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Earthquake in J&K: भूकंपीय विशेषज्ञ बोले- कम तीव्रता वाले भूकंप से बड़ी दुर्घटना की संभावना होती है कम

Tue, 20 Jun 2023 12:46 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Tue, 20 Jun 2023 12:46 PM IST
सार

जम्मू और कश्मीर में लाखों वर्ग किलोमीटर में फैले किश्तवाड़ और रियासी क्षेत्र में बड़ी टेक्टोनिक प्लेट सक्रिय हैं। भद्रवाह क्षेत्र में बार-बार आने वाले भूकंप इसी का परिणाम हो सकते हैं।

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Earthquake in jammu kashmir: Seismic expert said low intensity earthquake has less chance of major accident
Earthquake: - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के डोडा-किश्तवाड़ क्षेत्र में बीते दिनों लगे भूकंप के झटकों ने भले ही लोगों में दहशत पैदा कर दी है, लेकिन भूकंपीय विशेषज्ञ इसे क्षेत्र के अच्छा मानते हैं। उनका कहना है कि छोटे पैमाने के आने वाले भूकंप वास्तव में बड़ी आपदाओं को रोकने में मदद करते हैं।

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भद्रवाह में पर्वतीय पर्यावरण संस्थान के प्रमुख नीरज शर्मा कहते हैं कि छोटे पैमाने पर भूकंप और इसके बाद आने वाले लगातार झटकों से विवर्तनिक तनाव जारी होता है। इस प्रकार बड़ी आपदाएं आने की आशंका कम हो जाती है।
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नीरज शर्मा ने कहा, जम्मू और कश्मीर में लाखों वर्ग किलोमीटर में फैले किश्तवाड़ और रियासी क्षेत्र में बड़ी टेक्टोनिक प्लेट सक्रिय हैं। भद्रवाह क्षेत्र में बार-बार आने वाले भूकंप इसी का परिणाम हो सकते हैं।
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पर्वतीय पर्यावरण संस्थान के प्रमुख नीरज शर्मा ने रियासी फॉल्ट को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि किश्तवाड़ फॉल्ट के विपरीत, रियासी फॉल्ट में दीर्घकालिक तनाव निर्माण झटकों के रूप में बाहर नहीं निकल रहा। अगर छोटे तनाव 5 या 5.5 की तीव्रता तक हल्के भूकंप के रूप में ऊर्जा विकसित और जारी करते हैं, तो हम सुरक्षित हैं और बड़े भूकंप की संभावना कम हो जाती है। ए

एक सप्ताह में डोडा जिले में 10 बार डोली धरती

13 जून को डोडा जिले में आए भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। पहला झटका 5.4 तीव्रता का था जिसने पूरी चिनाब घाटी को हिलाकर रख दिया था। तब से दस झटके और आफ्टरशॉक्स महसूस किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश भद्रवाह घाटी में या उसके आसपास केंद्रित हैं। इन झटकों के कारण सरकारी भवनों, स्कूलों और आवासीय घरों सहित कई संरचनाओं को नुकसान पहुंचा था।

2013 में भद्रवाह घाटी में दो माह के भीतर लगे थे एक के बाद एक 47 झटके

भद्रवाह के ऊपरी दांडी गांव के मुर्तजा अली खान ने प्रभावित परिवारों की कठिनाइयों को उजागर करते बताया, हम लकड़ी के खंभों के साथ टूटी छतों को सहारा देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। भूकंप से हिले ढांचे में रहना खतरनाक है। हमारे पास कोई दूसरा विकल्प भी तो नहीं है। भले झटके हल्के थे, पर उन्होंने घबराहट पैदा की है। इन झटकों ने 2013 के भूकंप की याद दिला दी है। तब भद्रवाह घाटी में दो महीने के भीतर 47 झटके महसूस किए गए थे।

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क्यों आते हैं भूकंप

भूकंप के आने की मुख्य वजह धरती के अंदर प्लेटों का टकराना है। धरती के भीतर सात प्लेट्स होती हैं जो लगातार घूमती रहती हैं। जब ये प्लेटें किसी जगह पर आपस में टकराती हैं, तो वहां फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है और सतह के कोने मुड़ जाते हैं। सतह के कोने मुड़ने की वजह से वहां दबाव बनता है और प्लेट्स टूटने लगती हैं। इन प्लेट्स के टूटने से अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है, जिसकी वजह से धरती हिलती है और हम इसे भूकंप मानते हैं।

भूकंप की तीव्रता का क्या अर्थ है?

रिक्टर स्केल पर 2.0 से कम तीव्रता वाले भूकंप को माइक्रो कैटेगरी में रखा जाता है और यह भूकंप महसूस नहीं किए जाते। रिक्टर स्केल पर माइक्रो कैटेगरी के 8,000 भूकंप दुनियाभर में रोजाना दर्ज किए जाते हैं। इसी तरह 2.0 से 2.9 तीव्रता वाले भूकंप को माइनर कैटेगरी में रखा जाता है। ऐसे 1,000 भूकंप प्रतिदिन आते हैं इसे भी सामान्य तौर पर हम महसूस नहीं करते। वेरी लाइट कैटेगरी के भूकंप 3.0 से 3.9 तीव्रता वाले होते हैं, जो एक साल में 49,000 बार दर्ज किए जाते हैं। इन्हें महसूस तो किया जाता है लेकिन शायद ही इनसे कोई नुकसान पहुंचता है।

लाइट कैटेगरी के भूकंप 4.0 से 4.9 तीव्रता वाले होते हैं जो पूरी दुनिया में एक साल में करीब 6,200 बार रिक्टर स्केल पर दर्ज किए जाते हैं। इन झटकों को महसूस किया जाता है और इनसे घर के सामान हिलते नजर आते हैं। हालांकि इनसे न के बराबर ही नुकसान होता है।

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