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जानें क्यों, कश्मीर में अलगाववादी खेमें में उपजे मतभेद?

Wed, 28 Dec 2016 11:08 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू Updated Wed, 28 Dec 2016 11:08 AM IST
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differences emerged in separatist groups of jammu and kashmir
Separatist - फोटो : File Photo

कश्मीर में बंद और हड़ताल के नए कलेंडर जारी करने पर अलगाववादियों में मतभेद है। हुर्रियत के उदारवादी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फारूक ने पूरे साल भर के हड़ताल कलेंडर की जगह बड़े प्रदर्शनों और दीर्घकालिक संघर्ष पर जोर दिया है।

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अलगाववादियों के कट्टरवादी नेताओं में शुमार सैयद अली शाह गिलानी और यासीन मलिक हर सप्ताह बंद और हड़ताल के कलेंडर पर जोर दे रहे हैं। अलगाववादी नेताओं के बीच इस मुद्दे पर बैठक के बाद नए साल के लिए बंद और हड़ताल का नया कलेंडर जारी हो सकता है। 
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आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद बंद और हड़ताल के कलेंडर अलगाववादियों के सभी धड़े मिलकर संयुक्त रूप से जारी करते रहे हैं। हड़ताल के कलेंडर को पाकिस्तान का भी समर्थन मिलता रहा है। वर्तमान में अलगाववादियों ने हड़ताल कलेंडर में पांच दिन की रियायत दे रखी है। 

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कश्मीर में फिर से शुरू हुए प्रदर्शन

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कश्मीर में हिंसा - फोटो : File Photo
पिछले कलेंडर में अलगाववादियों ने बंद और हड़ताल के लिए शुक्रवार और शनिवार का दिन तय किया था लेकिन वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को निवास संबंधी पहचान पत्र दिए जाने और सरफेसी एक्ट को कश्मीर में लागू करने के विरोध में अब रियायत वाले दिनों में भी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। 

अलगाववादियों की संयुक्त अपील के बाद सोमवार को जामिया मस्जिद से नौहट्टा चौक तक के मार्च को नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अलगाववादियों ने कुछ सियासी दलों और सिविल सोसाइटी के लोगों को भी जोड़ा है। अलगाववादियों ने प्रदर्शन के साथ हिंसा और पत्थरबाजी में घायल लोगों की मदद के लिए भी मुहिम चलाई है। 

कश्मीरी लोगों को भड़का रहे हैं अलगाववादी

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अलगाववादी नेता यासीन मलिक - फोटो : Amar Ujala
पत्थरबाजी के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में पेलेट गन से आंखें खो चुके बच्चों की तस्वीरें बांटकर युवकों को भड़काने की कोशिश शुरू हुई है। अलगाववादी प्रचारित कर रहे हैं कि केंद्र सरकार पीडीपी की मदद से कश्मीर में इजरायल माडल लागू करना चाहती है।

सुरक्षा बलों में नौकरियों के लिए केंद्र की पहल पर वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को पहचान पत्र दिया जा रहा है लेकिन अलगाववादियों ने इसे कश्मीर में मुसलमानों को अल्पसंख्यक बनाने की साजिश के रूप में प्रचारित किया है। 
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