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लॉकडाउन में घरेलू हिंसा, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा- ऐसे मामलों को आवश्यक मानकर सुनवाई हो

Sun, 19 Apr 2020 12:33 PM IST
प्रशांत कुमार जेएनएफ, जम्मू
जेएनएफ, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 19 Apr 2020 12:33 PM IST
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Domestic violence in lockdown, Jammu Kashmir High Court said Hearing of such cases as necessary
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

लॉकडाउन के दौरान महिलाओं और बच्चियों के साथ हो रही घरेलू हिंसा की घटनाओं का जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सभी कोर्ट को हिदायत दी कि घरेलू हिंसा की घटनाओं को आवश्यक मानते हुए सुनवाई की जाए। कोर्ट ने अधिवक्ता मोनिका कोहली को इस मामले में न्यायमित्र नियुक्त किया है।

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हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायाधीश रजनीश ओसवाल ने अपने अपने घर से वीडियो कांफ्रेंसिंग से मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि पूरे विश्व में कोरोना महामारी के चलते महिलाओं एवं बच्चों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है।
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हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के समाज कल्याण विभाग के सचिव और जम्मू-कश्मीर स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य सचिव को नोटिस जारी किया। इनसे लॉकडाउन के चलते महिलाओं के प्रति होने वाले घरेलू या अन्य किसी प्रकार की हिंसा के संबंध में रिपोर्ट देने को कहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि विभिन्न देशों की ओर से अपनाए गए तरीकों का परीक्षण करते हुए दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में उठाए जाने वाले कदमों के संबंध में सुझाव दे।

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ऐसे मामलों में महिलाओं की सुरक्षा और उनके हितों को सुनिश्चित करें- कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों के लिए टेली / ऑनलाइन कानूनी और परामर्श सेवा और महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान तय किए जाने चाहिए। इसके साथ ही किराने तथा दवा की दुकानों पर शिकायत करने की सुविधा होनी चाहिए। इसके साथ ही खाली पड़े होटल, शिक्षण संस्थानों को आश्रय स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य सचिव घरेलू हिंसा से जुड़े लंबित मामलों की सूची तैयार करें और ऐसे मामलों में महिलाओं की सुरक्षा और उनके हितों को सुनिश्चित करें। वे इसके लिए पुलिस की भी सहायता ले सकते हैं। निर्देश दिया कि अगली तारीख पर उठाए जाने वाले कदमों की रिपोर्ट पेश की जाए।

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