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विज्ञापन या श्रेष्ठता का दावा न करें डॉक्टर : काउंसिल
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जम्मू और कश्मीर मेडिकल काउंसिल ने चिकित्सकों के लिए सोशल मीडिया के प्रयोग के लिए पहले से जारी दिशानिर्देश का पालन करने के लिए कहा है। काउंसिल ने कहा कि है चिकित्सक सोशल मीडिया पर अपना प्रचार, विज्ञापन या श्रेष्ठता का दावा न करें। न ही ऐसी कोई जानकारी शेयर करें जिससे मरीज की निजता या गोपनीयता भंग होती है।
निर्देश पत्र जारी कर काउंसिल ने भारतीय चिकित्सा परिषद विनियम, 2002 के अनुरूप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग के संबंध में पंजीकृत चिकित्सकों से कहा है कि उनको सेवाओं का विज्ञापन नहीं करना चाहिए, श्रेष्ठता का दावा नहीं करना चाहिए, या स्व-प्रचार गतिविधियों में शामिल नहीं होना चाहिए। प्रैक्टिस शुरू करना, पता बदलना, या अस्थायी अनुपस्थिति की घोषणा कर सकते हैं।
अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक, प्रयोगशालाएं राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर विज्ञापन दे सकते हैं, जो नाम, सेवाएं, कर्मचारी, सुविधाएं, शुल्क तक सीमित हैं। लाइक, फ़ॉलोअर्स, शेयर खरीदना या उच्च खोज रैंकिंग के लिए भुगतान करना वर्जित है।
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रोगी की जानकारी स्पष्ट सहमति के बिना प्रकट नहीं की जानी चाहिए। यदि रोगी की शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक स्थिति खराब है, तो सहमति अमान्य है। रोगी के प्रशंसापत्र, समर्थन या समीक्षाएं किसी भी स्थिति में सोशल मीडिया पर साझा नहीं की जा सकतीं।
अपनी विशेषज्ञता के अनुसार तथ्यात्मक, सत्यापन योग्य और गैर-भ्रामक शैक्षिक सामग्री साझा करने की अनुमति है। उपचार या ऑनलाइन दवाएं लिखने की सार्वजनिक चर्चा निषिद्ध है। रोगियों को उचित टेलीमेडिसिन या व्यक्तिगत परामर्श के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए।
उपचार के परिणामों, सर्जरी, प्रक्रियाओं या ठीक हुए मरीज़ों की तस्वीरों या वीडियो का प्रदर्शन प्रतिबंधित है। इसके अलावा, किसी भी उत्पाद, दवाइयों या व्यावसायिक चिकित्सा सेवाओं का समर्थन नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया के माध्यम से मरीज़ों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क करने की अनुमति नहीं है।
सावधान रहने की ताकीद करते हुए कहा गया है कि सामग्री को ज़िम्मेदारी से साझा करें और ऐसी सामग्री पोस्ट करने से बचें जो पेशेवर विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकती है। सीमाओं का सम्मान करें, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर डॉक्टर-मरीज के बीच उचित संबंध बनाए रखें।
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निर्देश पत्र जारी कर काउंसिल ने भारतीय चिकित्सा परिषद विनियम, 2002 के अनुरूप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग के संबंध में पंजीकृत चिकित्सकों से कहा है कि उनको सेवाओं का विज्ञापन नहीं करना चाहिए, श्रेष्ठता का दावा नहीं करना चाहिए, या स्व-प्रचार गतिविधियों में शामिल नहीं होना चाहिए। प्रैक्टिस शुरू करना, पता बदलना, या अस्थायी अनुपस्थिति की घोषणा कर सकते हैं।
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अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक, प्रयोगशालाएं राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर विज्ञापन दे सकते हैं, जो नाम, सेवाएं, कर्मचारी, सुविधाएं, शुल्क तक सीमित हैं। लाइक, फ़ॉलोअर्स, शेयर खरीदना या उच्च खोज रैंकिंग के लिए भुगतान करना वर्जित है।
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अपनी विशेषज्ञता के अनुसार तथ्यात्मक, सत्यापन योग्य और गैर-भ्रामक शैक्षिक सामग्री साझा करने की अनुमति है। उपचार या ऑनलाइन दवाएं लिखने की सार्वजनिक चर्चा निषिद्ध है। रोगियों को उचित टेलीमेडिसिन या व्यक्तिगत परामर्श के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए।
उपचार के परिणामों, सर्जरी, प्रक्रियाओं या ठीक हुए मरीज़ों की तस्वीरों या वीडियो का प्रदर्शन प्रतिबंधित है। इसके अलावा, किसी भी उत्पाद, दवाइयों या व्यावसायिक चिकित्सा सेवाओं का समर्थन नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया के माध्यम से मरीज़ों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क करने की अनुमति नहीं है।
सावधान रहने की ताकीद करते हुए कहा गया है कि सामग्री को ज़िम्मेदारी से साझा करें और ऐसी सामग्री पोस्ट करने से बचें जो पेशेवर विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकती है। सीमाओं का सम्मान करें, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर डॉक्टर-मरीज के बीच उचित संबंध बनाए रखें।