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Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक की संस्था SECMOL का FCRA लाइसेंस रद्द, लेह हिंसा के बाद सरकार ने लिया फैसला

Thu, 25 Sep 2025 07:19 PM IST
विकास कुमार पीटीआई, लेह
पीटीआई, लेह Published by: विकास कुमार Updated Thu, 25 Sep 2025 07:19 PM IST
सार


सरकार के आदेश के अनुसार, संस्था अब विदेश से चंदा या किसी भी तरह की आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं कर सकेगी। लाइसेंस रद्द किए जाने के पीछे क्या कारण हैं, इस बारे में फिलहाल आधिकारिक तौर पर विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है।

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Govt cancels FCRA licence of activist Sonam Wangchuk-led Students Educational and Cultural Movement of Ladakh
सोनम वांगचुक के संस्थान पर सरकार का एक्शन - फोटो : PTI

विस्तार

केंद्र सरकार ने लद्दाख के जाने-माने पर्यावरणविद और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के नेतृत्व वाली संस्था स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत मिला लाइसेंस रद्द कर दिया है।

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सरकार के आदेश के अनुसार, संस्था अब विदेश से चंदा या किसी भी तरह की आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं कर सकेगी। लाइसेंस रद्द किए जाने के पीछे क्या कारण हैं, इस बारे में फिलहाल आधिकारिक तौर पर विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है।

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1988 में ने की थी वांगचुक
गौरतलब है कि स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख की स्थापना 1988 में सोनम वांगचुक ने की थी। यह संस्था लद्दाख में शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए काम करती रही है। सरकार के इस कदम के बाद लद्दाख में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। सोनम वांगचुक पहले से ही लद्दाख की पर्यावरणीय और संवैधानिक मांगों को लेकर चर्चा में बने हुए हैं।

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लद्दाख में हिंसा भड़कने के पीछे गृह मंत्रालय ने वांगचुक को बताया जिम्मेदार
हाल ही में वांगचुक ने लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर 10 सितंबर से भूख हड़ताल शुरू की थी। इस बीच बुधवार को क्षेत्र में 1989 के बाद की सबसे गंभीर हिंसा हुई, जिसमें युवाओं ने भाजपा मुख्यालय और हिल काउंसिल को निशाना बनाया और वाहनों को आग के हवाले कर दिया। हालात काबू में लाने के लिए पुलिस व अर्धसैनिक बलों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े थे। झड़पों में चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। 30 पुलिस कर्मियों समेत 80 से ज्यादा लोग घायल हुए। 

मामले में गृह मंत्रालय की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि सोनम वांगचुक ने अपने भड़काऊ बयानों के माध्यम से भीड़ को उकसाया था। हिंसक घटनाओं के बीच, उन्होंने अपना उपवास तोड़ा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई व्यापक प्रयास किए बिना एम्बुलेंस से अपने गांव चले गए।

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