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Jammu News: उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए विश्वविद्यालयों को गुण विकसित करने होंगे
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डिजाइन योर डिग्री कार्यक्रम से विश्व के विश्वविद्यालय से जुड़ना चाहते हैं : प्रो. दिनेश
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छात्रों को आकर्षित करने के लिए हमारे विश्वविद्यालयों को गुण विकसित करने होंगे। आजादी के कई साल बाद भी हमारे विश्वविद्यालय विदेशी छात्रों को आकर्षित नहीं कर पाए हैं, लेकिन नालंदा विश्वविद्यालय कैसे विदेशी छात्रों को आकर्षित करता था। इसका कारण था, वह विश्वविद्यालय समाज की आवश्यकताओं व चुनौतियों के साथ पूर्ण रूप से जुड़ा हुआ था। ये बातें एनईपी के कार्यान्वयन व उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण पर आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने कही।
कार्यशाला में जम्मू-कश्मीर उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष प्रो. दिनेश सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण के शैक्षणिक संस्थानों में गंभीरता से काम करना होगा। अगर भारत को लंबे दौर के लिए ज्ञान की अर्थव्यवस्था बनाना है तो शिक्षा संस्थाओं को जागना होगा। एनईपी में कही हर बात को उच्च शिक्षा के कुलपति पहले से जानते थे, जिसे बिना नीति के लागू कर सकते थे, लेकिन हम उसमें चूक गए। अगर अब इस नीति का उचित कार्यान्वयन करेंगे तो नतीजे मिलेंगे। एनईपी हमें आजादी देती है। हमें समाज की आवश्यकता और चुनौतियों को व्यवहारिकता को ज्ञान से जोड़ते हुए कार्यक्रम शुरू करने की जरूरत है, जिसमें हमें दिल्ली विवि में उपयोग कर चुके हैं। प्रो. सिंह ने कहा कि हमने डिजाइन योर डिग्री कार्यक्रम शुरू किया, आज विश्व के विश्वविद्यालय इससे जुड़ना और सीखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर संभाग से कोई भी उच्च शिक्षा संस्थान इस कार्यक्रम से जुड़ने के लिए आगे नहीं आ रहे। विश्व हमें स्वीकार कर रहा है, लेकिन हम दूरी बनाए हुए हैं। पूर्व राजदूत अशोक कुमार कंठ ने कहा कि 1970 के दशक में जब पटना विवि में नेपाल से बड़ी संख्या में छात्रपढ़ने आते थे, लेकिन अब ये छात्र खाड़ी व पश्चमी देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हमारे विद्यार्थी से विदेशों में पढ़ने जा रहे है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छात्रों को आकर्षित करने के लिए हमारे विश्वविद्यालयों को गुण विकसित करने होंगे। आजादी के कई साल बाद भी हमारे विश्वविद्यालय विदेशी छात्रों को आकर्षित नहीं कर पाए हैं, लेकिन नालंदा विश्वविद्यालय कैसे विदेशी छात्रों को आकर्षित करता था। इसका कारण था, वह विश्वविद्यालय समाज की आवश्यकताओं व चुनौतियों के साथ पूर्ण रूप से जुड़ा हुआ था। ये बातें एनईपी के कार्यान्वयन व उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण पर आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने कही।
कार्यशाला में जम्मू-कश्मीर उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष प्रो. दिनेश सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण के शैक्षणिक संस्थानों में गंभीरता से काम करना होगा। अगर भारत को लंबे दौर के लिए ज्ञान की अर्थव्यवस्था बनाना है तो शिक्षा संस्थाओं को जागना होगा। एनईपी में कही हर बात को उच्च शिक्षा के कुलपति पहले से जानते थे, जिसे बिना नीति के लागू कर सकते थे, लेकिन हम उसमें चूक गए। अगर अब इस नीति का उचित कार्यान्वयन करेंगे तो नतीजे मिलेंगे। एनईपी हमें आजादी देती है। हमें समाज की आवश्यकता और चुनौतियों को व्यवहारिकता को ज्ञान से जोड़ते हुए कार्यक्रम शुरू करने की जरूरत है, जिसमें हमें दिल्ली विवि में उपयोग कर चुके हैं। प्रो. सिंह ने कहा कि हमने डिजाइन योर डिग्री कार्यक्रम शुरू किया, आज विश्व के विश्वविद्यालय इससे जुड़ना और सीखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर संभाग से कोई भी उच्च शिक्षा संस्थान इस कार्यक्रम से जुड़ने के लिए आगे नहीं आ रहे। विश्व हमें स्वीकार कर रहा है, लेकिन हम दूरी बनाए हुए हैं। पूर्व राजदूत अशोक कुमार कंठ ने कहा कि 1970 के दशक में जब पटना विवि में नेपाल से बड़ी संख्या में छात्रपढ़ने आते थे, लेकिन अब ये छात्र खाड़ी व पश्चमी देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हमारे विद्यार्थी से विदेशों में पढ़ने जा रहे है।
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