J&K: सतर्कता आयोग की सिफारिशें लंबित रहने से राज्यपाल चिंतित
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राज्यपाल एनएन वोहरा ने सतर्कता आयोग की सिफारिशों के लंबे समय तक लंबित रहने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार को मुख्य सतर्कता आयुक्त (एसवीसी) की सिफारिशों पर समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।
इस संबंध में वह जल्द ही मुख्यमंत्री के साथ चर्चा करेंगे, ताकि लंबित मामलों पर त्वरित कार्रवाई हो सके। इससे पहले मुख्य सतर्कता आयुक्त कुलदीप खुड्डा ने पिछले तीन वर्षों में आयोग की ओर से राज्य सरकार को विभिन्न विभागों की भेजी गई सिफारिशों तथा उस पर हुई कार्रवाई की जानकारी दी।
सीवीसी ने राज्यपाल को बताया कि राज्य सरकार को भेजी कुछ सिफारिशों के संबंध में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसमें चेक प्रणाली के साथ वितरण और लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे भुगतान करना, जम्मू में केरोसिन तेल टैंकरों की आवाजाही ट्रैक करने के लिए जीपीएस का उपयोग, नियुक्ति के विभिन्न स्थानों की बजाय सभी कर्मचारियों के लिए एकल जीपीएफ अकाउंट नंबर जारी करना, कोषागारों के माध्यम से भुगतान की व्यवस्था बंद करना, निविदा दस्तावेजों के लिए वेबसाइटों का उपयोग करना, अप्रचलित और बेकार की वस्तुओं के निपटारे के लिए आरक्षित मूल्य तय करने के लिए प्रक्रिया अपनाना, ऑनलाइन गन लाइसेंस जारी करना शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं जम्मू-कश्मीर पुलिस एक्ट बनाने के निर्देश
उन्होंने बताया कि अभी भी कई सिफारिशों पर कार्रवाई बाकी है। इनमें वन उपज की बिक्री के लिए खुली नीलामी करना, प्रत्येक जिले में इंजीनियरिंग विभागों में विभागीय सतर्क ता अधिकारियों के रूप में अधीक्षण अभियंताओं को नियुक्त करना, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नया जम्मू-कश्मीर पुलिस एक्ट बनाना, राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात की जांच के लिए संवेदनशील बिंदुओं की पहचान और थानों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना, वन भूमि से अतिक्रमण हटाना (12626 हेक्टेयर में से केवल 1039 हेक्टेयर भूमि से अतिक्रमण हटाया गया) पर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो पाई है।
बिजली चोरी से संबंधित अपराधों से निपटने के लिए जम्मू और श्रीनगर में पुलिस स्टेशन स्थापित करना, पूर्ण हो चुके विकास कार्यों की वीडियोग्राफी ऑनलाइन अपलोड करना, सभी राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण, उपभोक्ताओं के राशन कार्ड को आधार नंबर से जोड़ना शामिल है। इसके साथ ही सभी उपलब्ध जनोपयोगी सेवाओं को ऑनलाइन बनाना और म्यूटेशन, पीआरसी/श्रेणी प्रमाण पत्र/आय प्रमाण पत्र/ संपत्ति प्रमाण पत्र/ फर्द इंतिखाब प्रमाणित करने के मामलों को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत उपलब्ध कराने पर भी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो पाई है।