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पहली बार गूगल मैप से हिम तेंदुओं का सर्वे
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 18 Jan 2017 11:06 AM IST
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snow leopard
- फोटो : FILE PHOTO
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लद्दाख में पाए जाने वाले दुर्लभ हिम तेंदुओं की जनसंख्या का सही आंकड़ा सामने आएगा। इसके लिए पहली बार बड़े स्तर पर सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है। अगले एक साल तक इस पर काम चलेगा। पहली बार इसके सर्वे के लिए गूगल मैप की मदद ली जाएगी।
जीपीएस के माध्यम से सर्वे में लगाए जाने वाले कर्मी और अधिकारी आपस में संपर्क में रहेंगे, क्योंकि कई बार आपस में संपर्क न होने से सब लोग एक ही तेंदुए को कई बार गिन लेते हैं।
लद्दाख वन्यजीव विभाग के क्षेत्रीय वार्डन जिगमेत तकपा ने इसकी जानकारी दी। बताया कि वन्यजीव विभाग और देहरादून के भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ मिलकर यह सर्वे शुरू किया है। इसमें 20
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कर्मचारी हमारे हैं। इसके अलावा वन्यजीव संस्थान की तकनीकी टीम है। लद्दाख उच्च क्षेत्रों पर 100 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। जो हिम तेंदुओं की हर एक गतिविधि को कैद कर लेंगे।
इसके अलावा सर्वेक्षण करने वाले कर्मी आपस में जीपीएस की मदद से कनेक्ट रहेंगे। इससे उन्हें एक-दूसरे से संपर्क करने में मदद मिलेगी और वे सही तरह से इनकी संख्या को परख सकेंगे। कई बार एक ही तेंदुए को सभी कर्मी बारी-बारी से देख लेते हैं। इस वजह से सही आंकड़ा नहीं पता चल पाता। जीपीएस से पता चल जाएगा कि किस लोकेशन पर खड़े होकर तेंदुआ देखा गया।
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जीपीएस के माध्यम से सर्वे में लगाए जाने वाले कर्मी और अधिकारी आपस में संपर्क में रहेंगे, क्योंकि कई बार आपस में संपर्क न होने से सब लोग एक ही तेंदुए को कई बार गिन लेते हैं।
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लद्दाख वन्यजीव विभाग के क्षेत्रीय वार्डन जिगमेत तकपा ने इसकी जानकारी दी। बताया कि वन्यजीव विभाग और देहरादून के भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ मिलकर यह सर्वे शुरू किया है। इसमें 20
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कर्मचारी हमारे हैं। इसके अलावा वन्यजीव संस्थान की तकनीकी टीम है। लद्दाख उच्च क्षेत्रों पर 100 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। जो हिम तेंदुओं की हर एक गतिविधि को कैद कर लेंगे।
इसके अलावा सर्वेक्षण करने वाले कर्मी आपस में जीपीएस की मदद से कनेक्ट रहेंगे। इससे उन्हें एक-दूसरे से संपर्क करने में मदद मिलेगी और वे सही तरह से इनकी संख्या को परख सकेंगे। कई बार एक ही तेंदुए को सभी कर्मी बारी-बारी से देख लेते हैं। इस वजह से सही आंकड़ा नहीं पता चल पाता। जीपीएस से पता चल जाएगा कि किस लोकेशन पर खड़े होकर तेंदुआ देखा गया।
देश में सबसे ज्यादा लद्दाख में हिम तेंदुए
snow leopard
- फोटो : FILE PHOTO
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, जम्मू कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश में हिम तेंदुए मौजूद हैं। देश में इन पांचों जगहों पर इनकी संख्या 600 के करीब है।
सबसे ज्यादा लद्दाख में 400 के करीब संख्या है। विश्व में 12 देशों में हिम तेंदुए मौजूद हैं। विश्व में तेंदुओं की संख्या 5020 से 7500 के बीच है। अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, भारत, चीन, पाकिस्तान, रूस, मंगोलिया, म्यांमार, तजाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उजबेकिस्तान में तेंदुए हैं।
चीन में 2000 से 2500
अफगानिस्तान में 100 से 200
भूटान में 100 से 200
भारत में 200 से 600
कजाकिस्तान में 180 से 200
किर्गिस्तान में 800 से 1400
मंगोलिया में 500 से 1000
नेपाल में 350 से 420
पाकिस्तान में 250 से 420
रूस में 50 से 120
तजाकिस्तान में 120 से 300
उजबेकिस्तान में 10 से 50
म्यांमार का आंकड़ा नहीं
सबसे ज्यादा लद्दाख में 400 के करीब संख्या है। विश्व में 12 देशों में हिम तेंदुए मौजूद हैं। विश्व में तेंदुओं की संख्या 5020 से 7500 के बीच है। अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, भारत, चीन, पाकिस्तान, रूस, मंगोलिया, म्यांमार, तजाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उजबेकिस्तान में तेंदुए हैं।
चीन में 2000 से 2500
अफगानिस्तान में 100 से 200
भूटान में 100 से 200
भारत में 200 से 600
कजाकिस्तान में 180 से 200
किर्गिस्तान में 800 से 1400
मंगोलिया में 500 से 1000
नेपाल में 350 से 420
पाकिस्तान में 250 से 420
रूस में 50 से 120
तजाकिस्तान में 120 से 300
उजबेकिस्तान में 10 से 50
म्यांमार का आंकड़ा नहीं