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GPS Anklet: आतंकियों के लिए सिलेंडर में 50 लाख भरकर ले जा रहा था आरोपी, डीजीपी ने बताई ट्रैकर लगाने की वजह

Mon, 06 Nov 2023 04:02 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Mon, 06 Nov 2023 04:02 PM IST
सार

डीजीपी आरआर स्वैन ने कहा कि पहला ट्रैकर जिस आरोपी पर लगाया गया है। वह आतंकवादी और अलगाववादी वित्तपोषण के लिए एक सिलेंडर में 50 लाख रुपये ले जा रहा था।

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GPS Anklet: Accused Ghulam carrying 50 lakh in cylinder for terrorists DGP rr swain on installing GPS tracker
डीजीपी आरआर स्वैन - फोटो : पुलिस

विस्तार

जम्मू कश्मीर में जमानत पर रिहा होने वाले आतंक से जुड़े आरोपियों की ट्रैकिंग अब जीपीएस एंकलेट से की जाएगी। हाल ही में उधमपुर के आरोपी गुलाम अहमद भट पर इसका इस्तेमाल किया गया। ऐसा करने वाला जम्मू कश्मीर देश का यह पहला प्रदेश बन गया है। जम्मू कश्मीर के डीजीपी आरआर स्वैन ने इसके इस्तेमाल की वजह बताई है।

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डीजीपी आरआर स्वैन ने कहा कि पहला ट्रैकर जिस आरोपी पर लगाया गया है। वह आतंकवादी और अलगाववादी वित्तपोषण के लिए एक सिलेंडर में 50 लाख रुपये ले जा रहा था। ट्रैकर के माध्यम से, हम न्यायालय के आदेशों के बाद उसकी गतिविधियों और जमानत की शर्तों की निगरानी कर पाएंगे।
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उन्होंने कहा कि इसे समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि कानूनी संदर्भ और परिचालन संदर्भ एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। परिचालन संदर्भ यह है कि जो लोग बार-बार अपराध करते हैं, चाहे वह आतंकवाद हो, नशीले पदार्थों के तस्कर हो या किसी प्रकार के अन्य जघन्य अपराध में शामिल हो। आरोपियों को जमानत इस शर्त पर दी जाती है कि वे कोई दूसरा अपराध नहीं करेंगे। आरोपी सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और गवाहों का बदला नहीं लेंगे। कानून इस भरोसे के आधार पर जमानत की अनुमति देता है। इसका मतलब यह नहीं है कि केस समाप्त हो गया है।

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जीपीएस एंकलेट लगाते हुए - फोटो : पुलिस
इस तरह के उपकरण का प्रयोग अमेरिका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड में जमानत, पेरोल तथा नजरबंदी के आरोपी की ट्रैकिंग के लिए किया जाता है। जीपीएस ट्रैकर एंकलेट को आरोपी की एड़ी में फिक्स किया जाता है जिससे उसके मूवमेंट की हर पल की जानकारी रहती है।
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