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पुलिस को कुछ और तस्करों के नाम पता चले, कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी
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जम्मू। अरनिया क्षेत्र में 61 किलो हेरोइन और हथियारों की बरामदगी मामले में जांच और तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार सीमा पार से आई नशे की खेप मामले में कुछ और नशा तस्कर पुलिस के रडार पर हैं। पुलिस को इनके नाम भी पता चल चुके हैं। इनकी कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है। यह भी खुलासा हुआ है कि नशा तस्कर अपनी सुरक्षा के लिए हथियार भी साथ ला रहे हैं। बता दें, 19 सितंबर की रात को अरनिया क्षेत्र में बीएसएफ की बुधवार पोस्ट के पास से 61 किलो हेरोइन, एक किलो अफीम, दो पिस्टल, तीन मैगजीन और 100 कारतूस बरामद किए गए थे। अभी तक पुलिस जम्मू-कश्मीर और पंजाब से सात तस्करों को गिरफ्तार कर चुकी है।
जानकारी के अनुसार सीमा पार से दो तरह की तस्करी हो रही है। एक तस्करी नशा तस्कर कर रहे हैं। दूसरी आतंकी संगठन करवा रहे हैं। पंजाब में मौजूद पुराने नशा तस्कर जम्मू के बॉर्डर को इस्तेमाल कर रहे हैं। पंजाब में सख्ती होने के चलते जम्मू के तस्करों के साथ मिलकर रैकेट चला रहे हैं।
जेलों में बंद तस्कर भी चला रहे रैकेट
जांच में यह भी पता चला है कि देश की विभिन्न जेलों में बंद नशा तस्कर अंदर से ही तस्करी का रैकेट चला रहे हैं। रिहा होने वालों के साथ मिलकर ये तस्करी को अंजाम दे रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि अरनिया में पकड़ी गई नशे और हथियारों की खेप को पंजाब भेजा जाना था। हथियार और हेरोइन दोनों ही पंजाब में रहने वाले गुरु प्रताप सिंह को देने थे। पुलिस की जांच यह भी कहती है कि पाकिस्तान में मौजूद नशा तस्कर जम्मू के तस्करों के साथ मिलकर नेटवर्क चला रहे हैं। इसका पैसा आतंकी संगठनों तक भी पहुंचाया जा रहा है।
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करीब 30 साल पहले बॉर्डर पार से बड़े स्तर पर नशे की तस्करी होती थी। अब फिर उसी तरह से तस्कर सक्रिय हो गए हैं। हालांकि पुलिस की ओर से अभी यह नहीं बताया जा रहा कि आतंकियों का इनके साथ कोई कनेक्शन है या नहीं। शनिवार को आईजी मुकेश सिंह ने बताया था कि इन तस्करों का रैकेट भारत, पाकिस्तान और दुबई तक फैला हुआ है। जम्मू-कश्मीर से जुड़ा रैकेट तीन समूहों में काम करता रहा है। एक ग्रुप सीमा पर बताई गई लोकेशन से खेप लेकर जम्मू पहुंचाने का काम करता, दूसरा जम्मू से पंजाब पहुंचाता और तीसरा इसे देश भर में सप्लाई करता।
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जानकारी के अनुसार सीमा पार से दो तरह की तस्करी हो रही है। एक तस्करी नशा तस्कर कर रहे हैं। दूसरी आतंकी संगठन करवा रहे हैं। पंजाब में मौजूद पुराने नशा तस्कर जम्मू के बॉर्डर को इस्तेमाल कर रहे हैं। पंजाब में सख्ती होने के चलते जम्मू के तस्करों के साथ मिलकर रैकेट चला रहे हैं।
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जेलों में बंद तस्कर भी चला रहे रैकेट
जांच में यह भी पता चला है कि देश की विभिन्न जेलों में बंद नशा तस्कर अंदर से ही तस्करी का रैकेट चला रहे हैं। रिहा होने वालों के साथ मिलकर ये तस्करी को अंजाम दे रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि अरनिया में पकड़ी गई नशे और हथियारों की खेप को पंजाब भेजा जाना था। हथियार और हेरोइन दोनों ही पंजाब में रहने वाले गुरु प्रताप सिंह को देने थे। पुलिस की जांच यह भी कहती है कि पाकिस्तान में मौजूद नशा तस्कर जम्मू के तस्करों के साथ मिलकर नेटवर्क चला रहे हैं। इसका पैसा आतंकी संगठनों तक भी पहुंचाया जा रहा है।
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करीब 30 साल पहले बॉर्डर पार से बड़े स्तर पर नशे की तस्करी होती थी। अब फिर उसी तरह से तस्कर सक्रिय हो गए हैं। हालांकि पुलिस की ओर से अभी यह नहीं बताया जा रहा कि आतंकियों का इनके साथ कोई कनेक्शन है या नहीं। शनिवार को आईजी मुकेश सिंह ने बताया था कि इन तस्करों का रैकेट भारत, पाकिस्तान और दुबई तक फैला हुआ है। जम्मू-कश्मीर से जुड़ा रैकेट तीन समूहों में काम करता रहा है। एक ग्रुप सीमा पर बताई गई लोकेशन से खेप लेकर जम्मू पहुंचाने का काम करता, दूसरा जम्मू से पंजाब पहुंचाता और तीसरा इसे देश भर में सप्लाई करता।