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पाकिस्तानी गीदड़ भभकी से बेपरवाह गांवों में डटे हैं बार्डर के लोग, आईबी-एलओसी पर तनाव
Thu, 28 Feb 2019 03:03 AM IST
Priyesh Mishra
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
Published by: Priyesh Mishra
Updated Thu, 28 Feb 2019 03:03 AM IST
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भारत-पाकिस्तान के बीच तनातनी से आईबी व एलओसी पर जबर्दस्त तनाव है। सीमा से लगते आठ जिलों के लगभग 600 गांवों की आठ लाख से अधिक आबादी पाकिस्तान की गीदड़ भभकी से बेपरवाह गांवों में डटी हुई है। सीमावर्ती ग्रामीणों में तनाव भरी दहशत जरूर है, लेकिन पाकिस्तान को सबक सिखाने की प्रबल इच्छाशक्ति भी।
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जम्मू, कठुआ व सांबा जिले में 354 गांव जीरो लाइन (पांच किमी के दायरे में) पर हैं। यहां रहने वालों की आबादी लगभग साढ़े तीन लाख है।
कठुआ में हीरानगर, सांबा में रामगढ़ व सांबा, जम्मू में आरएस पुरा, अरनिया सेक्टर के गांवों में रोजाना की तरह की लोग कामकाज में जुटे रहे। खेती-किसानी के साथ ही दूध कारोबारी भी अपने काम में जुटे रहे। जम्मू जिले के पलांवाला इलाके में एलओसी और आईबी से लगे 44 गांव हैं। गोलाबारी के समय यह काफी संवेदनशील रहते हैं। छंब का इलाका भी यहीं हैं। खौड़, परगवाल तथा खड़ाह बली तहसील के इन गांवों में लगभग 62 हजार लोगों के लिए प्रशासन ने विस्थापन प्लान बना लिया है, लेकिन सब लोग अभी गांवों में ही डटे हुए हैं।
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एलओसी पर राजोरी, पुंछ, कुपवाड़ा, बारामुला व बांदीपोरा में लगभग पांच लाख आबादी ने सुरक्षित स्थानों की ओर रुख नहीं किया हैं। पुंछ जिले में एलओसी के करीब 48 गांव हैं जहां लगभग 50 हजार लोग रहते हैं। हालांकि, राजोरी, पुंछ तथा बारामुला में पाकिस्तान की ओर से दो दिनों से भारी गोलाबारी की जा रही है। रिहायशी इलाकों को भी निशाना बनाया गया है। इन सब स्थितियों के बाद भी उन्हें विश्वास है कि विस्थापन की नौबत नहीं आने पाएगी। यह जरूर है कि लोगों ने रोजमर्रा की जरूरत केसामान को जुटाना शुरू कर दिया है।
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अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जम्मू, कठुआ व सांबा जिले में 354 गांव जीरो लाइन (पांच किमी के दायरे में) पर हैं। यहां रहने वालों की आबादी लगभग साढ़े तीन लाख है।
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कठुआ में हीरानगर, सांबा में रामगढ़ व सांबा, जम्मू में आरएस पुरा, अरनिया सेक्टर के गांवों में रोजाना की तरह की लोग कामकाज में जुटे रहे। खेती-किसानी के साथ ही दूध कारोबारी भी अपने काम में जुटे रहे। जम्मू जिले के पलांवाला इलाके में एलओसी और आईबी से लगे 44 गांव हैं। गोलाबारी के समय यह काफी संवेदनशील रहते हैं। छंब का इलाका भी यहीं हैं। खौड़, परगवाल तथा खड़ाह बली तहसील के इन गांवों में लगभग 62 हजार लोगों के लिए प्रशासन ने विस्थापन प्लान बना लिया है, लेकिन सब लोग अभी गांवों में ही डटे हुए हैं।
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एलओसी पर राजोरी, पुंछ, कुपवाड़ा, बारामुला व बांदीपोरा में लगभग पांच लाख आबादी ने सुरक्षित स्थानों की ओर रुख नहीं किया हैं। पुंछ जिले में एलओसी के करीब 48 गांव हैं जहां लगभग 50 हजार लोग रहते हैं। हालांकि, राजोरी, पुंछ तथा बारामुला में पाकिस्तान की ओर से दो दिनों से भारी गोलाबारी की जा रही है। रिहायशी इलाकों को भी निशाना बनाया गया है। इन सब स्थितियों के बाद भी उन्हें विश्वास है कि विस्थापन की नौबत नहीं आने पाएगी। यह जरूर है कि लोगों ने रोजमर्रा की जरूरत केसामान को जुटाना शुरू कर दिया है।
आईबी पर बंकरों में सेना ने जमाया डेरा
तनाव केबीच आईबी पर डिच के बाद बने लगभग सभी बंकरों पर सेना ने कब्जा जमा लिया है। सुरक्षा ग्रिड तगड़ा कर लिया गया है। बार्डर पर तो बीएसएफ ने मोर्चा संभाल रखा है, लेकिन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सेना को भी सतर्क रखा गया है।
पाक को सिखाए सबक
तनाव जरूर है, लेकिन हम बार्डर पर रहने वाले ग्रामीण बिल्कुल भी भयभीत नहीं हैं। अब भी गांव में डटे हुए हैं। हम चाहते हैं कि सरकार बार्डर केलोगों की फिक्र न करे। पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाए। 1971 की तरह सबक सिखाना जरूरी है ताकि वह प्राक्सी वार करना भूल जाए। उसे उसके घर में ही घुसकर जवाब देने का वक्त आ गया है। इसमें किसी भी तरह की देरी न की जाए। - भारत भूषण शर्मा, अध्यक्ष-बार्डर वेलफेयर कमेटी
पाक को सिखाए सबक
तनाव जरूर है, लेकिन हम बार्डर पर रहने वाले ग्रामीण बिल्कुल भी भयभीत नहीं हैं। अब भी गांव में डटे हुए हैं। हम चाहते हैं कि सरकार बार्डर केलोगों की फिक्र न करे। पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाए। 1971 की तरह सबक सिखाना जरूरी है ताकि वह प्राक्सी वार करना भूल जाए। उसे उसके घर में ही घुसकर जवाब देने का वक्त आ गया है। इसमें किसी भी तरह की देरी न की जाए। - भारत भूषण शर्मा, अध्यक्ष-बार्डर वेलफेयर कमेटी