{"_id":"69c05b50a4855dd29d0bd761","slug":"education-news-jammu-news-c-10-lko1027-866046-2026-03-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: जम्मूयित के बाद सिलेबस में जिन्ना विवाद पर पर भी यूनिवर्सिटी ने फैसला बदला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: जम्मूयित के बाद सिलेबस में जिन्ना विवाद पर पर भी यूनिवर्सिटी ने फैसला बदला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
-पॉलिटिकल साइंस विभाग ने विवादित विचारकों को सिलेबस से हटाने की सिफारिश की
- जम्मूयित शब्द पर बवाल के बाद भी बदला था फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू यूनिवर्सिटी ने मोहम्मद अली जिन्ना को सिलेबस में शामिल करने पर चल रहे विवाद का रास्ता निकाल लिया है। पॉलिटिकल साइंस विभाग ने जिन्ना समेत कुछ विचारकों को सिलेबस से हटाने की सिफारिश की है। इससे पहले जम्मूयित शब्द को लेकर हुए विवाद में भी यूनिवर्सिटी को अपना फैसला बदलना पड़ा था।
यूनिवर्सिटी में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम में जम्मूयित शब्द शामिल किए जाने पर शहर में विरोध शुरू हो गया था। एबीवीपी और अन्य संगठनों ने इसे जम्मू की पहचान और भावनाओं से जोड़ते हुए आपत्ति जताई थी। विरोध के बाद यूनिवर्सिटी ने कार्यक्रम से पहले ही उसका नाम बदल दिया था। नाम बदलने के बाद मामला शांत हो गया और कार्यक्रम बिना किसी रुकावट के आयोजित हुआ। वीरवार को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद सिलेबस में मोहम्मद अली जिन्ना और अल्लामा इकबाल से जुड़े हिस्सों को शामिल किए जाने पर विवाद शुरू हो गया था। शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद समेत अन्य छात्र संगठनों ने इसे लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया। एबीवीपी का तर्क था कि किसी भी विचारक को सिलेबस में शामिल करते समय स्थानीय सेंटीमेंट और संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाना चाहिए।
मामला गरमाने पर शुक्रवार को ही यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर नरेश पाधा की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी। इसके बाद सोमवार को यूनिवर्सिटी खुलने से पहले रविवार को पॉलिटिकल साइंस विभाग ने बैठक कर जिन्ना, सर सैयद अहमद खान और अल्लामा इकबाल से जुड़े कुछ हिस्सों को सिलेबस से हटाने की सिफारिश बोर्ड ऑफ स्टडीज को भेज दी। अब इस पर अंतिम फैसला बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अश्विनी कुमार पूरे मामले पर कहते हैं कि जिन्ना जैसे किसी भी विवादित विचारक को सिलेबस में शामिल करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श होना बहुत जरूरी है। ऐसे मामलों में स्थानीय संवेदनशीलता को समझना भी जरूरी है, ताकि अनावश्यक विवाद से बचा जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
- जम्मूयित शब्द पर बवाल के बाद भी बदला था फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू यूनिवर्सिटी ने मोहम्मद अली जिन्ना को सिलेबस में शामिल करने पर चल रहे विवाद का रास्ता निकाल लिया है। पॉलिटिकल साइंस विभाग ने जिन्ना समेत कुछ विचारकों को सिलेबस से हटाने की सिफारिश की है। इससे पहले जम्मूयित शब्द को लेकर हुए विवाद में भी यूनिवर्सिटी को अपना फैसला बदलना पड़ा था।
यूनिवर्सिटी में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम में जम्मूयित शब्द शामिल किए जाने पर शहर में विरोध शुरू हो गया था। एबीवीपी और अन्य संगठनों ने इसे जम्मू की पहचान और भावनाओं से जोड़ते हुए आपत्ति जताई थी। विरोध के बाद यूनिवर्सिटी ने कार्यक्रम से पहले ही उसका नाम बदल दिया था। नाम बदलने के बाद मामला शांत हो गया और कार्यक्रम बिना किसी रुकावट के आयोजित हुआ। वीरवार को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद सिलेबस में मोहम्मद अली जिन्ना और अल्लामा इकबाल से जुड़े हिस्सों को शामिल किए जाने पर विवाद शुरू हो गया था। शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद समेत अन्य छात्र संगठनों ने इसे लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया। एबीवीपी का तर्क था कि किसी भी विचारक को सिलेबस में शामिल करते समय स्थानीय सेंटीमेंट और संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाना चाहिए।
विज्ञापन
मामला गरमाने पर शुक्रवार को ही यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर नरेश पाधा की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी। इसके बाद सोमवार को यूनिवर्सिटी खुलने से पहले रविवार को पॉलिटिकल साइंस विभाग ने बैठक कर जिन्ना, सर सैयद अहमद खान और अल्लामा इकबाल से जुड़े कुछ हिस्सों को सिलेबस से हटाने की सिफारिश बोर्ड ऑफ स्टडीज को भेज दी। अब इस पर अंतिम फैसला बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अश्विनी कुमार पूरे मामले पर कहते हैं कि जिन्ना जैसे किसी भी विवादित विचारक को सिलेबस में शामिल करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श होना बहुत जरूरी है। ऐसे मामलों में स्थानीय संवेदनशीलता को समझना भी जरूरी है, ताकि अनावश्यक विवाद से बचा जा सके।
विज्ञापन