ताजा हालात में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास पर संशय
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टाउनशिप के मुद्दे पर अलगाववादियों के विरोध प्रदर्शन तथा सलाहुद्दीन जैसे आतंकियों के भी इसमें सुर मिलाने से विस्थापन का दर्द झेल रहे कश्मीरी पंडितों में दहशत है। उनकी आंखों के सामने 90 के दशक का मंजर घूम जाता है जब अपनों को खोने के बाद आतंकियों के डर के मारे उन्हें घाटी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
उनका मानना है कि अब हालात फिर से वही बन रहे हैं। सरकारी प्रयासों के बीच माहौल इस प्रकार का पैदा किया जा रहा है कि पंडित घर वापसी के लिए राजी न हों। ताजा स्थितियों में पुनर्वास पर संशय के बादल छाए हैं। हालांकि, कश्मीरी पंडितों का मानना है कि यदि केंद्र सरकार पुनर्वास के प्रति बहुत गंभीर हुई तब भी अक्टूबर से पहले इस दिशा में कोई प्रगति होने की संभावना नहीं है।
कारण कोई भी पर्यटन के पीक सीजन में किसी प्रकार का बवाल नहीं चाहेगा। इसके साथ ही अलगाववादियों का जवाब देने के लिए पंडितों ने भी मोर्चेबंदी शुरू कर दी है।
सरकार पर नहीं है यकीन
देशभर में रहने वाले कश्मीरी पंडितों को एकजुट कर उन्हें सामूहिक रूप से सम्मान की रक्षा की लड़ाई लड़ने को तैयार किया जा रहा है। इसके लिए जम्मू तथा दिल्ली में सामूहिक रूप से आवाज बुलंद करने की रणनीति बनाई गई है। कश्मीरी पंडित सरकारी प्रयासों पर संदेह जताते हुए कहते हैं कि केवल निहित स्वार्थ में इस मुद्दे को विवाद में घसीटा गया।
अलग टाउनशिप की वकालत पर अलगाववादियों ने घाटी में बंद तथा प्रदर्शन कर यह जता दिया कि वे किसी भी सूरत में पंडितों के लिए अलग टाउनशिप नहीं बनने देंगे। इससे पंडितों में दहशत है। उन्हें भय सता रहा है कि फिर 90 के दशक की कहानी दोहराई जा सकती है। अपनों का कत्लेआम किया जा सकता है।
उधर, लंगेट से विधायक इंजीनियर रशीद ने घाटी छोड़ने के लिए कश्मीरी पंडितों से ही सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की बात कहकर इस समुदाय को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की।
अभी धरातल पर कुछ भी नहीं
कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू का कहना है कि केंद्र सरकार ने अलग टाउनशिप तथा इसके लिए जमीन की व्यवस्था की बात तो जरूर की, लेकिन यह नहीं बताया कि कब तक पुनर्वास होगा।
कब तक टाउनशिप बनकर तैयार हो जाएगी। पुनर्वास कार्यक्रम घोषित करने से पहले पंडित समुदाय को विश्वास में लेने की कोशिश नहीं की गई। उनका कहना है कि अभी कुछ भी धरातल पर नहीं है।
अगले कुछ दिनों में पर्यटन का पीक सीजन शुरू हो जाएगा। ऐसे में हर कोई इसमें जुटेगा। यदि पुनर्वास कार्यक्रम धरातल पर उतरा भी तो वह अक्टूबर के आस पास ही संभव लगता है।