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Jammu News: रास्ते पर छह लोगों का कब्जा, पुरानी निशानदेही में एक-एक मरले का हिसाब

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Encroachment on path
लोगों ने बताई सच्चाई, एक कब्जाधारी जमीन छोड़ने के लिए भी तैयार
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बोले- विभाग के अधिकारी आएं तो सही, हम छोड़ देंगे जमीन
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। सुचेतगढ़ तहसील के गांव शेर-ए-चक की हद पटवारी नहीं खोज पाए। लेकिन, अतिक्रमण वाले रास्ते को लेकर राजस्व विभाग ने 2016 में जो निशानदेही की थी, उसके मुताबिक छह लोगों ने रास्ते पर कब्जा किया है। उस रिपोर्ट में खसरा नंबर 47 पर 13 मरले, खसरा नंबर 48 पर 17 मरले, खसरा नंबर 49 पर 4 मरले, खसरा नंबर 51 पर 15 मरले, खसरा नंबर 68 पर 4 मरले और खसरा नंबर 69 पर 7 मरले जमीन पर कब्जा है। इस जमीन की मालिक सरकार है और इस पर राजस्व विभाग का अधिकार है।
उस समय की हदबंदी के मुताबिक यह रास्ता गांव शेर-एचक के अंतर्गत आता है। हालांकि, उस समय की निशानदेही के मुताबिक अरनिया जाती सड़क के साथ इस रास्ते का मिलाप था, और 100 मीटर तक यह रास्ता बनाया भी गया है। लेकिन, उसके आगे रास्ते पर अतिक्रमण हो गया था। वहीं, दूसरी ओर उस समय की गई निशानदेही के मुताबिक अभी भी वहां निशानी हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि रास्ते की निशानदेही के बाद दोबारा से अतिक्रमण कर लिया गया था, जिसको लेकर निरंतर राजस्व विभाग को बताया गया। लेकिन, उस पर कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हो सकी है।
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ग्रामीण मनोहर लाल ने बताया कि अरनिया जाने के लिए गांव के लोग इस रास्ते का प्रयोग करते थे, और जानवरों को चराने के लिए भी इसी रास्ते से गुजरते थे। समय गुजरता गया और रास्ते पर अतिक्रमण होता गया। लगभग 20 साल पहले यह रास्ता लोगों को काफी सुविधा देता था। रूपचंद ने कहा कि दोनों तहसीलों के प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में 2016 में निशानदेही की गई थी, और प्रत्येक खसरा नंबर पर कब्जे की रिपोर्ट तैयार की गई थी। उसके बावजूद राजस्व विभाग रास्ते को बहाल नहीं कर पा रहा है। विभाग को रिकॉर्ड के मुताबिक काम करना चाहिए।
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स्थानीय बलराज सिंह ने बताया कि उनके पास भी इस रास्ते पर 7 मरले कब्जा है, और उन्हें रास्ते की बहाली के लिए इसे छोड़ने में कोई आपत्ति नहीं है। पहले की गई निशानदेही के मुताबिक उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को उनका कब्जा हटाने के लिए कह दिया था, और रास्ते को बहाल करने के लिए गुहार लगाई थी। परंतु, मालूम नहीं होता कि आगे से रास्ता क्यों नहीं बहाल करवाया जा रहा। दर्शन लाल ने बताया कि हर जगह सरकार अपनी जमीन वापस ले रही है, परंतु 7 साल से लोग एक रास्ते को लेकर प्रशासन के पास जा जाकर थक गए। जिसकी निशानदेही भी हो चुकी है, वही रास्ता प्रशासन बहाल नहीं करा रहा है।

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पटवारी को हदबंदी में नहीं दिखा रास्ता
सुचेतगढ़ तहसील के पटवारी मोहम्मद यूनिस ने 2 दिन पहले रास्ते की हदबंदी के लिए पैमाइश की थी, परंतु उन्होंने रास्ते को लेकर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। उन्होंने बताया कि 30 से 35 फुट का फर्क रास्ते में आ रहा है, और सुचेतगढ़ तहसील की हदबंदी में रास्ता नहीं दिख रहा है। लेकिन, कुछ खसरा नंबर पर जमीन सरकारी है। उन्होंने बताया कि दोनों तहसील के आला अधिकारियों की निगरानी में ही इसकी निशानदेही होना संभव है। कमीशन बनाने के बाद ही अतिक्रमण वाले रास्ते पर फैसला किया जाएगा।
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