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Earthquake in J&K: अगस्त में 14 बार हिली धरती, वैज्ञानिक बोले - स्कूलों में कराएं मॉक ड्रिल
Thu, 01 Sep 2022 01:27 PM IST
kumar गुलशन कुमार
मंगेश कुमार, जम्मू
मंगेश कुमार, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Thu, 01 Sep 2022 01:27 PM IST
सार
जम्मू विश्वविद्यालय के भू-वैज्ञानिक डॉ. युद्धबीर सिंह ने कहा कि दूरदराज के इलाकों में आए दिन भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। स्कूलों में महीने में एक बार मॉक ड्रिल की जानी चाहिए।
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भूकंप
- फोटो : iStock
विस्तार
जम्मू-कश्मीर में पिछले एक सप्ताह से लगातार आ रहे भूकंप से मची दहशत के बीच भू वैज्ञानिकों ने स्कूलों में मॉक ड्रिल करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि लोगों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देने और आपदा प्रबंधन से संबंधित पाठ्यक्रम को स्कूलों में लागू करने की जरूरत है। प्रदेश में अगस्त में 14 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। हलांकि इनमें किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है।
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जम्मू विश्वविद्यालय के भू-वैज्ञानिक डॉ. युद्धबीर सिंह ने कहा कि दूरदराज के इलाकों में आए दिन भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। लोगों में डर का माहौल है। स्कूलों में महीने में एक बार मॉक ड्रिल की जानी चाहिए। एक छात्र को प्रशिक्षण देने से उसका पूरा परिवार आपदा प्रबंधन से जागरूक हो जाएगा। इसके अलावा सरकार ने गृह, भवन या अन्य संरचना के निर्माण के लिए जो नीतियां और कानून बनाए हैं, उन्हें सख्ती से लागू करना होगा।
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डॉ. युद्धबीर सिंह का कहना है कि भूकंप में इमारत के गिरने से ज्यादा जानी नुकसान होता है। इससे बचने के लिए जापानी तकनीक पर भवनों का निर्माण किए जाने की व्यवस्था को शुरू करना चाहिए।
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जम्मू-कश्मीर के सात इलाकों में स्थापित किए भूकंप यंत्र
जम्मू-कश्मीर के पुंछ, राजोरी, भद्रवाह, धुरू (अनंतनाग), टंगधार (कुपवाड़ा), रामबन और किश्तवाड़ में 2009 में जम्मू विश्वविद्यालय ने सात स्थानों पर सिस्मोग्राफ यंत्र स्थापित किए हैं।
वर्तमान में डोडा और किश्तवाड़ बना भूकंप का क्लस्टर
डॉ. युद्धबीर सिंह का कहना है कि वर्तमान समय में डोडा और किश्तवाड़ भूकंप का केंद्र बना हुआ है। बीते दस वर्षों में उन्होंने अलग-अलग क्लस्टर से आंकड़े एकत्रित किए हैं। इनमें खुलासा हुआ है कि डोडा और किश्तवाड़ अधिक संवेदनशील जिले हैं। यह दोनों टेक्टॉनिकली सक्रिय हैं।
जापान में भूकंपरोधी तकनीक से बनते हैं मकान
विशेषेज्ञ का कहना है कि आठ अक्तूबर 2005 को पीओजेके में स्थित मुजफ्फराबाद में 7.6 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया था। इसकी वजह से जम्मू-कश्मीर में 2000 लोगों की मौत हो गई थी। 2022 में जापान में 7.4 मैग्नीट्यूड का भूकंप आने से सिर्फ चार लोगों की मौत हुई थी, क्योंकि जापान में सरकारी नियमों के तहत भूकंपरोधी तकनीक से मकानों का निर्माण हुआ है।a