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हिंसा की वजह से कश्मीर में बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रम को बड़ा झटका

Thu, 08 Sep 2016 11:23 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Thu, 08 Sep 2016 11:23 AM IST
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Flood Management Programme held
कश्मीर में बाढ़ - फोटो : File Photo
दो से 26 सितंबर 2014 तक कश्मीर में विनाशकारी बाढ़ का दर्द झेल चुके लोगों के लिए कश्मीर में जारी माहौल और अलगाववादियों के आए दिन बंद को आगे बढ़ाने के जारी हो रहे कैलेंडर भारी पड़ रहे हैं।
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इसका कारण यह है कि कश्मीर में जारी माहौल से व्यापक बाढ़ प्रबंधक कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा है। स्थानीय श्रमिक भी काम के लिए नहीं मिल पा रहे। 

आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 2014 में कश्मीर में आई बाढ़ में झेलम दरिया के कहर से ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर बाढ़ में डूबा रहा। रियासत में सरकार के कामकाज का मुख्य केंद्र नागरिक सचिवालय तक बाढ़ में डूबे रहे। कई अहम फाइलें तक नष्ट हो गईं थीं। सुरक्षा बलों और भारतीय वायु सेना ने बाढ़ में फंसे करीब 80 हजार लोगों को बचाया था। 
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तवी, चिनाब में अतिक्रमण बड़ा खतरा

Flood Management Programme held
तवी नदी - फोटो : Amar Ujala
बाढ़ में 260 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और 50 से ज्यादा पुल क्षतिग्रस्त हुए थे। हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। 390 गांव पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूबे रहे। 1225 गांव आंशिक रूप से बाढ़ से प्रभावित हुए थे।

जम्मू कश्मीर सरकार ने फरवरी 2016 में व्यापक बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रम शुरू कर 399 करोड़ की राशि की योजना को शुरू करने का फैसला लिया। कोलकाता से ड्रेजिंग मशीनें भी मंगवाई गईं, लेकिन नौ जुलाई 2016 से कश्मीर में जारी हालात से बाढ़ प्रबंधक कार्यक्रम को भी झटका लगा है। 

पीएचई, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के आयुक्त सचिव संजीव वर्मा का कहना है कि बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रम को कश्मीर में जारी हालात में भी चलाया जा रहा है। इतना जरूर है कि काम करने की रफ्तार कम हुई है। 

वहीं जम्मू की लाइफ लाइन तवी नदी और अखनूर स्थित चिनाब दरिया में भी सिंतबर 2014 की बाढ़ लोगों के लिए समस्याओं का अंबार छोड़ गई। तवी और चिनाब के आसपास बसे करीब 400 गांव बाढ़ से प्रभावित रहे। बाढ़ प्रबंधन के लिए यहां भी काम नाममात्र का ही हो पाया। अतिक्रमण को हटाने के लिए भी कुछ खास काम नहीं हुआ है। 
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