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Jammu News: सूखा कचरा अब आमदनी का जरिया
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जम्मू। भोपाल, वाराणसी के बाद अब जम्मू नगर निगम में टाॅरीफाइड चारकोल यूनिट खोलने का प्रस्ताव है। यह दावा मेयर राजिंद्र सिंह ने किया है। उनके अनुसार चारकोल यूनिट से कोयला तैयार करने के साथ ही निर्यात भी किया जाएगा। इससे जहां सूखे कचरे का निस्तारण होगा वहीं, नगर निगम को आमदनी भी होगी। छह सौ मीट्रिक टन कचरे से तीन टन चारकोल का निर्माण होगा।
नगर निगम चारकोल बनने के बाद इसे बिजली उत्पादन के लिए बेचेगा, जहां से आमदनी होगी। भोपाल और वाराणसी चारकोल यूनिट की तर्ज पर यूनिट लगाने का प्रस्ताव है। पहले वहां पर भी कचरा निस्तारण में परेशानी आती थी, लेकिन टॉरीफाइड चारकोल यूनिट लगाने से समस्या का निदान हुआ है।
बिजली उत्पादन के लिए कोयले की डिमांड ज्यादा रहती है। अब जल्द ही पार्षदों को वाराणसी भेजा जाएगा, जहां वह यूनिट को देखेंगे। इसके बाद रिपोर्ट जमा करवाई जाएगी और आगामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यूनिट में एक टन कोयले से नगर निगम को औसतन 6500 से आठ हजार तक कमाई होगी और कचरा निस्तारण की समस्या का भी निदान होगा।
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इसलिए जरूरी है यूनिट
यूनिट लगने के बाद सूखे कचरे को दबाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मौजूदा समय में दो सौ मीट्रिक टन सूखा कचरा एकत्रित होता है। पहले तो डंपिंग साइट में कचरे के ढेर लग जाते हैं। इसके बाद जेसीबी के माध्यम से कचरे को दबाया जाता है। यूनिट लगने से समस्या का निदान हो सकेगा।
कचरा संयंत्र केंद्र पर भी काम मंद गति से चल रहा
मौजूदा समय में सूखा कचरा ठिकाने लगाना नगर निगम के लिए आफत बन गया है। कोट भलवाल में कचरा संयंत्र केंद्र का काम चहारदीवारी से आगे नहीं बढ़ पाया। काम शुरू करने के लिए टेंडर किए जा रहे हैं। आगामी दो साल में प्लांट शुरू होने की संभावना है। अब नगर निगम की टाॅरीफाइड चारकोल यूनिट स्थापित करने की योजना है।
सूखा कचरा ठिकाने लगाने के लिए नए विकल्प तलाशने होंगे। टाॅरीफाइड चारकोल यूनिट अच्छा अवसर है। नगर निगम के पास कोट भलवाल में जमीन है। पीपीपी मोड में काम हो सकता है। पार्षदों की टीम वाराणसी नगर निगम का दौरा कर सुझाव देगी। इसके बाद यूनिट स्थापित करने के लिए आगामी काम होगा।
- राजिंदर शर्मा, मेयर, नगर निगम
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नगर निगम चारकोल बनने के बाद इसे बिजली उत्पादन के लिए बेचेगा, जहां से आमदनी होगी। भोपाल और वाराणसी चारकोल यूनिट की तर्ज पर यूनिट लगाने का प्रस्ताव है। पहले वहां पर भी कचरा निस्तारण में परेशानी आती थी, लेकिन टॉरीफाइड चारकोल यूनिट लगाने से समस्या का निदान हुआ है।
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बिजली उत्पादन के लिए कोयले की डिमांड ज्यादा रहती है। अब जल्द ही पार्षदों को वाराणसी भेजा जाएगा, जहां वह यूनिट को देखेंगे। इसके बाद रिपोर्ट जमा करवाई जाएगी और आगामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यूनिट में एक टन कोयले से नगर निगम को औसतन 6500 से आठ हजार तक कमाई होगी और कचरा निस्तारण की समस्या का भी निदान होगा।
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इसलिए जरूरी है यूनिट
यूनिट लगने के बाद सूखे कचरे को दबाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मौजूदा समय में दो सौ मीट्रिक टन सूखा कचरा एकत्रित होता है। पहले तो डंपिंग साइट में कचरे के ढेर लग जाते हैं। इसके बाद जेसीबी के माध्यम से कचरे को दबाया जाता है। यूनिट लगने से समस्या का निदान हो सकेगा।
कचरा संयंत्र केंद्र पर भी काम मंद गति से चल रहा
मौजूदा समय में सूखा कचरा ठिकाने लगाना नगर निगम के लिए आफत बन गया है। कोट भलवाल में कचरा संयंत्र केंद्र का काम चहारदीवारी से आगे नहीं बढ़ पाया। काम शुरू करने के लिए टेंडर किए जा रहे हैं। आगामी दो साल में प्लांट शुरू होने की संभावना है। अब नगर निगम की टाॅरीफाइड चारकोल यूनिट स्थापित करने की योजना है।
सूखा कचरा ठिकाने लगाने के लिए नए विकल्प तलाशने होंगे। टाॅरीफाइड चारकोल यूनिट अच्छा अवसर है। नगर निगम के पास कोट भलवाल में जमीन है। पीपीपी मोड में काम हो सकता है। पार्षदों की टीम वाराणसी नगर निगम का दौरा कर सुझाव देगी। इसके बाद यूनिट स्थापित करने के लिए आगामी काम होगा।
- राजिंदर शर्मा, मेयर, नगर निगम