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जम्मू-कश्मीर में विकास ने ली आतंक की जगहः एलजी
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जम्मू। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में विकास ने आतंक की जगह ले ली है। लोगों को अधिकारों और विकास से वंचित करने वाली बाधाओं को हटाया गया है। जम्मू-कश्मीर को शिक्षा और विज्ञान के पावर हाउस के रूप में बदलने के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए विकास के अवसर सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। एलजी मंगलवार को नई दिल्ली में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख विकास गतिशीलता और भविष्य, विषय पर हुए अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे। दो दिवसीय संगोष्ठी स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, भारतीय दूतावास, सियोल, कोरिया गणराज्य द्वारा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सहयोग से की गई थी। एलजी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का विकास माडल शांति, प्रगति, समृद्धि और लोग पहले के आसपास घूमता है। जम्मू-कश्मीर अमर जैविक मिश्रित भारतीय संस्कृति का एक उदाहरण है। देश में बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने के बावजूद जम्मू-कश्मीर में विकास की गति और प्रसार कृत्रिम बाधाओं के कारण बाधित हुआ। यहां आर्थिक विकास, पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक समावेश पूरी तरह से गायब थे। सभी लोगों की सामाजिक-आर्थिक प्रगति को वास्तविकता में बदलने पर काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में हमने लोगों के कल्याण के लिए आउट आफ बाक्स समाधानों में संकोच नहीं किया। सिस्टम को सरल बनाकर लोगों को बेहतर सेवाएं दी जा रही हैं।
पड़ोसी मुल्क से प्रायोजित आतंकवाद की जगह अब विकास ने ले ली है। जिला विकास परिषद के चुनाव में भारी मतदान ने जमीनी लोकतंत्र में लोगों के विश्वास और विकास का लाभ उठाने की उनकी इच्छा को दिखाया है। जम्मू क्मीर के इतिहास में पहली बार नए कल्याणकारी कानून लागू किए गए हैं। पिछले एक साल में प्रदेश के औद्योगिक, बिजली, कृषि और इसके संबद क्षेत्रों का विस्तार किया गया है। 28400 करोड़ रुपये की सब्सिडी की पेशकश करने वाली नई औद्योगिक विकास योजना निवेश को आकर्षित कर रही है। 23500 करोड़ रुपये के निजी निवेश का प्रस्ताव मिला है और अगले साल तक यह संख्या 50 हजार करोड़ रुपये तक की जा सकती है। प्रमुख उत्पादनों पर जीआई टैगिंग की व्यवस्था की गई है।
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प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए विकास के अवसर सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। एलजी मंगलवार को नई दिल्ली में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख विकास गतिशीलता और भविष्य, विषय पर हुए अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे। दो दिवसीय संगोष्ठी स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, भारतीय दूतावास, सियोल, कोरिया गणराज्य द्वारा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सहयोग से की गई थी। एलजी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का विकास माडल शांति, प्रगति, समृद्धि और लोग पहले के आसपास घूमता है। जम्मू-कश्मीर अमर जैविक मिश्रित भारतीय संस्कृति का एक उदाहरण है। देश में बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने के बावजूद जम्मू-कश्मीर में विकास की गति और प्रसार कृत्रिम बाधाओं के कारण बाधित हुआ। यहां आर्थिक विकास, पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक समावेश पूरी तरह से गायब थे। सभी लोगों की सामाजिक-आर्थिक प्रगति को वास्तविकता में बदलने पर काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में हमने लोगों के कल्याण के लिए आउट आफ बाक्स समाधानों में संकोच नहीं किया। सिस्टम को सरल बनाकर लोगों को बेहतर सेवाएं दी जा रही हैं।
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पड़ोसी मुल्क से प्रायोजित आतंकवाद की जगह अब विकास ने ले ली है। जिला विकास परिषद के चुनाव में भारी मतदान ने जमीनी लोकतंत्र में लोगों के विश्वास और विकास का लाभ उठाने की उनकी इच्छा को दिखाया है। जम्मू क्मीर के इतिहास में पहली बार नए कल्याणकारी कानून लागू किए गए हैं। पिछले एक साल में प्रदेश के औद्योगिक, बिजली, कृषि और इसके संबद क्षेत्रों का विस्तार किया गया है। 28400 करोड़ रुपये की सब्सिडी की पेशकश करने वाली नई औद्योगिक विकास योजना निवेश को आकर्षित कर रही है। 23500 करोड़ रुपये के निजी निवेश का प्रस्ताव मिला है और अगले साल तक यह संख्या 50 हजार करोड़ रुपये तक की जा सकती है। प्रमुख उत्पादनों पर जीआई टैगिंग की व्यवस्था की गई है।
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