चश्मा शाही और शालीमार-निशात पर भी सैलाब की प्रेतछाया
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लिथुआनिया का बीस सदस्यीय पर्यटक दल पूरे एक पखवारे का कार्यक्रम बनाकर श्रीनगर आया था लेकिन सैलाब ने उनकी योजना को भी डूबो दिया। धरती के जन्नत की इस तस्वीर की कल्पना उन्होंने नहीं की थी। सोनमर्ग में दो दिन का टूर महज कुछ घंटों में निपटाना पड़ा और श्रीनगर में गंदगी और कचरे ने मूवमेंट पर पहरा लगा दिया।
पर्यटकों के इस दल को कश्मीर के पहले दौरे में ही अनगिनत परेशानियों से रूबरू होना पड़ा। निराश दल तय प्रोग्राम से पहले ही लेह-लद्दाख का रूख कर लिया। सैलाब की मार से अछूते शालीमार-निशात बाग और चश्मे शाही में इन विदेशी पर्यटकों को जन्नत की एक झलक दिखी।
शालीमार बाग के बाहर लेह के निकलने से पहले यूरोप के इस दल की मुखिया अलीक्जा इलियाकास ने बताया कि सैलाब के कारण पैदा हुई स्थिति से निराशा हुई है। सोनमर्ग से भी उल्टे पैर वापस होना पड़ा और गाइड ने गुलमर्ग जाने से रोक दिया। यहां सब कुछ बंद है। सड़कों पर कचरा फैला है।
एडमिनिस्ट्रेशन भी होटल में ही स्टे करने को कह रहा है। शालीमर और निशात बाग में बाढ़ के पानी के असर नहीं है। चारों तरफ फूल खिले हैं। फव्वारे हैं लेकिन टूरिस्ट नहीं हैं। चश्मे शाही में भी हमारे दल के अलावा कोई और नहीं दिखा। इसी दल के अरनास काजीकास को मलाल है कि वह सैलाब के कारण जन्नत की खूबसूरती को करीब से महसूस नहीं कर सके।
सैलाब के बाद से बाग में सन्नाटा
शालीमार बाग के गेट पर तैनात कर्मचारी मोहम्मद रमजान कहते हैं कि एक पखवारे में पहली बार यूरोप यूनियन के पर्यटकों का यह दल बाग की सैर करने आया। सैलाब के बाद से बाग में सन्नाटा पसरा है। यह बांग ऊंचाई पर है।
इस कारण बाढ़ के पानी से बाग को नुकसान नहीं हुआ। पानी चार सीढ़ियों तक ही आया। बाग में रंग -बिरंगे फूलों और अनवरत चल रहे फव्वारों को अब भी पर्यटकों का इंतजार है लेकिन उनकी आस पूरी होने में अभी तीन से छह महीने का वक्त लग सकता है।
बाग के दूसरे कर्मचारी मुश्ताक अहमद डार कहते हैं कि बाग में रौनक तभी आएगी जब श्रीनगर के हालात सुधरेंगे। चश्मे शाही में भी सैलाब का पानी नहीं घुसा था लेकिन सन्नाटा यहां भी है। चश्मे शाही के कांट्रेक्टर आरिफ कहते हैं कि परी महल का ठेका भी उनके पास ही है।
चश्मे शाही के लिए 97 लाख रुपये अदा किए। अब पूंजी डूबने का खतरा है। सात लाख खर्च कर टिकटें छपवा ली थीं। अब काउंटर खाली हैं। सोलह कर्मचारियों की छुट्टी करनी पड़ी।
पार्किंग के लिए बीस कर्मचारी थे जो घर बैठे हैं। चश्मे साही के बाहर की दुकानें खुलती तो हैं लेकिन कोई पर्यटक नहीं आता। सीढ़ियों के ऊपर कश्मीरी ड्रेस पहनाकर फोटो निकालने वालों का धंधा भी चौपट है।
बार्टिनिकल गार्डन भी सूना है। आरिफ ने कहा कि टूलिप गार्डन का सीजन मार्च में शुरू होता है। हालात में तेजी से सुधार नहीं हुए तो ट्यूलिप गार्डन की रौनक पर भी असर पड़ेगा।