जम्मू के मरीजों की दाल-रोटी पर बना संकट
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जीएमसी सहित अन्य एसोसिएटेड अस्पतालों में मरीजों के मुंह से निवाला छीनना लगभग तय है। ठेकेदारों ने मंगलवार को जीएमसी प्रशासन को नोटिस जारी कर तीन नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया है। जीएमसी पर पौने दो करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारी बकाया है। डाइट पर ताला लगने की सूरत में करीब 1200 मरीजों को रोजाना मिल रही निशुल्क दाल रोटी पर ताला लग जाएगा।
सूत्रों के अनुसार इससे पहले ठेकेदारों ने जीएमसी प्रशासन को गत 15 अक्तूबर तक का नोटिस दिया था। लेकिन स्वास्थ्य मंत्री के हस्तक्षेप से किसी तरह काम चलाया जा रहा है। मगर अब आर्थिक संकट बढ़ने से ठेकेदारों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। देनदारी में सबसे ज्यादा जीएमसी पर करीब 70 लाख रुपये बकाया हैं।
उसके बाद एसएमजीएस पर करीब 68 लाख, सीडी अस्पताल पर करीब 32 लाख, साइक्रेटरी पर करीब 11 लाख और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल करीब नौ लाख रुपये की देनदारी है। इसमें जीएमसी, एसएमजीएस और साइक्रेटरी अस्पताल से 6-8 माह और सीडी से एक साल से ज्यादा समय से भुगतान नहीं हो पाया है।
जीएमसी सहित अन्य एसोसिएटेड अस्पतालों में रोजाना सुबह, दोपहर और रात की शिफ्ट में 1000-1200 के बीच मरीजों को निशुल्क डाइट की सुविधा मुहैया करवाई जा रही है। इन अस्पतालों में दूरवर्ती इलाकों से पहुंचने वाले मरीजों के लिए डाइट सेवा काफी राहत देती है।
खासकर उन मरीजों के लिए जो कई दिन तक अस्पताल में इलाज के लिए रहते हैं। ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान न होने से उन पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। बाजार पर लाखों रुपये का कर्ज हो चुका है। कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया जा रहा है। इससे पहले सितंबर 2012 में भी डेढ़ करोड़ रुपये की देनदारी हो जाने से डाइट और लांड्री के कांट्रेक्टरों ने दोनों यूनिट ठप करने का नोटिस दिया था।
डाइट से मरीजों का भरता है पेट
जीएमसी सहित अन्य एसोसिएटेड अस्पतालों में एसएमजीएस, साइक्रेटरी, सीडी और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में डाइट में सुबह के नाश्ते में आधा लीटर दूध, चीनी का पाउच, चार ब्रेड पीस, दोपहर को एक दाल, सब्जी, चार चपाती, चावल तथा रात को चावल, चार चपाती और एक सब्जी दी जाती है। हफ्ते में दो दिन पनीर की सब्जी भी दी जाती है। इसमें औसतन प्रति मरीज पर एक दिन की डाइट पर साठ रुपये खर्च आता है।
वैकल्पिक व्यवस्था नहीं
अस्पताल के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल ने बताया कि डाइट बंद होने की सूरत में फिलहाल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। लेकिन ऐसा होने पर उचित कदम उठाए जाएंगे। प्रिंसिपल डा. घनश्याम का कहना है कि डाइट के भुगतान के लिए राशि का बंदोबस्त किया जा रहा है।