{"_id":"5c387787bdec2273196084d8","slug":"former-ias-shah-faesal-press-conference-in-srinagar-jammu-kashmir","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पाकिस्तानी पीएम इमरान खान और केजरीवाल से प्रभावित: शाह फैसल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पाकिस्तानी पीएम इमरान खान और केजरीवाल से प्रभावित: शाह फैसल
Fri, 11 Jan 2019 04:31 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Fri, 11 Jan 2019 04:31 PM IST
विज्ञापन
शाह फैसल
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल चुनाव लड़कर जम्मू-कश्मीर का मुकद्दर बदलने की कोशिश करेंगे। वह संसदीय चुनाव लड़ेंगे। हालांकि इसके लिए वह मुख्यधारा के किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे। उन्हें हुर्रियत की विचारधारा मंजूर नहीं है। शाह फैसल ने खुद को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान का फैन बताया। उन्होंने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा कि जहां तक हुर्रियत जैसी तंजीमों की बात है तो वह सिस्टम में विश्वास नहीं रखतीं, लेकिन मेरा विधायिका में पूरा विश्वास है।
हुर्रियत में शामिल होने की संभावना के बारे में एक सवाल पर फैसल ने कहा कि वह ऐसा नहीं करेंगे। क्योंकि हुर्रियत की विचारधारा उनकी विचारधारा से अलग है। उन्होंने कहा ‘मैं सिस्टम से आया एक आदमी हूं और मेरे पास अनुभव है और मेरी विशेषज्ञता शासन में है। मुझे उन संस्थानों में कुछ करने में खुशी होगी जहां मैं एक प्रशासक के रूप में अपने अनुभव का उपयोग कर सकता हूं। हुर्रियत का चूंकि चुनाव की राजनीति में विश्वास नहीं है इसलिए मुझे लगता है कि इस समय मैं ऐसा करने में सक्षम नहीं हो सकता हूं।’ हालांकि उन्होंने कहा कि यह मानना गलत है कि कश्मीर समस्या के समाधान में हुर्रियत की कोई भूमिका नहीं है।
उन्होंने कहा कि वह अगला कदम उठाने से पहले राजनीतिक दलों सहित सभी समान विचारधारा के लोगों के साथ विचार-विमर्श करेंगे। कश्मीर में हम सबको एक साथ आने की जरूरत है। हम संकट की स्थिति में हैं। यह लोगों की कब्र पर राजनीति करने का समय नहीं है। यह पूछे जाने पर कि क्या वह चुनाव लड़ेंगे? फैसल ने कहा कि मुझे आगामी चुनाव लड़ने में खुशी होगी। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में राजनीति की जो स्थिति रही उसने युवाओं को इसकी ओर आकर्षित नहीं किया। हमें इसे बदलने की जरूरत है। मैं हमारी समस्याओं के समाधान के लिए संसद का उपयोग करना चाहता हूं।
विज्ञापन
विज्ञापन
हुर्रियत में शामिल होने की संभावना के बारे में एक सवाल पर फैसल ने कहा कि वह ऐसा नहीं करेंगे। क्योंकि हुर्रियत की विचारधारा उनकी विचारधारा से अलग है। उन्होंने कहा ‘मैं सिस्टम से आया एक आदमी हूं और मेरे पास अनुभव है और मेरी विशेषज्ञता शासन में है। मुझे उन संस्थानों में कुछ करने में खुशी होगी जहां मैं एक प्रशासक के रूप में अपने अनुभव का उपयोग कर सकता हूं। हुर्रियत का चूंकि चुनाव की राजनीति में विश्वास नहीं है इसलिए मुझे लगता है कि इस समय मैं ऐसा करने में सक्षम नहीं हो सकता हूं।’ हालांकि उन्होंने कहा कि यह मानना गलत है कि कश्मीर समस्या के समाधान में हुर्रियत की कोई भूमिका नहीं है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि वह अगला कदम उठाने से पहले राजनीतिक दलों सहित सभी समान विचारधारा के लोगों के साथ विचार-विमर्श करेंगे। कश्मीर में हम सबको एक साथ आने की जरूरत है। हम संकट की स्थिति में हैं। यह लोगों की कब्र पर राजनीति करने का समय नहीं है। यह पूछे जाने पर कि क्या वह चुनाव लड़ेंगे? फैसल ने कहा कि मुझे आगामी चुनाव लड़ने में खुशी होगी। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में राजनीति की जो स्थिति रही उसने युवाओं को इसकी ओर आकर्षित नहीं किया। हमें इसे बदलने की जरूरत है। मैं हमारी समस्याओं के समाधान के लिए संसद का उपयोग करना चाहता हूं।
विज्ञापन
केजरीवाल व इमरान से प्रभावित
भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने वाले शाह फैसल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की कार्यशैली से प्रभावित दिखे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह एक ऐसी जगह काम कर रहे हैं जहां काम करना बहुत आसान नहीं है।
आजादी वर्जित शब्द नहीं
उन्होंने कहा कि आजादी, आत्मनिर्णय का अधिकार और जनमत संग्रह जैसे शब्दों को मुख्यधारा की राजनीति में वर्जित शब्दों की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। फैसल ने कहा कि मुख्यधारा की राजनीति को इस शब्दावली को ठीक से देखना चाहिए और फिर से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांति कायम करने की उनकी नयी पहल को मौजूदा पार्टियों के एक विकल्प के तौर पर नहीं बल्कि एक पूरक के तौर पर देखा जाना चाहिए।
इस्तीफा एक हथियार
उन्होंने कहा, क्षेत्र में जाने, युवाओं और अहम हितधारकों को जमीनी स्तर पर सुनने के बाद कोई फैसला करने की मेरी योजना है। उन्होंने अपने इस्तीफे के समय को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा इस्तीफा एक हथियार है, जिसका सिर्फ एक बार इस्तेमाल होना चाहिए और मुझे लगता है कि मैंने इसका सही वक्त पर उपयोग किया।
आजादी वर्जित शब्द नहीं
उन्होंने कहा कि आजादी, आत्मनिर्णय का अधिकार और जनमत संग्रह जैसे शब्दों को मुख्यधारा की राजनीति में वर्जित शब्दों की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। फैसल ने कहा कि मुख्यधारा की राजनीति को इस शब्दावली को ठीक से देखना चाहिए और फिर से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांति कायम करने की उनकी नयी पहल को मौजूदा पार्टियों के एक विकल्प के तौर पर नहीं बल्कि एक पूरक के तौर पर देखा जाना चाहिए।
इस्तीफा एक हथियार
उन्होंने कहा, क्षेत्र में जाने, युवाओं और अहम हितधारकों को जमीनी स्तर पर सुनने के बाद कोई फैसला करने की मेरी योजना है। उन्होंने अपने इस्तीफे के समय को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा इस्तीफा एक हथियार है, जिसका सिर्फ एक बार इस्तेमाल होना चाहिए और मुझे लगता है कि मैंने इसका सही वक्त पर उपयोग किया।