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नाट्य उत्सव : धर्म की बेड़ियों में जकड़ी रह जाती है एक अधूरी प्रेम कहानी
Sun, 21 Mar 2021 12:46 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Sun, 21 Mar 2021 12:46 PM IST
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अभिनव थियेटर में आयोजित नाटक
- फोटो : अमर उजाला
समाज में जाति और धर्म के बाहर शादी करना हमेशा टकराव का कारण बनता रहा है। धर्म के बाहर परिवार व समाज की सहमति से शादि करना अभी भी एक सपना है। ऐसी ही एक कहानी वार्षिक नाट्य उत्सव में मंचित नाटक शाह-सहानी में दिखाई गई। अभिनव थियेटर में मंचित नाटक में पाकिस्तान के शाह और जम्मू की सहानी की कहानी है, जो दर्शकों को भावुक कर देती है।
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नाटक में दिखाया की शाह 60 वर्ष के अंतराल के बाद पाकिस्तान से जम्मू आया है, जहां उसने अपनी युवास्था गुजारी है। शाह जम्मू में अपनी पुरानी दोस्त सहानी से मिलने आता है, यहां वे उस दुकान पर जाता है जहां पर वह अकसर जाया करता था। दुकान पर बैठा कस्तूरी उसे आतंकवादी समझता है, लेकिन शाह का शांत व्यवहार से वह अपना विचार बदलता है। इसी दुकान पर उसकी अपनी दोस्त सहानी से मुलाकात होती है।
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दोनों दोस्त एक दूसरे में बारे में जाने की कोशिश करते है। हालांकि दोनो ही एक दूसरे से अपने वैवाहिक जीवन के बारे में झूठ बोलते है। हालांकि दोनों को अन्य लोगों से एक दूसरे की सच्चाई का पता चलता है। दोनों एक दूसरे से प्रेम करते थे, लेकिन धर्म की बेड़ियां उनके प्रेम को परवान नहीं चढ़ने देती हैं।
समाज के डर से दोनों अपने प्रेम का इजहार नहीं कर पाते हैं, इस लिए शादी भी नहीं करते हैं। पाकिस्तान जाने से पहले शाह कहता है कि जीवन रहा तो दोबारा फिर मुलाकात करेंगे। नाटक में पवन वर्मा, मीरा तपस्वी, हरबंस लाल, शाहिद खान, नीलम मालवी सहित अन्यों ने अभिनय किया।