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Jammu News: गुज्जर नगर में बाढ़ के निशां बाकी़, दिहाड़ी लगाने वालों पर पड़ी मार
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दानिश। अमर उजाला
- गंदे पानी से सराबोर है सड़क, पार्क का अस्तित्व ही मिट गया
-लोग बोले भयावह मंजर था, रोजी रोटी के लिए करना पड़ रहा जतन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अगस्त में आई बाढ़ के निशान गुज्जर नगर में अब भी बाकी हैं। लोग घरों के अंदर जमा मलबे को निकाल रहे हैं। गुज्जर नगर में रोज दिहाड़ी लगाकर कमाने खाने वाले फारुख अहमद खान कहते हैं कि एक महीने से तो घर पर सफाई करने और मलबा हटाने में लग गया। सारा सामान बाढ़ ने लील लिया। सड़क पर गंदा पानी व मलबा है। दानिश के घर का एक कमरा अभी भी मलबे से पटा पड़ा है। आंगन में गाद के निशान बाकी हैं।
गुज्जर नगर में लेन में बसे लोगों के सामने वाले पार्क का बाढ़ ने नक्शा ही बदल दिया है। पानी के तेज बहाव के साथ आया कचरा टूट चुकी रेलिंग की शोभा बिगाड़ रहा है। घर का मुखिया काम की तलाश में निकलता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकार से कुछ मदद मिल जाए तो पटरी पर जीवन दौड़े। यह कब मिलेगी इसे बताने वाला कोई नहीं है।
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40 फुट तक पानी ऊपर आया
तो दीवार व कमरा भी धंस गया
बाढ़ के पानी ने घर के सामने की दीवार व दो कमरों को जमींदोज कर दिया। पिछले कमरे की दीवार व छत क्षतिग्रस्त हो गई। भागकर सुरक्षित जगह पहुंचे। सरकार की तरफ से कब सहायता मिलेगी इसकी कोई जानकारी नहीं मिल रही। हम लोग रोज कमाने वाले हैं। कभी काम मिलता है तो कभी नहीं मिलता। एक महीने से यह भी बंद था।
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-फारुख अहमद खान, राजमिस्त्री
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घर के ऊपर किराएदार हो
गए परेशान, काम रहा बंद
घर के ऊपर रहने वाले किराएदारों के कमरों तक पानी पहुंच गया था। रोज ये लोग कमाने खाने वाले हैं। घर पर नीचे के कमरों में गाद जम गई थी। पीछे की तरफ की दीवार टूट गई तो मलबे का पहाड़ अंदर आ गया। 32 हजार रुपये केवल लेबर लगाकर इसे साफ कराने में लग गए। सरकार कब मदद देगी यह तो पता नहीं है। कोई हाल भी पूछने अब नहीं आ रहा।
-दानिश, गुज्जर नगर
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-घर में सब कुछ हो गया बर्बाद
पिता लगा रहे फलों की रेहड़ी
-बाढ़ में घर का सारा सामान खराब हो गया। पिता एक महीने से रेहड़ी भी नहीं लगा सके। बीते दो तीन दिनों से फल की रेहड़ी लगाना शुरू कर दिया है। सरकार जल्द से जल्द मदद दे तो कुछ राहत मिले। रोज कमाने खाने वालों के लिए तो यह बाढ़ मुसीबत बनकर आई।
-अदनान, गुज्जर नगर
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-लोग बोले भयावह मंजर था, रोजी रोटी के लिए करना पड़ रहा जतन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अगस्त में आई बाढ़ के निशान गुज्जर नगर में अब भी बाकी हैं। लोग घरों के अंदर जमा मलबे को निकाल रहे हैं। गुज्जर नगर में रोज दिहाड़ी लगाकर कमाने खाने वाले फारुख अहमद खान कहते हैं कि एक महीने से तो घर पर सफाई करने और मलबा हटाने में लग गया। सारा सामान बाढ़ ने लील लिया। सड़क पर गंदा पानी व मलबा है। दानिश के घर का एक कमरा अभी भी मलबे से पटा पड़ा है। आंगन में गाद के निशान बाकी हैं।
गुज्जर नगर में लेन में बसे लोगों के सामने वाले पार्क का बाढ़ ने नक्शा ही बदल दिया है। पानी के तेज बहाव के साथ आया कचरा टूट चुकी रेलिंग की शोभा बिगाड़ रहा है। घर का मुखिया काम की तलाश में निकलता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकार से कुछ मदद मिल जाए तो पटरी पर जीवन दौड़े। यह कब मिलेगी इसे बताने वाला कोई नहीं है।
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40 फुट तक पानी ऊपर आया
तो दीवार व कमरा भी धंस गया
बाढ़ के पानी ने घर के सामने की दीवार व दो कमरों को जमींदोज कर दिया। पिछले कमरे की दीवार व छत क्षतिग्रस्त हो गई। भागकर सुरक्षित जगह पहुंचे। सरकार की तरफ से कब सहायता मिलेगी इसकी कोई जानकारी नहीं मिल रही। हम लोग रोज कमाने वाले हैं। कभी काम मिलता है तो कभी नहीं मिलता। एक महीने से यह भी बंद था।
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-फारुख अहमद खान, राजमिस्त्री
घर के ऊपर किराएदार हो
गए परेशान, काम रहा बंद
घर के ऊपर रहने वाले किराएदारों के कमरों तक पानी पहुंच गया था। रोज ये लोग कमाने खाने वाले हैं। घर पर नीचे के कमरों में गाद जम गई थी। पीछे की तरफ की दीवार टूट गई तो मलबे का पहाड़ अंदर आ गया। 32 हजार रुपये केवल लेबर लगाकर इसे साफ कराने में लग गए। सरकार कब मदद देगी यह तो पता नहीं है। कोई हाल भी पूछने अब नहीं आ रहा।
-दानिश, गुज्जर नगर
-घर में सब कुछ हो गया बर्बाद
पिता लगा रहे फलों की रेहड़ी
-बाढ़ में घर का सारा सामान खराब हो गया। पिता एक महीने से रेहड़ी भी नहीं लगा सके। बीते दो तीन दिनों से फल की रेहड़ी लगाना शुरू कर दिया है। सरकार जल्द से जल्द मदद दे तो कुछ राहत मिले। रोज कमाने खाने वालों के लिए तो यह बाढ़ मुसीबत बनकर आई।
-अदनान, गुज्जर नगर

दानिश। अमर उजाला

दानिश। अमर उजाला

दानिश। अमर उजाला

दानिश। अमर उजाला