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मवेशियों के लिए चारा बन रही बारिश से बर्बाद फसल

Tue, 14 Apr 2015 01:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ Updated Tue, 14 Apr 2015 01:40 AM IST
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Farmer crop is using as fodder for animals

बैसाखी पर्व पर अमूमन किसानों के चेहरों पर खुशी झलकती है, लेकिन इस बार अन्नदाता की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह रहा है।

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बेमौसम बारिश ने रबी सीजन के लिए की गई उनकी मेहनत को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। हालत यह है कि जो थोड़ी-बहुत फसल बची है, उसे समेटने के बाद बाकी बर्बाद फसल मवेशियों के लिए चारा बन गई है।

इस फसल को काटने वाले किसानों की आंखों से आंसुओं की झड़ी रुकने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को जब अमर उजाला टीम किसानों के खेतों पर पहुंची, तो हर किसान की आंखों में यही दर्द देखने को मिला।
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देश के अन्य हिस्सों की तरह ही कठुआ जिले के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में भी मौसम ने कहर ढाया है। रबी सीजन की कटाई के समय खेत-खलिहान किसानों की हंसी-ठहाकों से गूंजते रहते थे।
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बैसाखी का पर्व किसानों की इस खुशी का चरमोत्कर्ष होता था, लेकिन इस बार खेत में फसल काट रहे किसानों के चेहरे मायूस हैं, जबकि खलिहानों में सन्नाटा पसरा हुआ है।

शहर से सटे कृषि इलाके में जब अमर उजाला ने दौरा किया तो कोई किसान खेत की फसल को देखकर दुखी था तो कोई बर्बाद फसल को मवेशियों के चारे के लिए काट रहा था।

पूछने भर की देरी थी कि किसानों का दर्द जुबां पर आ गया। फसल काट रहे किसान रमेश लाल ने बताया कि मौसम ने इस बार पूरा रबी सीजन ही चौपट कर दिया है। फसल के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की थी।

शुरुआत में अच्छी फसल की उम्मीद भी बंधी, लेकिन फरवरी अंत से शुरू हुआ बारिश का दौर अप्रैल तक कहर ढाता रहा। खेतों में अत्यधिक पानी जमा हो गया, जिसने फसलों के लिए जहर जैसा काम किया।

उन्होंने कहा कि समझ में नहीं आ रहा है बची-खुची फसल से सालभर तक अपने परिवार का कैसे पेट भरेंगे, क्योंकि ज्यादातर उपज तो मवेशियों के लिए चारा बन गई है।

पास के एक अन्य खेत में गेहूं की कटाई कर रहे अन्य किसान ने कहा कि फसल अभी पूरी तरह पकी नहीं है। लेकिन, अनाज की पैदावार चूंकि नहीं के बराबर है, इसलिए वे अधपकी फसल की मवेशियों को खिलाने के लिए काट रहे हैं।
 
शहर से सटे निचले मैदानी इलाकों में ज्यादातर किसानों के सामने भी ऐसी ही स्थिति है। पूरी तरह से बर्बाद फसल को किसान पहले से ही काट कर मवेशियों के चारे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।


कटाई का सीजन आने पर यह क्रम तेज हो गया है। कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कठुआ जिले की 62 हजार हेक्टेयर भूमि पर रबी की फसलें उगाई गई थीं, जो बड़े पैमाने पर बर्बाद हो चुकी हैं।

कई इलाकों में किसानों के सामने अनाज की पैदावार की संकट है, इसलिए वे फसल को मवेशियों के चारे के लिए काटने को मजबूर हैं।

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