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बेटे की वापसी के लिए पिता हर माह पत्र लिखकर भेजते थे पाकिस्तान
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डोडा। पाकिस्तान की कोट लखपत जेल से सोमवार 19 अप्रैल को रिहा हुए डोडा निवासी धर्म सिंह के परिजन उनसे मिलने को बेकरार हैं। भाई के स्वागत के लिए भाई-बहनें और मां बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। उन्होंने पंजाब में मौजूद बीएसएफ अधिकारियों से जल्द घर भेजने की अपील की है। वहीं पिता हर माह बेटे की वापसी के लिए पाकिस्तान पत्र भेजते रहते थे। हालांकि, पिछले साल उनका देहांत हो गया है।
धर्म सिंह के भाई दीवान सिंह ने बताया कि पिता हाकम सिंह पूर्व सैनिक थे। वह धर्म सिंह के लापता होने के बाद दिन-रात आंसू बहाते रहते थे। उनका पिछले साल देहांत हो गया है। अगर वह जिंदा होते तो काफी खुशी होती। हम तो उम्मीद छोड़ बैठे थे, लेकिन 2007 में मानवाधिकार कार्यकर्ता एमके पाल का गुजरात से पत्र मिला, जिसके माध्यम से भाई धर्म सिंह के लाहौर की कोट लखपत जेल में कैद होने की जानकारी मिली है। इसके बाद उनसे बात करने के प्रयास जारी रहे। इसी उम्मीद में पिता हर माह एक पत्र बेटे के नाम पाकिस्तान भेजते थे। हम यह नहीं जानते की भाई भद्रवाह से पाकिस्तान कैसे पहुंचा, लेकिन उसकी रिहाई से काफी खुशी मिली है। अब बस उसके आने का इंतजार है। 19 अप्रैल को धर्म सिंह के पाकिस्तान की कोट लखपत जेल से छूटने की खबर मिलते ही पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। दीवान सिंह ने बताया कि हम मूलत: डोडा की गुंदना तहसील के अबली मासरी गांव के निवासी हैं। 1991 में पिता भ्रदवाह में बस गए थे। 2003 में बड़ा भाई भद्रवाह कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के दौरान लापता हो गया। उस समय मैं 14 साल का था। इस सदमे से पूरा परिवार टूट चुका था।
जम्मू आकर करना चाहते हैं स्वागत
धर्म सिंह के परिवार में इस समय छोटा भाई दीवान सिंह, माता रेखा देवी, बहन कौशल्या देवी, अनुराधा और छोटा भाई चंद्र देव हैं, सभी उनके लौटने का इंतजार कर रहे हैं। दीवान सिंह का कहना है कि धर्मसिंह के घर आने की जानकारी नहीं मिल रही है। प्रशासन और बीएसएफ से अपील की भाई को जल्द भेजा जाए ताकि जम्मू आकर उनका स्वागत कर सकें।
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धर्म सिंह के भाई दीवान सिंह ने बताया कि पिता हाकम सिंह पूर्व सैनिक थे। वह धर्म सिंह के लापता होने के बाद दिन-रात आंसू बहाते रहते थे। उनका पिछले साल देहांत हो गया है। अगर वह जिंदा होते तो काफी खुशी होती। हम तो उम्मीद छोड़ बैठे थे, लेकिन 2007 में मानवाधिकार कार्यकर्ता एमके पाल का गुजरात से पत्र मिला, जिसके माध्यम से भाई धर्म सिंह के लाहौर की कोट लखपत जेल में कैद होने की जानकारी मिली है। इसके बाद उनसे बात करने के प्रयास जारी रहे। इसी उम्मीद में पिता हर माह एक पत्र बेटे के नाम पाकिस्तान भेजते थे। हम यह नहीं जानते की भाई भद्रवाह से पाकिस्तान कैसे पहुंचा, लेकिन उसकी रिहाई से काफी खुशी मिली है। अब बस उसके आने का इंतजार है। 19 अप्रैल को धर्म सिंह के पाकिस्तान की कोट लखपत जेल से छूटने की खबर मिलते ही पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। दीवान सिंह ने बताया कि हम मूलत: डोडा की गुंदना तहसील के अबली मासरी गांव के निवासी हैं। 1991 में पिता भ्रदवाह में बस गए थे। 2003 में बड़ा भाई भद्रवाह कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के दौरान लापता हो गया। उस समय मैं 14 साल का था। इस सदमे से पूरा परिवार टूट चुका था।
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जम्मू आकर करना चाहते हैं स्वागत
धर्म सिंह के परिवार में इस समय छोटा भाई दीवान सिंह, माता रेखा देवी, बहन कौशल्या देवी, अनुराधा और छोटा भाई चंद्र देव हैं, सभी उनके लौटने का इंतजार कर रहे हैं। दीवान सिंह का कहना है कि धर्मसिंह के घर आने की जानकारी नहीं मिल रही है। प्रशासन और बीएसएफ से अपील की भाई को जल्द भेजा जाए ताकि जम्मू आकर उनका स्वागत कर सकें।
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