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Jammu News: रोजी रोटी के लिए दांव पर लगा दी जान, बिना सुरक्षा कवच के फायर फाइटर बने कर्मी
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तरसेम, गोपाल और कृपाल की थी नाइट शिफ्ट, सूचना मिली तो आग बुझाने के लिए दौड़े चले आए
जम्मू। पेंसिल फैक्ट्री में भीषण आग ने सिर्फ मशीनों और यूनिटों को नहीं जलाया, बल्कि उन सपनों को भी राख किया जिससे हजारों परिवारों की रोजी रोटी जुड़ी थी। घटना के बीच कुछ ऐसे चेहरे सामने आए, जिन्होंने डर को पीछे छोड़कर इंसानियत और अपनेपन की मिसाल पेश की।
तरसेम लाल, गोपाल मुखिया और कृपाल चंद सहित अन्य कर्मचारी थे, जिन्होंने जान की परवाह किए बिना खुद फायर फाइटर बन गए। फायर एग्जॉस्ट सिस्टम तो कोई पानी की बाल्टी भरकर आगे बुझाने की कोशिश में लग गया।
कुछ कर्मचारियों की तो नाइट शिफ्ट थी। घर में सो रहे थे, जैसे ही आग लगने की सूचना मिली तो बिना कुछ सोचे घर से निकल पड़े और आग बुझाने में पूरी ताकत झोंक दी। कोई गोदाम में पड़े पेंसिल के बड़े-बड़े कार्टन बाहर निकालने में जुट गया तो कोई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के सामने बनी टीन शेड की दीवार को तोड़ने में लग गया। हर कोई किसी न किसी तरह से मदद करने में लग गया।
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कर्मचारी तरसेम लाल पेंसिल पर स्टैंपिंग करते हैैं। उनकी रात की शिफ्ट छह बजे शुरू होनी थी। कमरे में खाना तैयार कर रहे थे तभी सहकर्मियों ने फोन पर आग की जानकारी दी। इसी तरह गोपाल मुखिया भी खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने कहा कि आग की लपटें देख कर डर तो बहुत लग रहा था, लेकिन मदद से खुद को रोक नहीं पाया। मशीन ऑपरेटर कृपाल चंद ने बताया कि जब घटना हुई तो वह काम कर रहे थे। देखते ही देखते आग फैलती गई। आग ने हमारे सपनों को जला दिया। यहां काम करके परिवार का पालन पोषण और बच्चों की पढ़ाई हो रही थी। अब कब फैक्टरी में काम शुरू होगा, किसी को कुछ पता नहीं है।
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जम्मू। पेंसिल फैक्ट्री में भीषण आग ने सिर्फ मशीनों और यूनिटों को नहीं जलाया, बल्कि उन सपनों को भी राख किया जिससे हजारों परिवारों की रोजी रोटी जुड़ी थी। घटना के बीच कुछ ऐसे चेहरे सामने आए, जिन्होंने डर को पीछे छोड़कर इंसानियत और अपनेपन की मिसाल पेश की।
तरसेम लाल, गोपाल मुखिया और कृपाल चंद सहित अन्य कर्मचारी थे, जिन्होंने जान की परवाह किए बिना खुद फायर फाइटर बन गए। फायर एग्जॉस्ट सिस्टम तो कोई पानी की बाल्टी भरकर आगे बुझाने की कोशिश में लग गया।
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कुछ कर्मचारियों की तो नाइट शिफ्ट थी। घर में सो रहे थे, जैसे ही आग लगने की सूचना मिली तो बिना कुछ सोचे घर से निकल पड़े और आग बुझाने में पूरी ताकत झोंक दी। कोई गोदाम में पड़े पेंसिल के बड़े-बड़े कार्टन बाहर निकालने में जुट गया तो कोई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के सामने बनी टीन शेड की दीवार को तोड़ने में लग गया। हर कोई किसी न किसी तरह से मदद करने में लग गया।
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कर्मचारी तरसेम लाल पेंसिल पर स्टैंपिंग करते हैैं। उनकी रात की शिफ्ट छह बजे शुरू होनी थी। कमरे में खाना तैयार कर रहे थे तभी सहकर्मियों ने फोन पर आग की जानकारी दी। इसी तरह गोपाल मुखिया भी खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने कहा कि आग की लपटें देख कर डर तो बहुत लग रहा था, लेकिन मदद से खुद को रोक नहीं पाया। मशीन ऑपरेटर कृपाल चंद ने बताया कि जब घटना हुई तो वह काम कर रहे थे। देखते ही देखते आग फैलती गई। आग ने हमारे सपनों को जला दिया। यहां काम करके परिवार का पालन पोषण और बच्चों की पढ़ाई हो रही थी। अब कब फैक्टरी में काम शुरू होगा, किसी को कुछ पता नहीं है।