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जोजिला टनल सितंबर 2026 तक होगी पूरी, 52 प्रतिशत कार्य हो चुका पूरा : गडकरी
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-केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेसी
लेह। बहुप्रतीक्षित जोजिला टनल परियोजना सितंबर 2026 में पूरी होगी। वर्तमान में इसका 52 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इससे श्रीनगर और लेह के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी रहेगी। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में दी।
उन्होंने कहा कि जोजिला परियोजना की कुल अनुमानित लागत 6,809.69 करोड़ है। इसमें 13.153 किलोमीटर सुरंग के साथ 17.030 किलोमीटर की एप्रोच सड़कों का निर्माण शामिल है। इससे इसकी लंबाई 30.18 किलोमीटर हो जाती है। परियोजना के पूरा होने पर यह एशिया की सबसे लंबी सुरंग होगी, जो कश्मीर और लद्दाख के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी प्रदान करेगी।
मंत्री ने इस परियोजना द्वारा उत्पन्न रोजगार के अवसरों पर बताया कि पर्यवेक्षण सलाहकार, ठेकेदार, और उप-ठेकेदारों द्वारा 1,043 स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान किया गया है। यह परियोजना न केवल बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करती है, बल्कि स्थानीय रोजगार पर भी। इससे समुदाय को इस रणनीतिक पहल से सीधा लाभ मिलेगा।
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जोजिला सुरंग 7.57 मीटर ऊंची है। इसे घोड़े के नाल के आकार, एकल ट्यूब, दो-लेन सुरंग के रूप में डिजाइन किया गया है। यह सुरंग हिमालय में जोजिला दर्रे के नीचे से गुजरती है और कश्मीर के गांदरबल को लद्दाख के कारगिल जिले के द्रास कस्बे से जोड़ती है।
उन्होंने बताया कि सुरंग को स्मार्ट टनल प्रणाली से लैस किया जाएगा। इसमें सीसीटीवी, रेडियो नियंत्रण, निर्बाध विद्युत आपूर्ति और वेंटिलेशन जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। सुरंग का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड का अनुसरण करता है। इससे सरकार को 5,000 करोड़ से अधिक की बचत हुई है। इस परियोजना से जोजिला दर्रे के पार यात्रा का समय तीन घंटे से घटकर सिर्फ 20 मिनट होने की उम्मीद है, जिससे ईंधन की भारी बचत होगी।
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संवाद न्यूज एजेसी
लेह। बहुप्रतीक्षित जोजिला टनल परियोजना सितंबर 2026 में पूरी होगी। वर्तमान में इसका 52 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इससे श्रीनगर और लेह के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी रहेगी। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में दी।
उन्होंने कहा कि जोजिला परियोजना की कुल अनुमानित लागत 6,809.69 करोड़ है। इसमें 13.153 किलोमीटर सुरंग के साथ 17.030 किलोमीटर की एप्रोच सड़कों का निर्माण शामिल है। इससे इसकी लंबाई 30.18 किलोमीटर हो जाती है। परियोजना के पूरा होने पर यह एशिया की सबसे लंबी सुरंग होगी, जो कश्मीर और लद्दाख के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी प्रदान करेगी।
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मंत्री ने इस परियोजना द्वारा उत्पन्न रोजगार के अवसरों पर बताया कि पर्यवेक्षण सलाहकार, ठेकेदार, और उप-ठेकेदारों द्वारा 1,043 स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान किया गया है। यह परियोजना न केवल बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करती है, बल्कि स्थानीय रोजगार पर भी। इससे समुदाय को इस रणनीतिक पहल से सीधा लाभ मिलेगा।
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जोजिला सुरंग 7.57 मीटर ऊंची है। इसे घोड़े के नाल के आकार, एकल ट्यूब, दो-लेन सुरंग के रूप में डिजाइन किया गया है। यह सुरंग हिमालय में जोजिला दर्रे के नीचे से गुजरती है और कश्मीर के गांदरबल को लद्दाख के कारगिल जिले के द्रास कस्बे से जोड़ती है।
उन्होंने बताया कि सुरंग को स्मार्ट टनल प्रणाली से लैस किया जाएगा। इसमें सीसीटीवी, रेडियो नियंत्रण, निर्बाध विद्युत आपूर्ति और वेंटिलेशन जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। सुरंग का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड का अनुसरण करता है। इससे सरकार को 5,000 करोड़ से अधिक की बचत हुई है। इस परियोजना से जोजिला दर्रे के पार यात्रा का समय तीन घंटे से घटकर सिर्फ 20 मिनट होने की उम्मीद है, जिससे ईंधन की भारी बचत होगी।