची से हटा दिया गया था। जेएनएफ
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इन दलीलों पर मिली राहत
शेख महमूद के वकील ने कहा कि चश्मदीद ने गवाही के दौरान उनकी खास भूमिका नहीं बताई। फुटेज से भी घटनास्थल पर मौजूदगी साबित नहीं हुई। 73 साल के महमूद को बीमार बताते हुए इलाज और निगरानी की जरूरत बताई। रविंद्र कुमार गुप्ता के वकील ने दलील दी कि उनकी भूमिका से जुड़ी गवाही में बदलाव हुए थे। फुटेज में गोला शाह या उनके बेटे को प्लॉट में घुसते हुए नहीं दिखाया गया। जमानत के लिए अधिक उम्र और मई 2024 से जेल में होने का हवाला दिया गया। पुरुषोत्तम सिंह, सूरज सिंह, विकास सिंह और संदीप चाड़क की तरफ से पेश वकील ने कहा कि फुटेज में यह नहीं दिखता कि पुरुषोत्तम ने हमले के लिए लोहे के पाइप का इस्तेमाल किया था। सुप्रीम कोर्ट ने सेशंस जज को 31 मार्च तक सरकारी वकील के सबूतों की रिकॉर्डिंग पूरी करने के लिए कहा। जिन आरोपियों को जमानत नहीं मिली थी उन्हें दलीलें दोबारा देने की आजादी दी गई।
यह था मामला...
30 अप्रैल 2024 को जागीर सिंह ने गंग्याल थाने में शिकायत दी थी। आरोप लगाया था कि कई लोगों ने भाई बलबीर सिंह को ग्रेटर कैलाश में 33 मरला जमीन से बेदखल करने की कोशिश की थी। हमले के दौरान भाई के बेटे अवतार सिंह को चोट आई और बाद में मौत हो गई। पुलिस ने हत्या, धमकी और साजिश की धाराएं जोड़ीं। छह आरोपियों को 3 मई को गिरफ्तार कर लिया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार चार्जशीट में घटना का फुटेज, आरोपियों की कॉल डिटेल और चश्मदीदों के बयान शामिल हैं। अभियोजन ने ट्रायल में 44 गवाहों का जिक्र किया है।